ब्रेकिंग
न्यूजताज़ा

साड़ी में AK-47 से फायरिंग का वीडियो, IPS अंकिता शर्मा को नोटिस पर सवाल कि बाकी अफसरों का क्या

विजयादशमी पर शस्त्र पूजा के दौरान साड़ी पहनकर AK-47 से हवा में फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद राजनांदगांव SP अंकिता शर्मा को कारण बताओ नोटिस मिला है। रिपोर्टों के मुताबिक कई जिलों के अफसरों के ऐसे वीडियो सामने आए, लेकिन नोटिस सिर्फ उन्हें दिया गया।

राइफल और पुलिस की प्रतीकात्मक ग्राफिक, साड़ी में AK-47 फायरिंग वीडियो पर IPS अंकिता शर्मा को नोटिस का टेक्स्ट
ग्राफिक: TimeTrolls (प्रतीकात्मक चित्र)

मुख्य बातें

  • नोटिस में क्या है और आगे क्या होगा
  • सिर्फ एक अफसर को नोटिस क्यों
  • असली गोली या ‘आवाज़ी कारतूस’
  • साड़ी, सेना के पूर्व अफसर और सोशल मीडिया की दो राय

विजयादशमी पर पुलिस लाइन में शस्त्र पूजा छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के कई हिस्सों में पुरानी परंपरा है। लेकिन इस बार राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक, IPS अंकिता शर्मा का एक वीडियो इस परंपरा पर ही सवाल खड़े कर गया। वीडियो में साड़ी पहने SP शस्त्र पूजा के बाद AK-47 राइफल से हवा में कई राउंड फायर करती दिखती हैं। वीडियो वायरल हुआ, सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी, और अब पुलिस मुख्यालय ने उन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक घटना 20 अक्टूबर को राजनांदगांव पुलिस लाइन में विजयादशमी पर हुई ‘शस्त्र पूजा’ के दौरान की है। वीडियो सोशल मीडिया के साथ कई न्यूज़ चैनलों और वेब पोर्टलों पर चला और सुरक्षा, अनुशासन और हथियार संभालने के प्रोटोकॉल पर बहस शुरू हो गई।

वीडियो स्रोत: IBC24 (YouTube) | मूल वीडियो देखें

नोटिस में क्या है और आगे क्या होगा

राजनांदगांव रेंज के IG अजय यादव ने नोटिस की पुष्टि की है। लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय ने SP से इस मामले में जवाब मांगा है, और जवाब मिलने के बाद वे अपनी टिप्पणी दर्ज कर मामला मुख्यालय भेजेंगे, जिसके बाद वहां से मिले निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी। नवभारत टाइम्स के अनुसार IG ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो पर कई तरह के कमेंट आए और पुलिस की गरिमा का ध्यान रखते हुए जवाब मांगा गया है।

इंडियन एक्सप्रेस ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से नोटिस की वजह भी बताई: वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, उस पर नकारात्मक प्रतिक्रिया आई, और यह नियमों और सुरक्षा मानकों के खिलाफ था, इसलिए संज्ञान लेकर परिस्थितियां स्पष्ट करने को कहा गया। यानी फिलहाल यह स्पष्टीकरण का चरण है, कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हुई है।

सिर्फ एक अफसर को नोटिस क्यों

इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू यही है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उसी त्योहार पर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर समेत कई जिलों के वरिष्ठ पुलिस अफसरों के राइफल से हवा में फायरिंग करते वीडियो सामने आए हैं। एक अधिकारी ने अखबार से कहा कि वरिष्ठ अफसर का कुछ राउंड हवा में फायर करना शुभ माना जाता है। जब पूछा गया कि क्या बाकी अफसरों को भी नोटिस भेजा गया, तो एक वरिष्ठ अधिकारी का जवाब था कि नहीं, नोटिस सिर्फ शर्मा को दिया गया है क्योंकि उनका वीडियो वायरल हुआ और इससे पुलिस की छवि प्रभावित हुई।

न्यूज़18 और लाइव हिंदुस्तान के मुताबिक इसी कार्यक्रम का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें राजनांदगांव के एडिशनल SP कीर्तन राठौर भी AK-47 चलाते दिखे। इससे यह सवाल और गहरा होता है कि कार्रवाई का पैमाना नियम का उल्लंघन है या वीडियो का वायरल होना। अगर नियम टूटा है तो वह हर जिले में टूटा होगा; अगर पैमाना ‘छवि’ है, तो यह पुलिस की जवाबदेही को लेकर एक अलग बहस खोलता है।

असली गोली या ‘आवाज़ी कारतूस’

बहस का तकनीकी पक्ष भी है। नाम न छापने की शर्त पर एक IPS अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शस्त्र पूजा में खाली कारतूस, जिन्हें आम बोलचाल में ‘आवाज़ी कारतूस’ कहा जाता है, से फायरिंग की परंपरा पूरे राज्य में रही है, और ऐसे मौकों पर जीवित कारतूस इस्तेमाल नहीं होते। उसी अधिकारी ने यह भी याद दिलाया कि हवा में चलाई गई गोली भी नीचे आती है और आसपास के लोगों को घायल कर सकती है। वीडियो में इस्तेमाल हुए कारतूस असली थे या खाली, इसकी आधिकारिक जानकारी अब तक सामने नहीं आई है।

सेवानिवृत्त IPS अधिकारी आर.के. विज ने लाइव हिंदुस्तान और इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि परंपरा मूल रूप से हथियारों की पूजा की है, उनसे फायरिंग की नहीं, और ऐसी फायरिंग से दुर्घटना का खतरा रहता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।

साड़ी, सेना के पूर्व अफसर और सोशल मीडिया की दो राय

सोशल मीडिया पर दो खेमे साफ दिखे। पूर्व सैन्य अधिकारी के.जे.एस. ढिल्लों ने X पर लिखा कि वीडियो में भरे हुए हथियार को खतरनाक तरीके से गलत ढंग से संभाला गया, हथियार सुरक्षा के सभी पहलुओं का उल्लंघन हुआ और भरी हुई राइफल हर दिशा में घुमाई गई। उन्होंने यह भी कहा कि पृष्ठभूमि में मौजूद लोग साफ तौर पर डरे हुए थे, और आपत्ति जताई कि सर्विस हथियार एक अनधिकृत काम के लिए, अनधिकृत पोशाक में चलाया गया। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सेना के पूर्व अधिकारी कर्नल दीपक कुमार ने इसे लापरवाह और गैर-पेशेवर बताया।

दूसरी ओर बचाव में भी आवाज़ें उठीं। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पूर्व मेजर एल.एस. चौधरी ने माना कि हथियार संभालने में कमियां थीं, लेकिन कहा कि इन्हें सुधारा जाना चाहिए और छत्तीसगढ़ में उनके काम को बदनाम नहीं करना चाहिए। एक अन्य यूज़र ने X पर लिखा कि वे एक प्रशिक्षित IPS अधिकारी हैं और उनकी आलोचना का एक हिस्सा इसलिए है क्योंकि उन्होंने साड़ी पहनकर राइफल चलाई। यानी बहस का एक धड़ा हथियार सुरक्षा पर है, तो दूसरा इस पर कि क्या पोशाक और महिला अफसर होने की वजह से यह मामला ज़्यादा उछला।

अंकिता शर्मा का पक्ष

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उसने अंकिता शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए फोन और मैसेज किए, लेकिन जवाब नहीं मिला। नोटिस पर उनका जवाब क्या होगा, इसी पर अब सबकी नज़र है; उनके जवाब का इंतज़ार है। NDTV इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में उन्हें छत्तीसगढ़ की पहली महिला IPS बताया है, और एक जाना-पहचाना चेहरा होने की वजह से भी यह वीडियो तेज़ी से फैला।

परंपरा और नियम के बीच की लकीर

शस्त्र पूजा पुलिस और सेना दोनों में मनोबल और परंपरा से जुड़ी रस्म है, और हर्ष फायरिंग को लेकर देश में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। 2019 में आर्म्स एक्ट में संशोधन कर लापरवाही से की गई हर्ष फायरिंग को दंडनीय अपराध बनाया गया था। ऐसे में जब कानून लागू करने वाली संस्था के भीतर ही यह रस्म हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इसके लिए कोई लिखित प्रोटोकॉल है, और अगर है तो क्या हर जिले में उसका पालन हुआ।

यह मामला अंततः एक अफसर से बड़ा है। अगर पुलिस मुख्यालय सिर्फ वायरल वीडियो पर कार्रवाई करता है, तो संदेश यह जाएगा कि गलती से ज़्यादा उसका कैमरे में आना मायने रखता है। अगर वह इसे मौका बनाकर पूरे राज्य के लिए शस्त्र पूजा का साफ प्रोटोकॉल तय करता है, जैसे सिर्फ खाली कारतूस, तय सुरक्षित जगह और प्रशिक्षित हैंडलिंग, तो यह विवाद एक ज़रूरी सुधार में बदल सकता है।

इस रिपोर्ट के तथ्य द इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स, लाइव हिंदुस्तान, नवभारत टाइम्स और न्यूज़18 हिंदी और NDTV इंडिया की खबरों से लिए गए हैं। अंग्रेज़ी में दिए गए बयानों का भावार्थ हिंदी में है।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

अगली खबर › UDAN योजना के 10 साल: 1.72 करोड़ यात्री, 687 रूट; अब ₹28,840 करोड़ से 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

और विषय पढ़ें

टिप्पणियाँ

अपनी राय दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

WhatsApp पर शेयर करें
Exit mobile version