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मार्को रुबियो जामनगर पहुंचे: रिलायंस रिफाइनरी देखी, अमेरिका बना भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 21 अक्टूबर 2026 को जामनगर में रिलायंस की रिफाइनरी, वनतारा और ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। मुंबई में जयशंकर से ऊर्जा, रक्षा और परमाणु सहयोग पर बात हुई।

मार्को रुबियो और एस. जयशंकर हाथ मिलाते हुए, पीछे भारत और अमेरिका के झंडे (फाइल फोटो)
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वॉशिंगटन, 3 फरवरी 2026 (फाइल फोटो)। फोटो: अमेरिकी विदेश विभाग / Freddie Everett (Wikimedia Commons, सार्वजनिक डोमेन)

मुख्य बातें

  • मार्को रुबियो 21 अक्टूबर 2026 को जामनगर पहुंचे, रिलायंस रिफाइनरी का दौरा किया
  • मुकेश अंबानी और परिवार ने स्वागत किया; वनतारा और ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स भी गए
  • अक्टूबर को मुंबई में जयशंकर से ऊर्जा, रक्षा और परमाणु सहयोग पर बात
  • राजदूत गोर: भारत के LPG आयात में अमेरिका का हिस्सा 10% से कम से 67% हुआ
  • रुबियो ने भारत को रिफाइनिंग “सुपरपावर” बताया, वेनेज़ुएला तेल प्रोसेस करने की वकालत

अमेरिका के विदेश मंत्री जब भारत आते हैं तो आमतौर पर दिल्ली में बैठकें होती हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। मार्को रुबियो बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को गुजरात के जामनगर पहुंचे और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के विशाल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का दौरा किया। एक दिन पहले मुंबई में उन्होंने भारत को कच्चा तेल रिफाइन करने वाला “सुपरपावर” बताया था।

यह दौरा साफ बताता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों में इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा ऊर्जा है: तेल, गैस और LPG। आइए समझते हैं कि दौरे में क्या हुआ और यह क्यों अहम है।

मार्को रुबियो का भारत दौरा: मुंबई से जामनगर तक

अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम के मुताबिक रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच समरकंद, मुंबई और जामनगर की यात्रा पर हैं। 20 अक्टूबर को मुंबई में उनकी मुलाकात विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हुई।

विदेश विभाग के बयान के अनुसार दोनों नेताओं ने मध्य-पूर्व समेत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बात की। रुबियो ने कहा कि अमेरिका के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ने से भारत की सप्लाई चेन में विविधता आ सकती है। उन्होंने रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग में हुई प्रगति की तारीफ की और भारत से अमेरिकी तकनीक और सिस्टम ज़्यादा खरीदने की वकालत की।

BusinessLine के मुताबिक इस साल यह रुबियो की दूसरी भारत यात्रा है, और इसका फोकस मुंबई और जामनगर पर रहा।

जामनगर में क्या हुआ?

PTI के मुताबिक रुबियो बुधवार को जामनगर पहुंचे। India Today की रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस के चेयरमैन मुकेश अंबानी, नीता अंबानी, ईशा और अनंत अंबानी ने उनका स्वागत किया। दौरे में रिफाइनरी के अलावा रिलायंस का पशु बचाव केंद्र वनतारा और धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स भी शामिल था। अधिकारियों ने इसे “निजी दौरा” बताया और दोनों पक्षों ने बातचीत का ब्योरा जारी नहीं किया।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी रुबियो के साथ थे। गोर ने X पर लिखा कि पिछले एक साल में भारत के LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 10% से कम से बढ़कर 67% हो गई है, यानी अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर है।

जामनगर रिफाइनरी इतनी खास क्यों है?

PTI ने रिलायंस की वेबसाइट के हवाले से बताया कि जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे जटिल सिंगल-साइट रिफाइनरी है:

  • कच्चा तेल प्रोसेस करने की क्षमता करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन (1.4 मिलियन बैरल)।
  • कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 21.1, जिसे कंपनी दुनिया में सबसे ऊंचा बताती है।
  • अब तक दुनिया भर के 216 से ज़्यादा तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस कर चुकी है।

The Hindu के मुताबिक रुबियो ने मुंबई में कहा था कि भारत के पास भारी (heavy) कच्चा तेल रिफाइन करने की क्षमता है, और जैसे-जैसे वेनेज़ुएला का तेल उत्पादन बढ़ेगा, भारत इसमें भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा का सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा से है, क्योंकि देश ऊर्जा को लेकर युद्ध लड़ते हैं और ऊर्जा की कमी से अर्थव्यवस्थाएं डगमगा जाती हैं।

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अमेरिका में रिफाइनरी: रिश्ते का दूसरा पहलू

BusinessLine के अनुसार रिलायंस अमेरिका के टेक्सास राज्य के ब्राउन्सविल में 1,68,000 बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली एक नई रिफाइनरी परियोजना में साझेदारी की योजना बना रही है। राजदूत गोर ने इसे करीब 50 साल में अमेरिका की पहली नई तेल रिफाइनरी में निवेश बताया और कहा कि इससे अमेरिका में ऊर्जा उत्पादन और नौकरियां बढ़ेंगी।

यानी रिश्ता एकतरफा नहीं है। अमेरिका भारत को ज़्यादा तेल-गैस बेचना चाहता है, और भारतीय कंपनी अमेरिका में निवेश कर सकती है।

भारत के लिए यह दौरा क्यों अहम है?

The Hindu के मुताबिक यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया के संघर्ष की वजह से तेल की कीमतों को लेकर दुनिया भर में अनिश्चितता है। भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए सप्लाई के ज़्यादा स्रोत होना भारत के लिए फायदेमंद है।

अमेरिका भी चाहता है कि भारत रूस पर ऊर्जा निर्भरता कम करे और पश्चिमी गोलार्ध (अमेरिका, वेनेज़ुएला आदि) का तेल ज़्यादा खरीदे। भारत की बढ़ती कूटनीतिक व्यस्तता के बारे में आप पोलैंड के PM डोनाल्ड टस्क के भारत दौरे और भारत-न्यूज़ीलैंड FTA पर हमारी रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।

आपके लिए इसका मतलब

  • रसोई गैस: अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर है (राजदूत गोर का दावा)। ज़्यादा सप्लायर होने से किसी एक इलाके में संकट का असर कम हो सकता है। सिलेंडर के दाम पर इसका सीधा असर क्या होगा, इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं है।
  • पेट्रोल-डीज़ल: रिफाइनिंग क्षमता बढ़ना और तेल के ज़्यादा स्रोत होना लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन पंप पर कीमतें कई चीज़ों पर निर्भर करती हैं।
  • रोज़गार और कारोबार: ऊर्जा व्यापार और निवेश बढ़ने से दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्ते और गहरे होंगे।

आगे क्या देखना होगा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत वेनेज़ुएला का तेल ज़्यादा खरीदेगा और अमेरिका से LPG व कच्चे तेल का आयात और बढ़ेगा। साथ ही रक्षा, असैन्य परमाणु सहयोग और तकनीक खरीद पर आगे क्या ठोस समझौते होते हैं, इस पर भी नज़र रहेगी। सरकार या कंपनियों की ओर से कोई नई आधिकारिक घोषणा आने पर हम यह खबर अपडेट करेंगे।

एक लाइन में: मार्को रुबियो का जामनगर दौरा दिखाता है कि भारत-अमेरिका रिश्तों का नया केंद्र ऊर्जा है, जहां भारत खरीदार भी है और रिफाइनिंग पावरहाउस भी।

आपकी राय: क्या भारत को अमेरिका से तेल-गैस खरीद और बढ़ानी चाहिए, या अलग-अलग देशों से संतुलन बनाए रखना बेहतर है? कमेंट में ज़रूर बताएं।

स्रोत

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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