अगर सरकार का नया ड्राफ्ट नियम जैसा है वैसा पास हो गया, तो आने वाले कुछ सालों में भारत में बिकने वाली हर पैसेंजर कार में AEBS यानी एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम ज़रूरी हो जाएगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 19 अक्टूबर 2026 की तारीख वाली अधिसूचना G.S.R. 904(E) में केंद्रीय मोटर यान नियमावली, 1989 में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। यह अधिसूचना 21 अक्टूबर 2026 के भारत के राजपत्र (असाधारण) में छपी है। इसके मुताबिक 1 अक्टूबर 2030 से बनने वाले नए कार मॉडल और 1 अक्टूबर 2032 से बनने वाली सभी कारों में AEBS लगाना होगा।
यह खबर उन लोगों के लिए खास है जो अगले एक-दो साल में कार खरीदने की सोच रहे हैं, और उनके लिए भी जो टैक्सी चलाते हैं या टैक्सी फ्लीट रखते हैं। ड्राफ्ट में सिर्फ ब्रेकिंग ही नहीं, लेन कीपिंग, ड्राइवर की झपकी पकड़ने वाले सिस्टम, स्टीयरिंग, बच्चों की ISOFIX सीट और डिक्की के सामान से जुड़े नियम भी हैं। नीचे हमने सरकारी राजपत्र पढ़कर आसान भाषा में समझाया है कि कौन-सा नियम किस पर और कब से लागू होगा, और इसका आपकी जेब और आपकी सुरक्षा पर क्या असर पड़ सकता है।
राजपत्र में कौन-सा नियम, किस तारीख से
यह टेबल सीधे MoRTH की ड्राफ्ट अधिसूचना (G.S.R. 904(E)) से बनाई गई है। जानकारी 24 अक्टूबर 2026 तक की है। ध्यान रहे, यह अभी ड्राफ्ट है; सुझावों के बाद तारीखें या शर्तें बदल सकती हैं।
| फीचर / नियम | किस गाड़ी पर | कब से (निर्माण तिथि) | मानक |
|---|---|---|---|
| AEBS लगा हो तो मानक पूरा करना | M1 (पैसेंजर) और N1 (छोटी मालवाहक) | 1 अक्टूबर 2028 | AIS-185 |
| AEBS अनिवार्य: नए मॉडल | M1 | 1 अक्टूबर 2030 | AIS-185 |
| AEBS अनिवार्य: सभी मॉडल | M1 | 1 अक्टूबर 2032 | AIS-185 |
| इमरजेंसी लेन कीपिंग (ELKS) लगा हो तो मानक | M1 | 1 अक्टूबर 2027 | AIS-191 (Part 1) |
| ELKS अनिवार्य | टैक्सी के रूप में रजिस्टर होने वाली M1 | 1 अक्टूबर 2029 | AIS-191 (Part 1) |
| ऑटोमैटिक स्टीयरिंग फंक्शन (ACSF) अनिवार्य | टैक्सी के रूप में रजिस्टर होने वाली M1 | 1 अक्टूबर 2029 | AIS-193 |
| ड्राइवर झपकी/ध्यान चेतावनी (DDAW) अनिवार्य | टैक्सी के रूप में रजिस्टर होने वाली M1 | 1 अक्टूबर 2029 | AIS-184 |
| स्टीयरिंग एफर्ट का मानक | ज़्यादातर मोटर वाहन (बाइक और बिना स्टीयरिंग व्हील वाले थ्री-व्हीलर छोड़कर) | 1 अक्टूबर 2027 | AIS-193 |
| सामान रोकने (luggage retention) का नियम | M1 | नए मॉडल 1 अप्रैल 2028, सभी 1 अक्टूबर 2028 | IS 15546:2005 |
| ISOFIX और i-Size सीट का मानक (अगर दिया हो) | M1 | नए मॉडल 1 अक्टूबर 2027, सभी 1 अक्टूबर 2028 | AIS-182 |
टेबल से एक बात साफ है: सरकार दो कदम में चल रही है। पहले कदम में शर्त सिर्फ इतनी है कि अगर कंपनी कोई फीचर दे रही है, तो वह तय सरकारी मानक पर खरा उतरे। दूसरे कदम में वही फीचर सबके लिए ज़रूरी हो जाता है। AEBS के लिए पहला कदम 2028 में है और दूसरा 2030 से 2032 के बीच।
AEBS होता क्या है, और यह ब्रेक कब लगाता है
AEBS कार के आगे लगे कैमरे, रडार या दोनों की मदद से सामने की गाड़ी या रुकावट पर लगातार नज़र रखता है। अगर सिस्टम को लगे कि टक्कर होने वाली है और ड्राइवर ने समय पर ब्रेक नहीं लगाया, तो पहले यह चेतावनी देता है, और फिर भी जवाब न मिले तो खुद ब्रेक लगा देता है। मकसद या तो टक्कर रोकना है, या रफ्तार इतनी कम कर देना कि चोट कम लगे।
बाज़ार में कंपनियां इसे अलग-अलग नाम से बेचती हैं। टोयोटा इसे Autonomous Emergency Braking कहती है, तो हुंडई इसे Forward Collision-Avoidance Assist के नाम से देती है। ड्राफ्ट नियम का फायदा यह है कि नाम चाहे जो हो, सिस्टम को AIS-185 मानक के हिसाब से काम करना होगा। आज हर कंपनी अपने हिसाब से इसकी ट्यूनिंग करती है, और खरीदार के पास यह जानने का कोई सीधा तरीका नहीं होता कि किसका सिस्टम कितना भरोसेमंद है। एक साझा मानक से यह फर्क कम होना चाहिए।
M1 और N1 का मतलब: आपकी गाड़ी इसमें आती है या नहीं
सरकारी भाषा में M1 वह गाड़ी है जो सवारी ढोने के लिए बनी है और जिसमें ड्राइवर के अलावा ज़्यादा से ज़्यादा 8 सीटें हैं। यानी हैचबैक, सेडान, SUV और MPV, सब M1 में आती हैं, चाहे पेट्रोल हों, डीज़ल, CNG या इलेक्ट्रिक। N1 हल्की मालवाहक गाड़ियां हैं, जिनका कुल वज़न 3.5 टन तक होता है, जैसे छोटे पिकअप।
ड्राफ्ट में AEBS को अनिवार्य सिर्फ M1 के लिए किया गया है। N1 पर बस इतनी शर्त है कि अगर उसमें AEBS दिया जाए तो वह 2028 से AIS-185 पूरा करे। बाइक और स्कूटर इस नियम के दायरे में नहीं हैं। इसलिए जो पाठक दोपहिया खरीदने की सोच रहे हैं, उनके लिए इस ड्राफ्ट से कुछ नहीं बदलता।
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टैक्सी पर नियम पहले क्यों आ रहे हैं
ड्राफ्ट में एक दिलचस्प बात यह है कि टैक्सी के रूप में रजिस्टर होने वाली कारों के लिए 1 अक्टूबर 2029 से तीन चीज़ें ज़रूरी की गई हैं: लेन से भटकने पर गाड़ी को वापस लाने वाला ELKS, ऑटोमैटिक स्टीयरिंग फंक्शन (ACSF) और ड्राइवर की झपकी या ध्यान भटकने पर चेतावनी देने वाला DDAW सिस्टम। निजी कारों के लिए ये तीनों अभी वैकल्पिक हैं, बस लगे हों तो मानक के हिसाब से होने चाहिए।
इसके पीछे का तर्क समझना मुश्किल नहीं है। टैक्सी ड्राइवर रोज़ लंबे घंटे गाड़ी चलाते हैं, कई बार रात में और हाईवे पर। थकान से होने वाली गलती का खतरा उन्हीं के साथ सबसे ज़्यादा होता है, और उनकी गाड़ी में हर बार सवारी भी बैठी होती है। हमारी राय में फ्लीट मालिकों को यह नियम शुरू में महंगा लगेगा, लेकिन अगर इससे हादसे और क्लेम कम होते हैं, तो लंबे समय में यह उनके लिए भी घाटे का सौदा नहीं होगा।
आज किन कारों में यह फीचर मिल रहा है
AEB अब सिर्फ महंगी कारों तक सीमित नहीं है। इसी महीने आई दो कारों में कंपनियों ने इसे अपने आधिकारिक प्रेस रिलीज़ में साफ लिखा है। नीचे की जानकारी कंपनियों के अपने पेज से है:
| कार | कंपनी के मुताबिक क्या मिलता है | कीमत (ex-showroom, 24 अक्टूबर 2026 तक) |
|---|---|---|
| Toyota Glanza 2026 | Level 2 ADAS, जिसमें Autonomous Emergency Braking, Adaptive Cruise Control और Lane Keeping Assist शामिल हैं | ₹6.99 लाख से (शुरुआती कीमत; ADAS किस वेरिएंट में है, डीलर से पक्का करें) |
| Hyundai Bayon | SmartSense Level 2 Pro ADAS के 23 फंक्शन, जिनमें कार, पैदल यात्री और साइकिल के लिए Forward Collision-Avoidance Assist और Driver Attention Warning हैं | कीमत 26 अक्टूबर 2026 को घोषित होगी |
ग्लैंजा की पूरी वेरिएंट-वार कीमत हमने टोयोटा ग्लैंजा 2026 वाली रिपोर्ट में दी है, और बेयॉन के सेफ्टी फीचर्स की पूरी सूची Hyundai Bayon सेफ्टी फीचर्स वाले लेख में है। महंगे सेगमेंट में भी यही दिशा दिख रही है, जैसा हमने वोल्वो EX90 की लॉन्च रिपोर्ट में बताया था।
कीमत बढ़ेगी? भारतीय सड़कों पर कितना काम आएगा?
हर नया सेफ्टी फीचर लागत बढ़ाता है, क्योंकि AEBS के लिए कैमरा, रडार और उसे चलाने वाला सॉफ्टवेयर चाहिए। सरकार ने ड्राफ्ट में कीमत पर कोई अनुमान नहीं दिया है, और कंपनियों ने भी अभी कुछ नहीं कहा है। फिर भी यह मानकर चलना चाहिए कि सबसे सस्ती एंट्री-लेवल कारों पर इसका असर सबसे ज़्यादा दिखेगा, क्योंकि वहां हर कुछ हज़ार रुपये मायने रखते हैं। अच्छी बात यह है कि कंपनियों के पास तैयारी के लिए चार से छह साल हैं, और बड़े पैमाने पर लगने से सेंसर की लागत समय के साथ कम होती है।
दूसरा सवाल भरोसे का है। भारतीय सड़कों पर अचानक सामने आने वाले दोपहिया, पशु, बिना निशान वाले स्पीड ब्रेकर और धुंधली लेन मार्किंग आम हैं। ऐसे माहौल में अगर सिस्टम बिना वजह ब्रेक लगा दे, तो पीछे से आ रही गाड़ी के लिए खतरा बन सकता है। यही वजह है कि भारतीय मानक AIS-185 की भूमिका बड़ी है: टेस्टिंग जितनी देसी हालात के करीब होगी, सिस्टम उतना काम का होगा। ड्राफ्ट पर सुझाव देने वाले लोग और संस्थाएं यह मुद्दा ज़रूर उठा सकते हैं।
अभी कार लेने वाले क्या ध्यान रखें
- इंतज़ार की ज़रूरत नहीं: 2030 अभी दूर है। अगर आपको अभी कार चाहिए, तो सिर्फ इस नियम के लिए खरीद टालना ठीक नहीं।
- वेरिएंट देखें: कई कारों में AEB सिर्फ ऊपर के वेरिएंट में मिलता है। ब्रोशर में “Emergency Braking” या “Collision-Avoidance” जैसा नाम ढूंढें।
- टेस्ट ड्राइव में पूछें: सिस्टम को बंद-चालू कैसे करते हैं, और चेतावनी कितनी जल्दी आती है, यह डीलर से दिखाने को कहें।
- विंडशील्ड और सेंसर साफ रखें: कैमरा या रडार पर धूल, स्टिकर या टूटा बंपर हो तो सिस्टम ठीक से काम नहीं करता।
- ड्राइवर की जगह नहीं लेता: AEBS मदद है, ऑटोपायलट नहीं। सामने देखकर, सही रफ्तार में चलाना अब भी आपकी ज़िम्मेदारी है।
सुझाव या आपत्ति कैसे भेजें
ड्राफ्ट के मुताबिक, राजपत्र की प्रतियां जनता को उपलब्ध होने की तारीख से 30 दिन तक कोई भी व्यक्ति अपने सुझाव या आपत्ति भेज सकता है। इन्हें अतिरिक्त सचिव (MVL, ट्रांसपोर्ट और रोड सेफ्टी), सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, ट्रांसपोर्ट भवन, संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001 के पते पर, या ईमेल comments-morth@gov.in पर भेजा जा सकता है। ड्राफ्ट का पूरा पाठ हिंदी और अंग्रेज़ी में ई-गजट पर सरकारी PDF में पढ़ा जा सकता है।
आगे की तस्वीर
30 दिन पूरे होने के बाद मंत्रालय सुझावों पर विचार करेगा और फिर अंतिम अधिसूचना जारी कर सकता है। उसमें तारीखें आगे-पीछे भी हो सकती हैं, क्योंकि कार कंपनियां आमतौर पर ऐसे नियमों के लिए ज़्यादा समय मांगती हैं। अगर अंतिम नियम ड्राफ्ट जैसा ही रहा, तो 2030 के बाद लॉन्च होने वाली हर नई कार और 2032 के बाद बनने वाली हर पैसेंजर कार में AEBS दिखेगा। कुछ साल पहले ABS और एयरबैग को भी “प्रीमियम” फीचर माना जाता था, जबकि आज ये लगभग हर नई कार में मिलते हैं। AEBS के साथ भी यही कहानी दोहराई जा सकती है।
हमारी नज़र में यह ड्राफ्ट सही दिशा में है, खासकर टैक्सी के लिए पहले नियम लाने का फैसला। असली कसौटी यह होगी कि AIS-185 के टेस्ट भारतीय ट्रैफिक को कितनी अच्छी तरह ध्यान में रखते हैं, और एंट्री-लेवल कारों की कीमत पर इसका कितना बोझ पड़ता है। अंतिम नियम आते ही हम इस खबर को अपडेट करेंगे।
जानकारी का आधार: भारत का राजपत्र (असाधारण), MoRTH अधिसूचना G.S.R. 904(E), 19 अक्टूबर 2026 (egazette.gov.in); Toyota Kirloskar Motor प्रेस रिलीज़, 14 अक्टूबर 2026; Hyundai Motor India प्रेस रिलीज़। विश्लेषण: TimeTrolls.in।







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