आप जब फोन से कॉल करते हैं, तो पास के मोबाइल टावर का “दिमाग” यानी रेडियो नेटवर्क उसे संभालता है। अब इसी हिस्से में AI वाले कंप्यूटर चिप्स आ गए हैं। Nokia, T-Mobile और NVIDIA ने दावा किया है कि उन्होंने किसी लाइव कमर्शियल नेटवर्क पर दुनिया की पहली AI-RAN कॉल सफलतापूर्वक पूरी की है। यह घोषणा 21 अक्टूबर 2026 को जर्मनी में NVIDIA के GTC Berlin इवेंट में हुई।
सुनने में यह तकनीकी खबर लगती है, लेकिन इसका असर आने वाले सालों में आपके मोबाइल नेटवर्क की स्पीड, क्षमता और 6G तक के सफर पर पड़ सकता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं।
AI-RAN कॉल क्या है और कहां हुई?
RAN का मतलब है Radio Access Network, यानी टावर, एंटीना और वह सिस्टम जो आपके फोन को मोबाइल नेटवर्क से जोड़ता है। अब तक यह काम ज़्यादातर खास तरह के हार्डवेयर पर होता था। AI-RAN में यही काम GPU जैसे तेज़ कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर सॉफ्टवेयर के ज़रिए होता है, और उसी मशीन पर AI से जुड़े काम भी चल सकते हैं।
Nokia के आधिकारिक ब्लॉग के मुताबिक यह कॉल अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के बेलव्यू शहर में T-Mobile की एक कमर्शियल साइट पर, कंपनी के लाइव प्रोडक्शन नेटवर्क पर की गई। इसमें ये चीज़ें इस्तेमाल हुईं:
- Nokia का Massive MIMO रेडियो और Nokia 5G anyRAN सॉफ्टवेयर।
- NVIDIA Aerial RAN Computer (ARC) प्लेटफॉर्म पर बने सर्वर।
- T-Mobile का मौजूदा 5G स्टैंडअलोन कोर नेटवर्क।
- एक आम कमर्शियल स्मार्टफोन, यानी कोई खास टेस्ट डिवाइस नहीं।
Nokia का कहना है कि यह सिर्फ पहली AI-RAN कॉल ही नहीं, बल्कि “एक्सेलरेटेड कंप्यूटिंग” पर चलने वाली दुनिया की पहली सॉफ्टवेयर-डिफाइंड RAN कॉल भी है। Investing.com ने भी NVIDIA की प्रेस रिलीज़ के हवाले से यही ब्योरा दिया है।
यह AI-RAN कॉल इतनी अहम क्यों है?
अब तक AI-RAN ज़्यादातर लैब में टेस्ट होता था। इस कॉल से यह तकनीक पहली बार असली ऑपरेटर नेटवर्क, असली स्पेक्ट्रम और असली ग्राहक वाले फोन पर परखी गई है। Nokia ने लिखा कि उसका लक्ष्य AI-RAN के ज़रिए स्पेक्ट्रम की कार्यक्षमता को 2 गुना तक ले जाने का है, यानी उतने ही स्पेक्ट्रम से ज़्यादा क्षमता। ध्यान रहे, यह कंपनी का लक्ष्य है, अभी हासिल किया गया नतीजा नहीं।
NVIDIA की प्रेस रिलीज़ में CEO जेन्सन हुआंग ने कहा कि टेलीकॉम नेटवर्क दुनिया की बातचीत ढोने के लिए बने थे, अब वे दुनिया की “इंटेलिजेंस” भी ढोएंगे। उनके मुताबिक ऑपरेटर अपनी ज़मीन, बिजली और कनेक्टिविटी को बांटे हुए (distributed) AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बदल रहे हैं।
ये तीनों कंपनियां यहां तक कैसे पहुंचीं?
- सितंबर 2024: T-Mobile ने बेलव्यू में AI-RAN इनोवेशन सेंटर का ऐलान किया।
- 2025: Nokia और NVIDIA ने साझेदारी की, ताकि NVIDIA वाले AI-RAN प्रोडक्ट Nokia के पोर्टफोलियो में जुड़ें।
- 2026 की शुरुआत: Nokia ने NVIDIA प्लेटफॉर्म पर anyRAN सॉफ्टवेयर की लैब टेस्टिंग सफल होने की जानकारी दी।
- 21 अक्टूबर 2026: लाइव कमर्शियल नेटवर्क पर पहली कॉल।
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दूसरे ऑपरेटर और आगे का प्लान
NVIDIA के मुताबिक दुनिया भर में करीब 20 टेलीकॉम ऑपरेटर Nokia anyRAN और NVIDIA ARC के साथ AI-RAN पर काम करने का ऐलान कर चुके हैं। Telecompaper ने भी GTC Berlin में घोषित इन प्रोजेक्ट्स की रिपोर्ट दी है:
- BT: 2027 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में लाइव AI-RAN ट्रायल की तैयारी।
- Deutsche Telekom: बॉन और औलू की लैब में प्लेटफॉर्म की जांच पूरी, 2027 में फील्ड ट्रायल का प्लान।
- Elisa: यूरोप का पहला AI-RAN फील्ड ट्रायल, जिसमें वॉइस, मोबाइल डेटा और वीडियो एनालिटिक्स एक ही प्लेटफॉर्म पर चले।
- Orange: लाइव नेटवर्क के लिए स्पेक्ट्रम कार्यक्षमता और एज सर्विस की टेस्टिंग।
NVIDIA ने बड़ी साइट्स के लिए ARC के दो नए कॉन्फ़िगरेशन MGX 2U और MGX 4U भी पेश किए, जो RTX PRO 6000 Blackwell Server Edition GPU पर चलेंगे। Dell, Quanta Cloud Technology और Supermicro इनके लिए सर्वर देंगे। Nokia के मुताबिक अगले चरण के फील्ड ट्रायल में नए स्पेक्ट्रम बैंड और RAN के साथ-साथ AI इन्फरेंस वाले काम भी परखे जाएंगे।
भारत से क्या कनेक्शन है?
NVIDIA की घोषणा में भारतीय IT कंपनी TCS का भी नाम है। रिलीज़ के मुताबिक TCS टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर NVIDIA के Nemotron ओपन मॉडल को फाइन-ट्यून कर रही है, ताकि ऐसे AI एजेंट बनें जो रेडियो साइट की जांच करें, नेटवर्क की गड़बड़ी पकड़ें और खुद ठीक करें, और कई भाषाओं में वॉइस सेवा दें।
भारतीय मोबाइल ऑपरेटरों के किसी AI-RAN ट्रायल की घोषणा इस इवेंट में नहीं हुई है। भारत में नेटवर्क और कनेक्टिविटी की बदलती तस्वीर पर हमारी रिपोर्ट भारत में सैटेलाइट इंटरनेट और स्टारलिंक का भविष्य भी पढ़ें।
आपके लिए इसका मतलब
- अभी: आपके फोन या प्लान में तुरंत कोई बदलाव नहीं। यह एक टेस्ट कॉल है, कमर्शियल सर्विस नहीं।
- आगे चलकर: अगर AI-RAN बड़े पैमाने पर आया, तो टेलीकॉम कंपनियां उसी स्पेक्ट्रम से ज़्यादा क्षमता निकाल सकेंगी, जिसका फायदा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बेहतर नेटवर्क के रूप में मिल सकता है।
- नई सेवाएं: टावर के पास ही AI चलने से रियल-टाइम अनुवाद, रोबोटिक्स और फैक्ट्री ऑटोमेशन जैसी सेवाएं तेज़ हो सकती हैं।
- करियर: टेलीकॉम, AI और नेटवर्क ऑटोमेशन की स्किल्स की मांग बढ़ने की संभावना है।
एक लाइन में: दुनिया की पहली AI-RAN कॉल ने दिखा दिया कि मोबाइल टावर अब सिर्फ कॉल नहीं, AI भी चलाएंगे; पर आम यूज़र तक फायदा पहुंचने में अभी वक्त है।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि AI से चलने वाले नेटवर्क भारत में कॉल ड्रॉप और धीमे इंटरनेट की समस्या कम कर पाएंगे? कमेंट में ज़रूर बताएं।

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