मौका था दिल्ली के द्वारका में यमुना की सफाई से जुड़ी करोड़ों की परियोजनाओं के लोकार्पण का, लेकिन सुर्खियां बनीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राहुल गांधी को दी गई ‘30 साल’ वाली चुनौती। 22 अक्टूबर को, अपने जन्मदिन पर आयोजित इस कार्यक्रम में शाह ने कहा कि ‘वोट चोरी’ का शोर दरअसल घुसपैठियों के वोट बचाने के लिए है, और कांग्रेस का “अगले 30 साल” तक नंबर नहीं लगने वाला।
कांग्रेस ने भी देर नहीं की। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने X पर लिखा कि ‘वोट चोरी’ एक “साबित हकीकत” है और चुनाव आयोग के अपने आंकड़ों के मुताबिक 10 करोड़ से ज़्यादा भारतीयों के वोटाधिकार पर खतरा है। एक तरफ सत्ता पक्ष का भरोसा, दूसरी तरफ विपक्ष का आरोप, और बीच में मतदाता सूची का वह सवाल जो पिछले कई हफ्तों से दिल्ली की सड़कों पर गूंज रहा है।
‘वोट चोरी करके आप घुसपैठियों का वोट बचाना चाहते हो’
IANS (हिंदी) के मुताबिक शाह ने कहा कि दिल्ली में “एक अलग खेल” चल रहा है, क्योंकि लगातार भाजपा की सरकारें चुनकर आ रही हैं और “विपक्ष के पेट में दर्द है, इसलिए इन्होंने वोट चोरी का बहाना बनाया है।” इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को सीधे संबोधित किया:
राहुल गांधी, आपको और आपके साथियों को पूरा देश समझ रहा है और समझ भी गया है। वोट चोरी करके आप घुसपैठियों का वोट बचाना चाहते हो। कभी ईवीएम का बहाना बनाते हो तो कभी वोट चोरी का बहाना बनाते हो।
अमित शाह, द्वारका, 22 अक्टूबर 2026 (IANS के अनुसार)
शाह ने आंकड़ों की एक लंबी सूची भी गिनाई। उनके मुताबिक कांग्रेस गुजरात और उत्तर प्रदेश में 41 साल से, बंगाल में 54 साल से और तमिलनाडु में 64 साल से चुनाव नहीं जीती, जबकि अरुणाचल, मिज़ोरम, मणिपुर, दिल्ली और असम में भी वह 12 से 18 साल से सत्ता से बाहर है। उनका सवाल था, “क्या यह सब मोदी सरकार के आने से पहले शुरू हुआ है?” यानी उनका तर्क यह था कि कांग्रेस की हार का सिलसिला ‘वोट चोरी’ के आरोपों से कहीं पुराना है।
वीडियो स्रोत: ANI News (YouTube) | मूल वीडियो देखें
‘30 साल’ और ‘हर छह महीने विदेश’
भाषण का सबसे चर्चित हिस्सा वह था जिसमें शाह ने अपनी ही पुरानी भविष्यवाणी का बचाव किया। उन्होंने कहा, “जब मैं कहता हूं कि 30 साल तक भाजपा की सरकार रहेगी तो ये जनता से कहते हैं कि देखो वोट चोरी है, वरना अमित शाह को कैसे मालूम पड़ा।” इसका जवाब उन्होंने व्यक्तिगत अंदाज़ में दिया: “अमित शाह तो यहां जन्मा है, यहां रहता है और यहीं मरेगा। मुझे हर छह महीने में विदेश नहीं जाना पड़ता है।”
आजतक के मुताबिक शाह ने कहा कि उन्हें मालूम है कि राहुल उनकी आवाज़ नहीं सुन सकते क्योंकि वे विदेश में कहीं बैठे हैं, और वे वहां क्यों हैं यह उनकी निजी ज़िंदगी है। फिर उन्होंने जोड़ा, “एक बार आप दिल्ली लैंड कर जाइए… मेरी बात सुनकर रखना, अगले 30 साल तक आपका नंबर नहीं लगने वाला है।” राहुल गांधी के विदेश में होने की बात शाह का दावा है; इस खबर में हम इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सके।
दोहरे मापदंड का आरोप
शाह ने विपक्ष पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया। द हिंदू और IANS के मुताबिक उन्होंने कहा कि केरल में उसी मतदाता सूची, उसी चुनाव आयोग और उन्हीं ईवीएम से चुनाव जीतकर विपक्ष ने शपथ ली, तेलंगाना और हिमाचल में जीते तो चुनाव आयोग अच्छा था, और जहां हारते हैं वहां आयोग ठीक नहीं। उन्होंने यही बात अदालतों के फैसलों पर भी कही और कहा, “यह आपका दोहरा मापदंड नहीं चलेगा।”
आंदोलन की राजनीति पर भी उनका रुख साफ था। आजतक के मुताबिक उन्होंने कहा कि धरना-प्रदर्शन से कुछ नहीं होता, जहां से चुनकर आए हैं वहां के लोगों के लिए काम कीजिए। इसी भाषण में उन्होंने आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल पर भी हमला किया, पंजाब में NDA सरकार बनने का दावा किया और 2029 तक पंजाब से नशे का कारोबार खत्म करने की बात कही।
कांग्रेस का जवाब: ‘वोट चोरी एक साबित हकीकत’
द हिंदू के मुताबिक जयराम रमेश ने X पर पोस्ट में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के लिए अड़चनें खड़ी करने को फॉर्म 6 में अवैध बदलाव किए, फॉर्म 7 के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग से चुनिंदा नाम कटवाने में मदद की, और मुख्य चुनाव आयुक्त ने ECINET के ज़रिए मतदाता सूची पर नियंत्रण केंद्रीकृत कर सभी कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार किया। रमेश ने कहा कि देश “आक्रोशित” है और दमन के बावजूद विरोध जारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘इकोसिस्टम’ पर हताशा और घबराहट में ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया।
ये सभी आरोप हैं, जिन पर चुनाव आयोग का पक्ष इस खबर में शामिल रिपोर्टों में दर्ज नहीं है। शाह के ‘घुसपैठियों के वोट’ वाले आरोप पर राहुल गांधी की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
यमुना वाला मंच और सियासी संदेश
जिस कार्यक्रम में यह सब कहा गया, वह खुद भी एक राजनीतिक संदेश था। IANS के मुताबिक शाह ने यमुना पुनरुद्धार से जुड़ी ₹8,941 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, और आजतक के अनुसार ये दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाएं हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी दर्ज किया कि यह कार्यक्रम शाह के जन्मदिन पर हुआ। शाह ने दावा किया कि यमुना सफाई की कार्ययोजना का 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और पिछली सरकारों पर 30 साल तक गंदा पानी यमुना में छोड़ने का आरोप लगाया।
यानी ‘30 साल’ का आंकड़ा इस भाषण में दो बार आया: एक बार पिछली सरकारों की नाकामी के लिए और एक बार कांग्रेस के भविष्य के लिए। यह संयोग कम और सोची-समझी बयानबाज़ी ज़्यादा लगती है, जिसमें विकास कार्य और विपक्ष पर हमला एक ही फ्रेम में रखे गए।
असल लड़ाई मतदाता सूची की
शाह और कांग्रेस की इस तकरार के पीछे असली मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया है। भाजपा इसे घुसपैठियों और फर्ज़ी नामों को हटाने की ज़रूरी कवायद बताती है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इसके बहाने असली मतदाताओं के नाम कट रहे हैं। ‘घुसपैठिया’ शब्द इस बहस को राष्ट्रीय सुरक्षा की ओर ले जाता है, और ‘वोट चोरी’ उसे लोकतंत्र की साख की ओर। दोनों ही पक्ष जानते हैं कि जिसका शब्द जनता के मन में बैठेगा, अगली लड़ाई में बढ़त उसी की होगी।
फिलहाल न शाह के 30 साल वाले दावे को परखने का कोई पैमाना है, न कांग्रेस के 10 करोड़ वाले आंकड़े की स्वतंत्र जांच सामने आई है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में दिल्ली की सड़कों और संसद, दोनों जगह यह बहस और तेज़ होगी।
तथ्य और बयान IANS, आजतक, द हिंदू और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्टों से लिए गए हैं।

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