ब्रेकिंग
राजनीतिताज़ा

‘लोकतंत्र बचाओ’ बनाम ‘वोट चोर गद्दी छोड़’: छत्तीसगढ़ में SIR पर भाजपा-कांग्रेस की सड़क की लड़ाई

SIR पर छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस अब सड़क पर आमने-सामने हैं। भाजपा ने 22 अक्टूबर से 13 दिन का ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ अभियान शुरू किया, तो कांग्रेस ने इसे राजनीतिक नौटंकी बताते हुए रायपुर में साइकिल-बाइक रैली निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा।

भाजपा के ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ और कांग्रेस के ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारों वाला ग्राफिक, बीच में VS
ग्राफिक: TimeTrolls

मुख्य बातें

  • भाजपा का अभियान: ‘फेक नैरेटिव’ का जवाब देने का दावा
  • कांग्रेस का पलटवार: ‘राजनीतिक नौटंकी’ और ‘चोर मचाए शोर’
  • रायपुर की सड़कों पर ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’
  • आंकड़ों में SIR: किसका दावा कहां खड़ा है

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर देशभर में चल रही बहस अब छत्तीसगढ़ की सड़कों पर उतर आई है। एक तरफ भाजपा ने 22 अक्टूबर से ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ नाम का 13 दिन का अभियान शुरू किया है, दूसरी तरफ कांग्रेस ने उसी दिन रायपुर में साइकिल और बाइक रैली निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दोनों दल लोकतंत्र बचाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे को उसी लोकतंत्र के लिए खतरा बता रहे हैं।

भाजपा का अभियान: ‘फेक नैरेटिव’ का जवाब देने का दावा

दैनिक छत्तीसगढ़ वॉच के मुताबिक भाजपा प्रदेश महामंत्री नवीन मार्कण्डेय ने बताया कि अभियान के तहत पार्टी कार्यकर्ता सभी जिलों में छात्रों, युवाओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के बीच जाएंगे। पार्टी जेन-ज़ी और जेन-अल्फा तक पहुंचने की भी तैयारी में है। मार्कण्डेय के अनुसार मकसद इंडिया गठबंधन की ओर से फैलाए जा रहे ‘फेक नैरेटिव’ का जवाब देना है।

भाजपा का तर्क है कि वोट चोरी का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन करने वाली पार्टियां जनता के वोट से चुनी गई सरकार को पलटने की कोशिश कर रही हैं। NDTV MP-CG की रिपोर्ट के अनुसार यह 13 दिवसीय अभियान SIR पर विपक्ष को जवाब देने की भाजपा की काउंटर-रणनीति है। अभियान के नाम में ‘भीड़तंत्र’ शब्द का चुनाव ही बताता है कि भाजपा विपक्ष के सड़क आंदोलनों को लोकतांत्रिक विरोध के बजाय अराजकता की तरह पेश करना चाहती है।

कांग्रेस का पलटवार: ‘राजनीतिक नौटंकी’ और ‘चोर मचाए शोर’

कांग्रेस ने इस अभियान को सिरे से खारिज किया है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने द नारद न्यूज़ 24 और UNA में छपे बयान में कहा कि भाजपा का लोकतंत्र बचाओ अभियान वोट चोरी पर “जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश” है। उन्होंने इसे लोकतंत्र बचाने की “राजनीतिक नौटंकी” बताया और भाजपा के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप भी लगाया।

प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला इससे पहले भाजपा के अभियान को ‘चोर मचाए शोर’ अभियान कह चुके हैं। CG News और दैनिक भास्कर के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में छह लाख मतदाताओं को मृत और 19 लाख से अधिक को स्थानांतरित बताकर सूची से बाहर किया गया है। उनका आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बचाव में उतरकर भाजपा नाम काटने के कथित षड्यंत्र को संरक्षण दे रही है।

रायपुर की सड़कों पर ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’

लल्लूराम की रिपोर्ट के अनुसार 22 अक्टूबर को रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में निकली रैली आजाद चौक स्थित गांधी प्रतिमा से शुरू होकर शहर के कई हिस्सों से होते हुए अंबेडकर अस्पताल तक पहुंची। जिला अध्यक्ष श्रीकुमार शंकर मेनन के नेतृत्व में पूर्व विधायक विकास उपाध्याय समेत कई नेता और कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए। कार्यकर्ताओं ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए। रैली AICC और प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर आयोजित की गई थी, यानी यह राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विरोध का स्थानीय हिस्सा है।

आंकड़ों में SIR: किसका दावा कहां खड़ा है

इस बहस में आंकड़े सबसे बड़ा हथियार हैं, इसलिए उन्हें ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की 21 फरवरी 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक:

  • SIR शुरू होने से पहले सूची में 2,12,30,737 मतदाता थे।
  • ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के बाद यह संख्या 1,84,95,920 रह गई।
  • दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में 1,87,30,914 मतदाता दर्ज हुए, यानी ड्राफ्ट के मुकाबले 2,34,994 की शुद्ध बढ़ोतरी।
  • प्रक्रिया में 27,196 BLO और 38,846 बूथ लेवल एजेंट शामिल रहे।

यानी शुरुआती सूची और अंतिम सूची के बीच ठीक 24,99,823 नामों का अंतर है, और यही वह आंकड़ा है जिसे कांग्रेस ‘24.99 लाख नाम बाहर’ के रूप में उठा रही है। पत्रिका के मुताबिक कांग्रेस 19.13 लाख मतदाताओं को ‘शिफ्टेड/अनुपस्थित’ और 6 लाख से अधिक को ‘मृत’ श्रेणी में रखे जाने पर आपत्ति कर रही है। असहमति संख्या पर कम और तरीके पर ज़्यादा है: आयोग कहता है कि BLO ने घर-घर जाकर सत्यापन किया और न लौटे फॉर्म की सूची वेबसाइट पर डाली गई, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि बिना ठीक सत्यापन के नाम काटे गए।

सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा पहले ही इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता चुके हैं। द रूरल प्रेस के अनुसार इस पर शुक्ला ने उन्हें चुनाव आयोग का ‘स्वयंभू प्रवक्ता’ न बनने की सलाह दी थी।

सड़क की राजनीति का असली दांव

SIR का मुद्दा छत्तीसगढ़ में इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि यहां बड़ी आबादी आदिवासी और ग्रामीण है, और रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले मज़दूरों की संख्या भी कम नहीं। कांग्रेस इन्हीं वर्गों के नाम कटने का डर दिखाकर ज़मीन पर समर्थन जुटाना चाहती है। भाजपा की रणनीति इसके उलट है: वह विरोध को ‘भीड़तंत्र’ बताकर पढ़े-लिखे युवाओं और मध्यवर्ग के बीच कानून-व्यवस्था और जनादेश के सम्मान का संदेश ले जाना चाहती है।

अगले 13 दिनों में यह साफ होगा कि किसकी बात ज़्यादा लोगों तक पहुंचती है। लेकिन जिस मतदाता का नाम सूची से हटा है, उसके लिए सबसे काम की बात नारों से ज़्यादा प्रक्रिया है: CEO छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर अपना नाम जांचना और ज़रूरत हो तो फॉर्म भरकर दावा करना। राजनीतिक दलों के लिए भी असली परीक्षा यही होगी कि वे अपने कार्यकर्ताओं को नारेबाज़ी के साथ-साथ ऐसे मतदाताओं की मदद में कितना लगाते हैं।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: लल्लूराम, NDTV MP-CG, NDTV MP-CG (अभियान), दैनिक छत्तीसगढ़ वॉच, द नारद न्यूज़ 24, UNA, CG News, दैनिक भास्कर, पत्रिका, द रूरल प्रेस, CEO छत्तीसगढ़।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

अगली खबर › सिरहासर भवन से जोगी परिवार की वापसी पर सवाल: बस्तर दशहरा की परंपरा और राष्ट्रपति दौरे की तैयारी आमने-सामने

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

और विषय पढ़ें

टिप्पणियाँ

अपनी राय दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

WhatsApp पर शेयर करें
Exit mobile version