एक अमेरिकी न्यूज़ पोर्टल की रिपोर्ट ने भारत की घरेलू राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है। Fox News Digital की एक जांच में दावा किया गया कि फ्रांस में हुई अशांति और भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों के बीच संबंध हैं। भाजपा ने इसी रिपोर्ट के आधार पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला, जबकि कांग्रेस ने इसे ध्यान भटकाने की कोशिश करार दिया।
शुरुआत में ही एक बात साफ कर देना ज़रूरी है: इस रिपोर्ट के दावों की किसी भारतीय सरकारी एजेंसी या स्वतंत्र स्रोत ने पुष्टि नहीं की है। TimeTrolls भी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका है। यह खबर इस बारे में है कि रिपोर्ट में क्या कहा गया और उस पर किसने क्या प्रतिक्रिया दी।
रिपोर्ट में दावा क्या है
इंडिया टुडे के मुताबिक Fox News Digital की जांच में नौ देशों में 101 संगठनों की पहचान की गई, जिन्हें रिपोर्ट प्रदर्शनों को बढ़ावा देने वाले एक नेटवर्क का हिस्सा बताती है। रिपोर्ट ने इसे “red-green protest ecosystem” कहा, जिसमें ‘रेड’ का मतलब कम्युनिस्ट और ‘ग्रीन’ का मतलब इस्लामिस्ट समूह बताया गया। रिपोर्ट में फ्रांस की अशांति को भारत समेत कई देशों में युवाओं के नेतृत्व वाले प्रदर्शनों से जोड़ा गया।
ध्यान देने वाली बात यह है कि रिपोर्ट ‘आरोप’ और ‘संबंध’ की भाषा में बात करती है। किसी संगठन का किसी प्रदर्शन का वीडियो शेयर करना या समर्थन जताना, और उस प्रदर्शन को विदेश से संचालित करना, दो बिल्कुल अलग बातें हैं। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह साफ नहीं होता कि Fox की जांच इन दोनों के बीच की रेखा को किस सबूत से पार करती है।
भाजपा का हमला: ‘गद्दार’ और ‘मीर जाफर’
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने इस रिपोर्ट का हवाला देकर राहुल गांधी को “गद्दार” कहा और उनकी तुलना “मीर जाफर” से की। इंडिया टुडे के अनुसार भाटिया ने कहा कि यह भारत का दुर्भाग्य है कि उसका नेता प्रतिपक्ष “irresponsible and immature” (गैर-ज़िम्मेदार और अपरिपक्व) है। उन्होंने पूछा, “Who is the leader of these traitors?” (इन गद्दारों का नेता कौन है?)
भाटिया ने आरोप लगाया कि भारत के प्रदर्शन दूसरे देशों में अराजकता के ज़रिए सत्ता परिवर्तन की कोशिशों से जुड़े हैं। उन्होंने रिपोर्ट में ज़िक्र किए गए फ्रांस स्थित संगठन Indian Alliance Paris का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि यह 6 अक्टूबर 2026 तक राहुल गांधी का ‘right hand’ बनकर भारत के आंतरिक मामलों में दखल दे रहा था। उनके मुताबिक जब भी राहुल गांधी किसी प्रदर्शन में हिरासत में लिए जाते हैं, यह संगठन सबसे पहले वीडियो फैलाता है। भाटिया ने ऐसी हिरासतों को संवैधानिक और वैध बताया।
कांग्रेस का जवाब: ‘ध्यान भटकाने’ की कोशिश
कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “vote chori” यानी वोट चोरी एक स्थापित सच्चाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के ‘इकोसिस्टम’ पर “desperation and nervousness” यानी हताशा और घबराहट में झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
X पर एक पोस्ट में रमेश ने दावा किया कि चुनाव आयोग के ही आंकड़ों से पता चलता है कि 10 करोड़ से ज़्यादा भारतीयों का वोट देने का संवैधानिक अधिकार खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने नए मतदाताओं के लिए अड़चन पैदा करने के लिए फॉर्म 6 को गैरकानूनी तरीके से बदला और फॉर्म 7 के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग से मतदाताओं के नाम हटवाने का रास्ता खोला। उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार पर ECINET के ज़रिए कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार कर मतदाता सूची पर केंद्रीकृत नियंत्रण का आरोप भी लगाया।
The nation is outraged. There is widespread anger. Protests continue despite repression. (देश आक्रोशित है। हर तरफ गुस्सा है। दमन के बावजूद प्रदर्शन जारी हैं।)
जयराम रमेश, कांग्रेस, इंडिया टुडे के हवाले से
रमेश ने कहा कि झूठ फैलाकर ‘divert and distract’ करने की कोशिश नाकाम होगी और मोदी-शाह की जोड़ी को जनता जवाबदेह ठहराएगी।
विदेशी हाथ का आरोप: भारतीय राजनीति का पुराना हथियार
किसी आंदोलन के पीछे ‘विदेशी हाथ’ का आरोप भारतीय राजनीति में नया नहीं है। अलग-अलग दौर में सत्ता में रही पार्टियों ने किसान आंदोलन से लेकर पर्यावरण आंदोलनों तक, विरोध के पीछे बाहरी ताकतों का हवाला दिया है। ऐसे आरोप सरकार को आंदोलन की मांगों के बजाय उसकी वैधता पर बहस ले जाने का मौका देते हैं। दूसरी तरफ विपक्ष हर बार इसे असल मुद्दे से ध्यान हटाने की रणनीति बताता है।
इस बार फर्क यह है कि आरोप का आधार एक विदेशी मीडिया संस्थान की रिपोर्ट है, किसी भारतीय जांच एजेंसी की नहीं। अगर सरकार के पास ऐसे नेटवर्क के ठोस सबूत हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों और अदालतों के ज़रिए सामने लाना ज़्यादा भरोसेमंद रास्ता होगा। वहीं, अगर रिपोर्ट के दावे कमज़ोर निकलते हैं, तो ‘गद्दार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल राजनीतिक बहस को और कड़वा ही बनाएगा।
आम मतदाता के लिए असल सवाल
इस शोर में मूल मुद्दा पीछे छूटने का खतरा है। प्रदर्शनकारी SIR के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि अल जज़ीरा के मुताबिक चुनाव आयोग कहता रहा है कि वह डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटा रहा है और गलती से हटे लोग अपील कर सकते हैं। फॉर्म 6, फॉर्म 7 और ECINET से जुड़े आरोपों पर आयोग का विस्तृत जवाब ही इस बहस को तथ्यों पर लौटा सकता है।
Fox News की रिपोर्ट पर अब तक चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, और Indian Alliance Paris की प्रतिक्रिया भी उपलब्ध रिपोर्टिंग में नहीं है, यानी उनके जवाब का इंतज़ार है। तब तक यह याद रखना ज़रूरी है कि रिपोर्ट के दावे अपुष्ट हैं और दोनों दलों के बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा हैं।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: इंडिया टुडे, अल जज़ीरा।







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