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अरुणाचल में चीन से फेस-ऑफ ‘जारी’: ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर क्यों सवाल उठाए

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगह चीनी सैनिकों के साथ फेस-ऑफ हुआ और यह जारी है। कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री की ‘चुप्पी’ से जोड़ा, जबकि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कोई नया चीनी कब्ज़ा नहीं हुआ है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की तस्वीरें, बीच में VS और ‘अरुणाचल: फेस-ऑफ जारी’ शीर्षक
फोटो: Wikimedia Commons (जयराम रमेश: Yann, CC BY-SA 4.0; किरेन रिजिजू: Ministry of Parliamentary Affairs, GODL-India)

मुख्य बातें

  • ITBP प्रमुख ने क्या कहा
  • कांग्रेस का सवाल: ‘deafening silence’ क्यों
  • सरकार का पक्ष: ‘कोई नया कब्ज़ा नहीं’
  • तीन बयानों को साथ रखकर पढ़ें

भारत-चीन सीमा पर तनाव की खबरें अक्सर अपुष्ट सूत्रों, स्थानीय दावों और सरकारी खंडनों के बीच झूलती रहती हैं। लेकिन इस बार बात एक शीर्ष अधिकारी के मुंह से आई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ फेस-ऑफ हुआ है और यह स्थिति जारी है। इंडिया टुडे के मुताबिक यह पूर्वोत्तर सीमा पर चल रहे फेस-ऑफ की पहली आधिकारिक पुष्टि है।

ITBP प्रमुख ने क्या कहा

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार ITBP कर्मियों के वार्षिक सम्मान समारोह में कपूर ने कहा, “In the past few days, a situation arose where a face-off happened at several locations in Arunachal, and it continues.” यानी, “पिछले कुछ दिनों में ऐसी स्थिति बनी जिसमें अरुणाचल में कई जगहों पर फेस-ऑफ हुआ, और यह जारी है।”

रिपोर्ट के मुताबिक ये फेस-ऑफ जुलाई से चल रहे हैं, जब ऐसी खबरें आई थीं कि चीनी सैनिक तकसिंग इलाके में LAC पर भारतीय बलों को अहम पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंचने से रोक रहे हैं। कपूर ने ITBP के नए शौर्य कमांडो की तारीफ की और कहा, “Our newly raised Shaurya commandos played an exemplary role in this.” ये कमांडो ऊंचाई वाले इलाकों में युद्ध के लिए प्रशिक्षित हैं।

कपूर ने माना कि चीन “most difficult” यानी सबसे कठिन मोर्चा है। उन्होंने बताया कि ITBP ने अपनी सभी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून बनाई हैं, गलवान जैसी स्थितियों से निपटने के लिए विशेष युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया है और भूमिगत ढांचा भी बनाया जा रहा है।

वीडियो स्रोत: CNN-News18 (YouTube) | मूल वीडियो देखें

कांग्रेस का सवाल: ‘deafening silence’ क्यों

ITBP प्रमुख के बयान ने कांग्रेस को सरकार पर हमले का नया आधार दे दिया। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने X पर लिखा कि एक तरफ ‘स्वयंभू विश्वगुरु’ की चीन को “calibrated concessions” जारी हैं, दूसरी तरफ DG ITBP ने अरुणाचल में PLA के साथ हाल के फेस-ऑफ में बल के प्रदर्शन की सराहना की है, जिस पर प्रधानमंत्री और उनके तंत्र की ओर से “deafening silence” यानी गहरी चुप्पी है। रमेश ने यह भी माना कि बल की सराहना “rightly so” यानी उचित है।

Locals had reported that patrolling points had been lost once again, as in Ladakh. China continues to rename our towns in Arunachal Pradesh and is building a 60,000-MW dam that threatens our ecological and water security.

जयराम रमेश, X पोस्ट (इंडिया टुडे के हवाले से)

हिंदी में इसका आशय है: स्थानीय लोगों ने बताया था कि लद्दाख की तरह एक बार फिर पेट्रोलिंग पॉइंट्स हाथ से निकल गए हैं; चीन अरुणाचल के हमारे कस्बों के नाम बदलता जा रहा है और 60,000 मेगावाट का बांध बना रहा है जो हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए खतरा है। रमेश ने सितंबर में हुई कोर कमांडर स्तर की बातचीत के नतीजे पर भी सवाल उठाया, जो अरुणाचल सेक्टर में इस स्तर की पहली फ्लैग मीटिंग थी।

सरकार का पक्ष: ‘कोई नया कब्ज़ा नहीं’

सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, जो खुद अरुणाचल प्रदेश से आते हैं, ने इंडिया टुडे से कहा कि अरुणाचल में चीन का कोई नया कब्ज़ा नहीं हुआ है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि सीमा के पास कुछ चरागाह इलाकों तक पहुंच को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है।

इससे पहले जुलाई में पीपल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (PPA) की एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने कहा था कि PLA सैनिक तकसिंग में भारत की पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच रोक रहे हैं, और अपर सुबनसिरी ज़िले में चीनी गतिविधियां बढ़ने की बात भी कही थी। PPA के अरुणाचल विधानसभा में दो विधायक हैं। सरकार ने तब इन दावों को खारिज किया था और दोहराया था कि अरुणाचल भारत का ‘अभिन्न और अविभाज्य’ हिस्सा है।

तीन बयानों को साथ रखकर पढ़ें

इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग बातें कही जा रही हैं, और तीनों एक साथ सच हो सकती हैं। ITBP प्रमुख फेस-ऑफ की पुष्टि कर रहे हैं, यानी आमने-सामने की स्थिति बनी और जारी है। रिजिजू कह रहे हैं कि कोई नया कब्ज़ा नहीं हुआ, यानी ज़मीन पर स्थायी बदलाव का दावा वे नहीं मानते। कांग्रेस और स्थानीय दावे पेट्रोलिंग पॉइंट्स तक पहुंच खोने की बात कर रहे हैं, जो कब्ज़े से अलग लेकिन रणनीतिक रूप से अहम मुद्दा है। लद्दाख के अनुभव से भारत जानता है कि ‘बफर ज़ोन’ और पेट्रोलिंग अधिकारों का सवाल भी उतना ही संवेदनशील हो सकता है।

समय भी अहम है। इंडिया टुडे के अनुसार कपूर के बयान से संकेत मिलता है कि सैन्य तनाव सितंबर में नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भी बना रहा, जिसमें चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल हुए थे। एक तरफ भारत-चीन रिश्तों में सुधार के संकेत, दूसरी तरफ सीमा पर घर्षण, यही विरोधाभास इस बहस को राजनीतिक बना रहा है।

आगे क्या देखना होगा

1962 में गठित ITBP चीन से लगी 3,488 किलोमीटर लंबी LAC की निगरानी करती है। कपूर ने याद दिलाया कि ITBP पहाड़ी गुरिल्ला बल के रूप में बनी थी और 2004 में उसे चीन सीमा की ज़िम्मेदारी दी गई। अब सवाल यह है कि क्या विदेश मंत्रालय या रक्षा मंत्रालय इन फेस-ऑफ पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान देता है, और क्या अगली दौर की सैन्य वार्ता में पेट्रोलिंग पॉइंट्स का मुद्दा सुलझता है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कांग्रेस के सवालों पर सीधा जवाब अभी नहीं आया है, यानी उस जवाब का इंतज़ार है।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: इंडिया टुडे, CNN-News18 (YouTube)।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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