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कवर्धा में 5 बैगा बच्चों की मौत: कुमान पहुंचा कांग्रेस जांच दल, राष्ट्रपति तक जाने की बात

कबीरधाम ज़िले के बोड़ला ब्लॉक के कुमान गांव में करीब पांच महीने में पांच बैगा बच्चों की मौत के मामले में 23 अक्टूबर को कांग्रेस का जांच दल गांव पहुंचा। कांग्रेस ने कुपोषण और योजनाओं की नाकामी का आरोप लगाया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मौत की वजह की जांच होगी।

कुमान गांव में 5 बैगा बच्चों की मौत वाला ग्राफिक और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तस्वीर, बीच में VS
फोटो: विष्णु देव साय, प्रधानमंत्री कार्यालय / Wikimedia Commons (GODL-India); बायां हिस्सा TimeTrolls ग्राफिक

मुख्य बातें

  • 23 अक्टूबर: कांग्रेस का दल गांव में
  • स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन क्या कह रहे हैं
  • बैगा समाज का ज्ञापन और अफसरों पर सवाल
  • सवाल जो पांच मौतों के बाद भी खुले हैं

मैकल की पहाड़ियों और रेंगाखार के जंगलों के बीच बसे कुमान गांव तक पहुंचना आसान नहीं है। यह गांव कबीरधाम (कवर्धा) ज़िले के बोड़ला ब्लॉक की बरबसपुर पंचायत में आता है और यहां ज़्यादातर बैगा परिवार रहते हैं। बैगा उन जनजातियों में हैं जिन्हें सरकार ‘विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह’ (PVTG) मानती है। इसी गांव में जून से 1 अक्टूबर के बीच, यानी करीब पांच महीने में, पांच बच्चों की मौत हुई है। अब यह मामला स्वास्थ्य से आगे बढ़कर छत्तीसगढ़ की राजनीति का मुद्दा बन गया है।

23 अक्टूबर: कांग्रेस का दल गांव में

ETV भारत और लल्लूराम के मुताबिक गुरुवार, 23 अक्टूबर को कांग्रेस का जांच दल कुमान पहुंचा। दल के संयोजक मोहला-मानपुर विधायक इंद्रशाह मंडावी थे। उनके साथ भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मंडावी, बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता स्वामी बघेल, पूर्व विधायक ममता चंद्राकर और ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष नवीन जायसवाल भी थे। दल ने पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों से बात की।

कांग्रेस ने 17 अक्टूबर को यह जांच समिति बनाई थी। उस समय सात सदस्यों के नाम घोषित हुए थे, जबकि गांव पहुंचे दल में छह नेता दिखे।

बच्चों की मौत के मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे. मामले की गंभीरता से जांच और पड़ताल की जरूरत है

इंद्रशाह मंडावी, विधायक व जांच दल संयोजक (ETV भारत के अनुसार)

कांग्रेस का आरोप है कि बच्चों की मौत के पीछे कुपोषण है और सरकारी योजनाएं इन परिवारों तक ठीक से नहीं पहुंच रहीं। पार्टी ने कहा है कि वह यह मुद्दा विधानसभा में भी उठाएगी। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि कुपोषण को मौत की वजह बताना अभी कांग्रेस का आरोप है। आधिकारिक जांच में कारण तय नहीं हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन क्या कह रहे हैं

दैनिक भास्कर के मुताबिक CMHO डॉ. डी.के. तुर्रे ने कहा कि मौत की वजह अभी साफ नहीं है। उन्होंने बताया कि जांच टीम बनाई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी। गांव के 16 बच्चों को बोड़ला के पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में भर्ती कराया गया।

UNA और ETV भारत की रिपोर्ट के अनुसार कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने 18 अक्टूबर को गांव का दौरा किया। उन्होंने घर-घर दोबारा स्वास्थ्य और पोषण सर्वे, कमज़ोर बच्चों को NRC में भर्ती कराने, टीकाकरण, आधार और जन्म प्रमाण पत्र के लिए कैंप लगाने और नल कनेक्शन देने के निर्देश दिए।

वीडियो स्रोत: ETV Bharat Chhattisgarh (YouTube) | मूल वीडियो देखें

बैगा समाज का ज्ञापन और अफसरों पर सवाल

दैनिक भास्कर के मुताबिक बैगा समाज के कार्यवाहक ज़िला अध्यक्ष कामू बैगा ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। उसमें आरोप है कि इलाके के RMA वीरेंद्र पालके ने क्षेत्र का दौरा नहीं किया और जानकारी छिपाई गई। समाज ने लापरवाह कर्मचारियों को हटाने, कुपोषण के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है। मांगें न मानी गईं तो आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। इन आरोपों पर संबंधित कर्मचारी या स्वास्थ्य विभाग का जवाब हमें नहीं मिला।

सवाल जो पांच मौतों के बाद भी खुले हैं

इस मामले में कुछ बातें तथ्य हैं और कुछ अभी जांच के दायरे में। तथ्य यह है कि एक छोटे गांव में कुछ ही महीनों में पांच बच्चों की जान गई, और बाद में 16 बच्चों को पोषण केंद्र भेजना पड़ा। यह संख्या अपने आप बताती है कि गांव में बच्चों की सेहत पर नज़र रखने वाला तंत्र समय रहते खतरे को नहीं पकड़ पाया।

आंगनबाड़ी, मितानिन, ग्रामीण स्वास्थ्य कर्मचारी और PVTG के लिए चलने वाली योजनाएं, कागज़ पर इन सबकी ज़िम्मेदारी तय है। सवाल यह है कि पहली मौत के बाद ही सर्वे और NRC भर्ती क्यों नहीं हुई, और कलेक्टर का दौरा पांचवीं मौत के करीब ढाई हफ्ते बाद क्यों हुआ। इनका जवाब जांच रिपोर्ट से ही मिलेगा।

राजनीतिक संदर्भ भी अहम है। कबीरधाम उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा का गृह ज़िला है, इसलिए कांग्रेस के लिए यह मुद्दा साय सरकार को घेरने का बड़ा मौका है। दूसरी ओर, बैगा इलाकों में कुपोषण और पहुंच की समस्या नई नहीं है और पिछली सरकारों के समय भी ऐसे सवाल उठते रहे हैं। इसलिए इस त्रासदी को केवल एक दल की नाकामी बताना उतना ही अधूरा होगा जितना इसे सामान्य बीमारी कहकर टाल देना।

सरकार की ओर से अब तक

प्रशासनिक स्तर पर सर्वे, कैंप और NRC भर्ती जैसे कदम उठाए गए हैं। लेकिन कांग्रेस के जांच दल के आरोपों पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री या भाजपा की ओर से कोई सीधी प्रतिक्रिया हमें उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली। सरकार के जवाब का इंतज़ार है। जवाब आने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

आगे क्या

अब नज़र तीन चीज़ों पर रहेगी। पहली, CMHO की बताई जांच टीम की रिपोर्ट कब आती है और उसमें मौत की वजह क्या बताई जाती है। दूसरी, कांग्रेस का दल अपनी रिपोर्ट में क्या कहता है और क्या वह सच में राष्ट्रपति व राज्यपाल तक पहुंचता है। तीसरी, बैगा समाज की मांग के मुताबिक क्या कुपोषण के आंकड़े सार्वजनिक होते हैं। बच्चों की जान से जुड़े इस मामले में सियासत से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि बाकी बच्चे सुरक्षित रहें और ज़िम्मेदारी साफ तय हो।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: ETV भारत (कांग्रेस दल), लल्लूराम, इंडियन न्यूज़ ट्रस्ट, दैनिक भास्कर (बैगा समाज का ज्ञापन), दैनिक भास्कर (CMHO), UNA, ETV भारत (कलेक्टर दौरा), ETV भारत (जांच समिति), ETV Bharat Chhattisgarh (YouTube)।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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