अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों से फेस-ऑफ की बात पहले एक अफसर के भाषण तक सीमित थी। गुरुवार, 23 अक्टूबर की शाम तक इसमें तीन नई परतें जुड़ गईं। विदेश मंत्रालय ने पहली बार इस पर टिप्पणी की। ITBP प्रमुख के भाषण का वीडियो बल के यूट्यूब चैनल से हटा दिया गया। और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे तीन सवाल पूछ लिए। हमने ITBP प्रमुख के बयान और कांग्रेस के शुरुआती सवालों पर पिछली रिपोर्ट में लिखा था कि सरकार के जवाब का इंतज़ार है। अब उस जवाब का पहला हिस्सा सामने है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि जब चीनी सेना तय पेट्रोलिंग पैटर्न से हटती है, तो भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में हालात समय-समय पर बिगड़ते हैं। उनके अंग्रेज़ी में कहे गए शब्द थे:
As we have noted in the past, the situation in the India-China border areas gets disturbed from time to time when Chinese forces diverge from established patrolling patterns.
रणधीर जायसवाल, प्रवक्ता, विदेश मंत्रालय (द हिंदू के अनुसार)
जायसवाल ने यह भी कहा कि दोनों पक्ष लंबित मुद्दों को सुलझाने और LAC पर गलतफहमी व गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक और सैन्य तंत्र का इस्तेमाल करते रहेंगे। उन्होंने सीमा पर शांति बनाए रखने को ज़रूरी बताया और ‘बेहतर सीमा प्रबंधन’ की बात की। किसी खास घटना से जुड़े सवालों के लिए उन्होंने रक्षा मंत्रालय की ओर इशारा किया।
द हिंदू ने इसे अरुणाचल में हाल की घटनाओं पर सरकार की ओर से पहली आधिकारिक स्वीकारोक्ति बताया है। गौर करने वाली बात यह है कि बयान में न ‘फेस-ऑफ’ शब्द है, न किसी जगह का नाम। सरकार ने स्थिति को चीनी सैनिकों के ‘पैटर्न से हटने’ से जोड़ा है, यानी ज़िम्मेदारी चीन पर डाली है। लेकिन उसने यह नहीं बताया कि भारतीय गश्त पर इसका कितना असर पड़ा है।
भाषण का वीडियो हटा
उसी रिपोर्ट में द हिंदू ने बताया कि ITBP महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के 22 अक्टूबर के अलवर वाले भाषण का वीडियो, अखबार की खबर छपने के बाद, ITBP के यूट्यूब चैनल से हटा दिया गया। वीडियो हटाने की वजह पर ITBP की कोई सफाई हमें उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कपूर ने अलवर में कहा था, “Recently, a situation arose in Arunachal Pradesh where face-offs took place and are still ongoing.” यानी हाल में अरुणाचल में ऐसी स्थिति बनी जहां फेस-ऑफ हुए और वे अब भी जारी हैं। उन्होंने चीन का नाम नहीं लिया, पर शौर्य कमांडो टीमों की भूमिका की तारीफ की। रिपोर्ट के अनुसार 6 सितंबर को वाचा-दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी, और तकसिंग इलाके में भारतीय सैनिक बड़ी संख्या में तैनात हैं।
वीडियो स्रोत: Indian Express Hindi (YouTube) | मूल वीडियो देखें
खड़गे के तीन सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने X पर ITBP प्रमुख की पुष्टि को “deeply alarming” यानी बेहद चिंताजनक बताया। हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक उनकी पोस्ट की शुरुआत इस लाइन से हुई:
Enough clean chits to China. PM Modi must come clean before India!
मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष, X पोस्ट (हिंदी आशय: चीन को क्लीन चिट बहुत हुई, प्रधानमंत्री देश के सामने सच रखें)
खड़गे ने अपने सवाल तीन हिस्सों में रखे।
- सुरक्षा: उन्होंने पूछा कि डोकलाम और गलवान के बाद क्या एक और गंभीर टकराव चल रहा है। उनके मुताबिक तकसिंग के पास घुसपैठ की खबरें अगस्त में आई थीं और वाचा-दमाई की बातचीत के 47 दिन बाद भी टकराव जारी है। उनका सवाल था, “Has India’s patrolling access been compromised?” यानी क्या भारत की गश्त की पहुंच पर असर पड़ा है।
- अर्थव्यवस्था: खड़गे का दावा है कि गलवान के बाद से चीन से आयात 102% बढ़ा और व्यापार घाटा 155% बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया। उन्होंने पूछा कि क्या ‘मेक इन इंडिया’ ‘इंपोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है।
- कूटनीति: उन्होंने मोदी-शी की कम से कम 23 मुलाकातों और बातचीत, विशेष प्रतिनिधि स्तर के 25 दौर और WMCC की 36 बैठकों का ज़िक्र किया। उनका सवाल था कि क्या मई 2020 से पहले वाले गश्त के अधिकार पूरी तरह बहाल हुए। उन्होंने लिखा कि देश को “diplomatic photo opportunities & Hugplomacy” नहीं, जवाबदेही चाहिए।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार जून-जुलाई से अरुणाचल सीमा की खबरें दबाने की कोशिश कर रही थी। टाइम्स नाउ के अनुसार उन्होंने गलवान के समय सरकार की ओर से कही गई बात याद दिलाई, “न कोई हमारी सीमा में घुसा है, न घुसेगा।” द हिंदू के मुताबिक वीडियो हटने पर खेड़ा ने कहा कि सरकार को चीन के घुसने से उतनी परेशानी नहीं जितनी इस बात से है कि यह खबर छप गई। शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने गृह, रक्षा और विदेश मंत्रियों से जवाब मांगा।
भाजपा का पक्ष: ‘सीमा गतिशील है, युद्ध नहीं’
भाजपा ने विपक्ष पर बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया। टाइम्स नाउ से बातचीत में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा कि सीमा एक गतिशील जगह है, जहां दोनों तरफ की इकाइयां आमने-सामने आती रहती हैं।
The border is a dynamic place… That does not mean a war is on or that a conflict like last year’s is underway.
नलिन कोहली, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भाजपा (टाइम्स नाउ के अनुसार; हिंदी आशय: सीमा गतिशील जगह है, इसका मतलब यह नहीं कि युद्ध चल रहा है)
कोहली ने मनमोहन सिंह सरकार के दौर का उदाहरण दिया और कहा कि तब सीमा पर नियमित फायरिंग होती थी, बांग्लादेश सीमा पर मोर्टार भी चलते थे, लेकिन उसका मतलब युद्ध नहीं था। उनके मुताबिक ये स्थानीय स्तर की घटनाएं थीं। खड़गे के आर्थिक आंकड़ों पर सरकार या भाजपा का अलग से कोई जवाब हमें नहीं मिला। इस पर जवाब का इंतज़ार है।
असल सवाल क्या बचा है
दोनों पक्षों की बातों में एक बात साझा है। कोई यह नहीं कह रहा कि कुछ हुआ ही नहीं। सरकार का पक्ष यह है कि ऐसी घटनाएं LAC का हिस्सा हैं और बातचीत के तंत्र काम कर रहे हैं। विपक्ष का पक्ष यह है कि सितंबर की बातचीत के बाद भी टकराव जारी है, और जनता को यह नहीं बताया जा रहा कि ज़मीन पर गश्त कहां तक हो रही है।
वीडियो हटने से बहस और तीखी हुई है। किसी सुरक्षा बल का अपने ही प्रमुख का भाषण हटाना सामान्य प्रक्रिया भी हो सकती है और संवेदनशील जानकारी को लेकर सावधानी भी। लेकिन वजह न बताए जाने से छिपाने वाली धारणा को बल मिलता है। यही वह जगह है जहां रक्षा मंत्रालय का औपचारिक बयान सबसे ज़्यादा मायने रखेगा, क्योंकि विदेश मंत्रालय ने खास सवाल उसी की ओर भेजे हैं।
आने वाले दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक होंगी: रक्षा मंत्रालय क्या कहता है, विपक्ष संसद के अगले सत्र में यह मुद्दा कैसे उठाता है, और भारत-चीन के बीच अगली सैन्य या कूटनीतिक बैठक कब होती है। तब तक तथ्य इतने ही हैं: सीमा पर स्थिति ‘बिगड़ी’ है, सरकार इसे चीन के पैटर्न बदलने से जोड़ती है, और विपक्ष पूरी तस्वीर मांग रहा है।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: द हिंदू, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स नाउ, Indian Express Hindi (YouTube)।

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