फीचर्ड इमेज: बेंगलुरु में DEPA for AI Training हैंडबुक जारी होने के मौके पर गोलमेज बैठक के प्रतिभागी। फोटो: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (@GoI_MeitY, आधिकारिक X)।
भारत में AI मॉडल ट्रेन करने वालों के सामने सबसे बड़ी अड़चन अच्छे और भरोसेमंद डेटा की है, और इसी को हल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने “Handbook on Data Empowerment and Protection Architecture (DEPA) for AI Training” जारी की है। यह हैंडबुक बेंगलुरु में हुई एक उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में MeitY सचिव एस. कृष्णन ने जारी की। मंत्रालय ने 30 अक्टूबर की शाम अपने आधिकारिक X हैंडल पर इसकी तस्वीरें साझा कीं और 31 अक्टूबर को इसकी आधिकारिक विज्ञप्ति जारी हुई। हैंडबुक तैयार करने में iSPIRT फाउंडेशन ने सहयोग किया है।
सीधे शब्दों में, यह एक ऐसा “तकनीकी-कानूनी” ढांचा है जिसमें अस्पताल, बैंक, रिसर्च संस्थान या कंपनियां अपना संवेदनशील डेटा किसी को सौंपे बिना उस पर AI मॉडल को ट्रेन होने दे सकती हैं। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद के शब्दों में, “DEPA में मॉडल डेटा तक जाता है, डेटा मॉडल तक नहीं जाता।”

एक नजर में: DEPA for AI Training हैंडबुक
- क्या है: AI ट्रेनिंग के लिए सुरक्षित, उद्देश्य-सीमित (purpose-bound) डेटा साझेदारी का ढांचा।
- किसने जारी की: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सचिव एस. कृष्णन ने बेंगलुरु की गोलमेज बैठक में।
- सहयोग: iSPIRT फाउंडेशन (भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा स्वयंसेवी थिंक-टैंक)।
- मुख्य हिस्से: अनुबंध आधारित अनुमतियां (contractual permissions), नियंत्रित कंप्यूटिंग वातावरण, प्राइवेसी बढ़ाने वाले सुरक्षा उपाय और डेटा प्रोवेनेंस यानी डेटा कहां से आया और कैसे इस्तेमाल हुआ, इसका पूरा रिकॉर्ड।
- किसे फायदा: AI स्टार्टअप, रिसर्च संस्थान, अस्पताल, बैंक और सरकारी विभाग, जिनके पास डेटा है लेकिन प्राइवेसी और गोपनीयता के डर से वे उसे साझा नहीं कर पाते।
हैंडबुक की जरूरत क्यों पड़ी
MeitY की विज्ञप्ति के मुताबिक AI अब आर्थिक और सामाजिक विकास के केंद्र में है, और अच्छे AI मॉडल के लिए अलग-अलग तरह का, उच्च गुणवत्ता वाला डेटा जरूरी है। दिक्कत यह है कि प्राइवेसी, व्यापारिक गोपनीयता, बौद्धिक संपदा (IP) और “डेटा पर किसका नियंत्रण रहेगा” जैसे सवालों की वजह से संस्थान डेटा साझा करने से कतराते हैं। नतीजा यह कि भारतीय भाषाओं, स्वास्थ्य, खेती या वित्त जैसे क्षेत्रों के लिए भारतीय डेटा पर ट्रेन किए गए मॉडल बनाना मुश्किल हो जाता है।
DEPA Training इसी समस्या का जवाब है। इसमें डेटा देने वाला संस्थान तय करता है कि उसका डेटा किस काम के लिए, कितने समय के लिए और किन शर्तों पर इस्तेमाल होगा। मॉडल को एक नियंत्रित कंप्यूटिंग माहौल में डेटा पर ट्रेन किया जाता है, जहां से कच्चा डेटा बाहर नहीं निकलता। ट्रेनिंग पूरी होने पर सिर्फ मॉडल बाहर आता है, डेटा नहीं।
किसने क्या कहा
एस. कृष्णन, सचिव, MeitY
“भारत की AI महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ डेटा का जिम्मेदार और सुरक्षित इस्तेमाल करने की क्षमता भी होनी चाहिए। DEPA Training फ्रेमवर्क बड़े पैमाने पर भरोसेमंद डेटा सहयोग संभव बनाता है। इससे AI ट्रेनिंग के लिए बड़े डेटासेट तक पहुंच खुलती है और प्राइवेसी, व्यावसायिक गोपनीयता और संस्थागत नियंत्रण भी सुरक्षित रहते हैं।” उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रो. अजय कुमार सूद, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार
प्रो. सूद ने कहा कि इस व्यवस्था से भरोसेमंद, कई पक्षों के बीच और सीमा-पार डेटा सहयोग संभव होगा, जिससे वैज्ञानिक खोज तेज होगी और ऐसी समस्याएं सुलझ सकेंगी जिन्हें कोई अकेला संस्थान हल नहीं कर सकता। उन्होंने DEPA को “वैश्विक विज्ञान कूटनीति में भारत का योगदान” बताया, जो विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं के समावेशी और जिम्मेदार AI इकोसिस्टम बनाने के प्रयासों को आगे बढ़ाता है।
बैठक में और कौन शामिल रहा
गोलमेज बैठक में DEPA Training फ्रेमवर्क पर हरि सुब्रमण्यन ने प्रस्तुति दी। इसके अलावा इमर्जेंट AI के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन मानव गर्ग, सर्वम (Sarvam) के अश्विनी शर्मा और YourStory के मैनेजिंग एडिटर अदित चार्ली ने अपने विचार रखे। सरकार, उद्योग, अकादमिक जगत, रिसर्च और मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ खुली चर्चा के बाद बैठक खत्म हुई।

DEPA क्या है: पुरानी सोच, नया इस्तेमाल
DEPA यानी डेटा एम्पावरमेंट एंड प्रोटेक्शन आर्किटेक्चर कोई बिल्कुल नया विचार नहीं है। नीति आयोग ने 2020 में इसका ड्राफ्ट सार्वजनिक चर्चा के लिए रखा था। इसका मूल सिद्धांत है कि लोगों और संस्थाओं को अपने डेटा पर नियंत्रण मिले और वे सहमति के आधार पर उसे साझा कर सकें। वित्तीय क्षेत्र में RBI के अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम में यही सहमति-आधारित सोच अपनाई गई, जिससे आज लोग अपनी बैंक जानकारी सहमति देकर लोन या निवेश सेवाओं से साझा कर पाते हैं।
अब यही सोच AI ट्रेनिंग पर लागू की जा रही है। फर्क यह है कि यहां व्यक्ति की जगह अक्सर संस्थान डेटा के मालिक होते हैं, और साझा करने का मकसद किसी एक लेनदेन की जगह एक AI मॉडल को सिखाना है।
आम लोगों और स्टार्टअप्स के लिए इसका मतलब
- प्राइवेसी: मरीजों या ग्राहकों का निजी डेटा अस्पताल या बैंक से बाहर भेजे बिना उस पर मॉडल ट्रेन हो सकेगा। डेटा प्रोवेनेंस से यह भी दर्ज रहेगा कि डेटा कहां और किस अनुमति से इस्तेमाल हुआ।
- भारतीय AI: भारतीय भाषाओं, खेती, स्वास्थ्य और वित्त जैसे क्षेत्रों के लिए भारतीय डेटा पर बेहतर मॉडल बनाने का रास्ता खुल सकता है।
- स्टार्टअप: छोटे AI स्टार्टअप्स, जिनके पास खुद का बड़ा डेटा नहीं है, तय शर्तों पर संस्थानों के डेटा पर मॉडल ट्रेन कर सकेंगे।
- जवाबदेही: अनुबंध आधारित अनुमतियों से तय रहेगा कि डेटा किस काम के लिए इस्तेमाल हुआ, जिससे गलत इस्तेमाल पर जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह एक हैंडबुक और फ्रेमवर्क है, कोई नया कानून नहीं। इसे कितने संस्थान अपनाते हैं और यह डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के नियमों के साथ जमीन पर कैसे काम करता है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

हाल की AI नीतियों से जुड़ाव
पिछले कुछ दिनों में AI और डेटा से जुड़े कई अहम कदम उठे हैं। TRAI ने टेलीकॉम नेटवर्क में AI के इस्तेमाल पर ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी कर 27 नवंबर तक राय मांगी है, और बड़ी टेक कंपनियों ने वेबसाइटों के लिए AI ट्रेनिंग से बाहर रहने (opt-out) का साझा संकेत मानने पर सहमति दी है। DEPA हैंडबुक इस बहस में डेटा देने वालों के नियंत्रण और भरोसे का पक्ष जोड़ती है।
FAQ
DEPA for AI Training हैंडबुक किसने जारी की?
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने। इसे MeitY सचिव एस. कृष्णन ने बेंगलुरु में एक गोलमेज बैठक में जारी किया, iSPIRT फाउंडेशन के सहयोग से।
क्या इसमें डेटा किसी कंपनी को दे दिया जाता है?
नहीं। फ्रेमवर्क का मूल सिद्धांत है कि मॉडल डेटा तक जाता है। नियंत्रित कंप्यूटिंग माहौल में ट्रेनिंग होती है और डेटा देने वाले संस्थान का नियंत्रण बना रहता है।
क्या यह कोई नया कानून है?
नहीं, यह एक तकनीकी-कानूनी ढांचा और मार्गदर्शिका (हैंडबुक) है, जिसे संस्थान स्वेच्छा से अपना सकते हैं।
DEPA पहले कहां इस्तेमाल हुआ है?
सहमति आधारित डेटा साझेदारी की यही सोच वित्तीय क्षेत्र के अकाउंट एग्रीगेटर सिस्टम में अपनाई गई है।
यह भी पढ़ें: TRAI का टेलीकॉम नेटवर्क में AI पर ड्राफ्ट | AI ट्रेनिंग से बाहर रहने का साझा संकेत | DeepSeek का सुपर-एजेंट
स्रोत: इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, आधिकारिक X (30 अक्टूबर 2026); Business Standard (आधिकारिक विज्ञप्ति के हवाले से); The Hindu BusinessLine/ANI; ETV Bharat; PTI; Hindustan Times। सभी फोटो: MeitY (आधिकारिक X)। Last updated: 1 Nov 2026








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