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OpenAI का दावा: AI ने गणित, कंप्यूटर साइंस और फिजिक्स में की तीन बड़ी खोज

OpenAI का दावा है कि उसके AI मॉडलों ने Exponential Time Hypothesis को गलत साबित किया और गणित व भौतिकी के पुराने सवाल हल किए। दावों की जांच अब बाहरी विशेषज्ञों के समूह करेंगे, जिनमें ETH का प्रस्ताव रखने वाले वैज्ञानिक भी शामिल हैं।

OpenAI AI खोज: गणित, कंप्यूटर साइंस और फिजिक्स में AI के तीन दावों पर TimeTrolls का ग्राफिक
ग्राफिक: TimeTrolls

मुख्य बातें

  • तीन दावे, तीन अलग दुनिया
  • जांच की जिम्मेदारी किसके हाथ में
  • क्रेडिट किसे मिलेगा, यह नया सवाल

OpenAI ने सोमवार (26 अक्टूबर) को एक ऐसा दावा किया है जिस पर अगले कई महीनों तक दुनिया भर के गणितज्ञ और कंप्यूटर वैज्ञानिक बहस करेंगे। कंपनी का कहना है कि उसके अंदरूनी AI मॉडलों ने तीन अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी खोज की है: गणित की हार्मोनिक एनालिसिस, कंप्यूटर साइंस की कॉम्प्लेक्सिटी थ्योरी और भौतिकी की क्वांटम फील्ड थ्योरी। इनमें सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि AI ने Exponential Time Hypothesis (ETH) को गलत साबित कर दिया है, जिसे दशकों से लगभग सच माना जाता रहा है।

यह घोषणा OpenAI के आधिकारिक ब्लॉग पर हुई और The Verge, The Next Web और Al Jazeera जैसे संस्थानों ने इसे रिपोर्ट किया है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि ये अभी कंपनी के दावे हैं। स्वतंत्र विशेषज्ञ इन्हें जांचना शुरू कर रहे हैं और खुद जांच करने वाले वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि उनका जुड़ना किसी तरह का प्रमाणपत्र नहीं है।

तीन दावे, तीन अलग दुनिया

पहला दावा गणित से जुड़ा है। 1991 में गणितज्ञ Christopher Sogge ने local smoothing conjecture रखा था। आसान शब्दों में यह तरंगों (waves) के व्यवहार से जुड़ा सवाल है: जब तरंगें किसी एक जगह सिमटती हैं, तो सबसे ज्यादा सिमटाव बहुत कम समय के लिए ही रह सकता है। OpenAI के मुताबिक 2019 में Guth, Wang और Zhang ने इसे दो डायमेंशन में साबित किया था, और 2025 में Wang और Zahl ने मशहूर Kakeya conjecture को तीन डायमेंशन में हल किया। अब कंपनी का दावा है कि उसके मॉडल ने local smoothing को हर डायमेंशन में साबित कर दिया है, जिससे Kakeya conjecture और Stein का restriction conjecture भी सभी डायमेंशन में हल हो जाते हैं। कंपनी के अनुसार यह नतीजा 18 अक्टूबर को मिला और अगले दिन इसे Lean में औपचारिक रूप दिया गया।

दूसरा दावा कंप्यूटर साइंस का है और शायद सबसे बड़ा भी। ETH यह मानता है कि Boolean satisfiability (SAT) जैसी समस्याओं को हल करने में लगने वाला समय इनपुट बढ़ने के साथ घातांकीय (exponential) रूप से बढ़ता है, यानी इनसे बहुत तेज कोई तरीका मौजूद नहीं है। यह सवाल मशहूर P vs NP समस्या से गहराई से जुड़ा है। OpenAI के ब्लॉग के मुताबिक सैकड़ों रिसर्च पेपर ETH को सच मानकर ही ग्राफ थ्योरी, कंप्यूटेशनल बायोलॉजी, डेटाबेस और कंप्यूटेशनल ज्योमेट्री जैसी शाखाओं में नतीजे निकालते रहे हैं। कंपनी का कहना है कि उसके सिस्टम ने 16 अक्टूबर को ETH का खंडन ढूंढा और 17 अक्टूबर को इसे Lean में सत्यापित किया गया। The Verge के अनुसार प्रकाशित पेपर एक ऐसा डिटर्मिनिस्टिक एल्गोरिदम बताता है जो तय चौड़ाई वाले CNF फॉर्मूलों के संतोषजनक हल subexponential समय में गिन सकता है, और 3-SAT वाला मामला ETH को गलत साबित करता है।

तीसरा दावा भौतिकी का है। OpenAI कहती है कि उसके मॉडल ने चार डायमेंशन में कुछ quantum field theories के अस्तित्व का गणितीय रूप से सख्त प्रमाण दिया है, जिनमें quantum chromodynamics (QCD) भी शामिल है। QCD वह सिद्धांत है जो क्वार्क और ग्लूऑन के बीच strong force को समझाता है। इसी काम के एक हिस्से में pure Yang–Mills theory के अस्तित्व का प्रमाण भी है, जो Clay Mathematics Institute की Millennium Prize समस्याओं में से एक का हिस्सा है। कंपनी के मुताबिक Yang–Mills का प्रमाण 9 सितंबर और QCD का 18 सितंबर को मिला था, लेकिन Lean में पूरी पुष्टि होने तक इसे रोका गया।

जांच की जिम्मेदारी किसके हाथ में

इस बार OpenAI ने नतीजे जारी करने का तरीका बदला है। कंपनी ने बाहरी विशेषज्ञों से संपर्क किया और उन्हें “shepherd” यानी मार्गदर्शक की भूमिका दी। गणित वाले नतीजे के लिए सलाह मिली कि AI का आउटपुट सीधे सार्वजनिक कर दिया जाए, ताकि शोधकर्ता खुद उसे समझें। ETH वाले नतीजे की जांच UC San Diego के Russell Impagliazzo और Ramamohan Paturi तथा MIT के Ryan Williams का समूह करेगा। दिलचस्प बात यह है कि Impagliazzo और Paturi ने Francis Zane के साथ मिलकर ही ETH का प्रस्ताव रखा था। यानी अब वही लोग उस दावे को परखेंगे जो उनकी अपनी परिकल्पना को गलत बताता है।

भौतिकी वाले समूह का नेतृत्व नोबेल विजेता David Gross कर रहे हैं, जिनके साथ Michael Douglas, Arthur Jaffe, Igor Klebanov और Nikita Nekrasov हैं। इस समूह ने फिलहाल AI के बनाए दस्तावेज जारी न करने और खुद उसका लेखन करने का फैसला किया है। गणित और ETH वाले नतीजों का प्राकृतिक भाषा वाला लेख और Lean प्रूफ OpenAI ने अपने GitHub पर डाल दिया है।

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उत्साह भी, सावधानी भी

The Next Web के अनुसार ETH की जांच करने वाले तीनों वैज्ञानिकों ने अपने क्षेत्र के नाम एक खुला पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने कहा, “हमारी भागीदारी को इस दावे का प्रमाणपत्र नहीं समझा जाना चाहिए। इतने महत्व के नतीजे के लिए सावधान और स्वतंत्र जांच जरूरी है।” उन्होंने यह भी लिखा कि अगर दावा सही निकला तो सैद्धांतिक कंप्यूटर साइंस का एक अहम हिस्सा बदल जाएगा। Ryan Williams ने बताया कि समूह ने कोई नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट साइन नहीं किया है और इस काम के लिए कोई भुगतान नहीं लिया जा रहा। समूह की मांग पर OpenAI ने सारा कच्चा डेटा सार्वजनिक करने और इस विषय पर एक सम्मेलन का खर्च उठाने पर सहमति दी है।

गणित वाले नतीजे पर University of Rochester के प्रोफेसर Alex Iosevich ने Al Jazeera से कहा कि यह एक “ऐतिहासिक घटना” लगती है। Sogge उनके PhD सलाहकार रहे हैं, इसलिए उन्होंने माना कि खबर पहले उन्हें झटके जैसी लगी। Iosevich का कहना है कि AI की वजह से सैद्धांतिक गणित का क्षेत्र तेजी से बदलेगा, और इस बात पर उन्हें थोड़ी उदासी भी है, हालांकि वे इसे आगे बढ़ने के मौके के रूप में देखते हैं।

लेकिन पूरी तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। 6 अक्टूबर को OpenAI ने एक साथ 700 से ज्यादा गणितीय प्रीप्रिंट GitHub पर डाले थे। Nature की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय कई गणितज्ञ नाराज हुए थे। कुछ ने शिकायत की कि उनके अधूरे काम पर पहले ही नतीजा आ गया, तो कुछ ने इतने बड़े पैमाने पर एक साथ पेपर डालने के तरीके पर सवाल उठाए। इस बार मार्गदर्शक समूह बनाकर OpenAI उसी आलोचना का जवाब देती दिख रही है। कंपनी ने खुद माना है कि शुरुआती मार्गदर्शक चुनने से यह तय हो जाता है कि पहले कौन जुड़ेगा, और इससे जानकारी में असमानता पैदा होती है।

क्रेडिट किसे मिलेगा, यह नया सवाल

OpenAI का कहना है कि वह अपने मॉडलों की खोज के लिए अकादमिक क्रेडिट नहीं चाहती। कंपनी के मुताबिक पहचान उन समूहों को मिलनी चाहिए जो इन नतीजों को समझाएंगे और उन पर लेख लिखेंगे। इसके अलावा कंपनी ने Simons Foundation को 50 लाख डॉलर (5 मिलियन डॉलर) देने की घोषणा पहले ही की थी, जिससे AI से निकले नतीजों पर वर्कशॉप और सम्मेलन होंगे।

फिर भी असली सवाल वहीं खड़ा है जो ETH समूह ने अपने पत्र में उठाया: जब AI किसी नतीजे तक पहले पहुंच जाए, तो वैज्ञानिक क्रेडिट कैसे बंटे? उनकी चिंता है कि पहचान उन्हें मिल सकती है जो सबसे पहले छापें या जिनके पास सबसे ताकतवर टूल हों, जबकि जांचने और समझाने का मेहनत भरा काम पीछे छूट जाए। भारत जैसे देश के लिए यह सवाल और अहम है, जहां ज्यादातर विश्वविद्यालयों के पास ऐसे बड़े मॉडल चलाने के संसाधन नहीं हैं।

आम लोगों के लिए इसका क्या अर्थ है

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि ETH के गलत साबित होने का मतलब यह नहीं कि कल से कंप्यूटर हर मुश्किल समस्या पलक झपकते हल कर देंगे। OpenAI ने खुद लिखा है कि ऐसे एल्गोरिदम खोजने और सैद्धांतिक प्रगति को व्यावहारिक सुधार में बदलने के लिए काफी और रिसर्च की जरूरत होगी। यानी यह खोज फिलहाल सिद्धांत के स्तर पर है। इसलिए बैंकिंग एन्क्रिप्शन या ऑनलाइन सुरक्षा पर तुरंत कोई असर मानने की वजह नहीं है।

दूसरी बात यह कि Lean जैसे टूल में मशीन से जांचा गया प्रूफ भरोसे का मजबूत संकेत है, पर विशेषज्ञ यह भी देखते हैं कि प्रमेय को सही ढंग से लिखा गया है या नहीं और उसका असली मतलब क्या है। इसीलिए स्वतंत्र समूहों की जांच निर्णायक होगी। अगर ये तीनों दावे टिकते हैं तो यह पहली बार होगा जब AI ने एक ही दिन में इतने बुनियादी सवालों पर इतना बड़ा योगदान दिया हो। अगर कहीं चूक निकली, तो AI कंपनियों के बड़े दावों पर सवाल और गहरे होंगे।

AI रिसर्च की दौड़ अब सिर्फ चैटबॉट और कोडिंग तक सीमित नहीं रही। हाल में हमने बताया था कि कैसे OpenAI अब बिना इंटरनेट के AI मॉडल को ट्रेन करने पर काम कर रही है, और Sam Altman ने AI के भविष्य को लेकर तीन संभावित रास्ते गिनाए थे। चीन की ओर से भी मुकाबला तेज है, जिसका उदाहरण Moonshot का Kimi K3.1 Pro है। आने वाले हफ्तों में ETH समूह की खुली समीक्षा और भौतिकी समूह का लेख यह तय करेंगे कि 26 अक्टूबर की यह घोषणा विज्ञान के इतिहास में कहां दर्ज होगी।

स्रोत क्रेडिट: OpenAI ब्लॉग, The Verge, The Next Web, Al Jazeera और Nature।

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Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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