छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी का दो दिन का रायपुर दौरा सोमवार देर शाम खत्म हो गया, लेकिन इसके बाद जो चर्चा शुरू हुई है, वह अभी थमती नहीं दिख रही। एक तरफ भाजपा के भीतर यह बात तैर रही है कि मंत्रियों को उनके कामकाज और तौर-तरीकों पर साफ संदेश दिया गया। दूसरी तरफ कांग्रेस इस पूरे दौरे को अपने हिसाब से पढ़ रही है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव ने अंबिकापुर में चुटकी लेते हुए कहा, “लगता है स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ से चुनाव लड़ना चाहती हैं।”
यह टिप्पणी मज़ाकिया लहजे में थी, लेकिन इसके पीछे की सियासत गंभीर है। राज्य में विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं और सत्ता में बैठी भाजपा अब से ही सरकार और संगठन के बीच तालमेल कसने में लगी है। सवाल यह है कि ईरानी के दौरे से निकले संदेश का असर मंत्रियों के कामकाज पर दिखेगा या यह भी बैठकों तक सीमित रह जाएगा।
दो दिन, आधा दर्जन से ज़्यादा बैठकें
स्मृति ईरानी 25 अक्टूबर को रायपुर पहुंचीं। न्यूज़18 के मुताबिक उन्हें हाल ही में छत्तीसगढ़ भाजपा का प्रभारी बनाया गया है और सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी की ज़िम्मेदारी मिली है। दोनों नेताओं ने पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों और कोर ग्रुप के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। जनता से रिश्ता की रिपोर्ट कहती है कि दो दिन में आधा दर्जन से अधिक बैठकें हुईं और सोमवार 26 अक्टूबर को मंत्रियों के साथ अलग बैठक रखी गई।
दौरे की शुरुआत ही कुछ अलग अंदाज़ में हुई। सीजी न्यूज़24 के अनुसार एयरपोर्ट पर पार्टी की ओर से तय किए गए करीब 16 पदाधिकारी और विधायक ही पहुंचे। न ढोल-ताशे बजे, न बाइक रैली निकली और निजी होर्डिंग-पोस्टर से भी परहेज़ किया गया। प्रदेश कार्यालय में मंत्रियों की गाड़ियों को भीतर नहीं जाने दिया गया और बैठकों में मोबाइल फोन जमा कराने की बात भी सामने आई। यानी संदेश पहले दिन से साफ था कि अनुशासन और सादगी पर ज़ोर रहेगा।
मंत्रियों से क्या कहा गया
IBC24 की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी ने सभी मंत्रियों को अपने प्रभार वाले ज़िलों, गृह क्षेत्र और दूसरी जगहों पर ज़्यादा से ज़्यादा दौरे करने, कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मिलने और उनकी बात सुनने को कहा। विधायकों से कहा गया कि दिवाली के आसपास अपने इलाके में भोज रखें, जिसमें सांसद भी शामिल हों। चैनल ने पूरे दौरे का सार एक लाइन में रखा: लो प्रोफाइल रहें, जनता के बीच रहें, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें, लेकिन खुद का प्रचार करने से बचें।
इससे आगे की बात ज़्यादा दिलचस्प है, पर यहां सावधानी ज़रूरी है। जनता से रिश्ता ने पार्टी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने कुछ मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई और तीन से चार मंत्रियों को कार्यशैली सुधारने की नसीहत दी गई। उसी रिपोर्ट में यह भी साफ लिखा है कि किन मंत्रियों से यह बात कही गई और शिकायतें किस बारे में थीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और भाजपा ने इस पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है। इसलिए इसे किसी मंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई या चेतावनी मानना फिलहाल जल्दबाज़ी होगी।
अंबिकापुर से आया सिंहदेव का तंज
कांग्रेस के “वोट बचाओ, देश बचाओ” अभियान के तहत अंबिकापुर में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में टीएस सिंहदेव से पूछा गया कि ईरानी के स्वागत में होर्डिंग और फूल-मालाओं से दूरी क्यों रखी गई। द टारगेट365 के मुताबिक इसी सवाल पर उन्होंने कहा कि लगता है स्मृति ईरानी छत्तीसगढ़ से चुनाव लड़ना चाहती हैं। IBC24 ने उनकी बात के साथ यह भी जोड़ा कि सिंहदेव के मुताबिक छत्तीसगढ़ भाजपा को जीत की उम्मीद नहीं दिख रही।
सिंहदेव यहीं नहीं रुके। उन्होंने शक्कर की बढ़ती कीमत का मुद्दा उठाया और कहा कि वह स्मृति ईरानी से इसका भाव पूछना चाहते हैं। ईरानी को दो राज्यों का प्रभार मिलने के सवाल पर उन्होंने इसे भाजपा का अंदरूनी मामला बताया और सिर्फ इतना कहा, “वह अपना काम कर रही हैं।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में एआईसीसी पर्यवेक्षक देवाशीष पटनायक और प्रदेश कांग्रेस की सह-प्रभारी ज़रिता लैतफलांग भी मौजूद थीं।
वीडियो स्रोत: Bansal News (YouTube) | मूल वीडियो देखें
पोस्टर वॉर, जो दौरे से पहले ही शुरू हो गया था
सिंहदेव की टिप्पणी अकेली नहीं है। ईरानी के रायपुर पहुंचने वाले दिन ही प्रदेश कांग्रेस ने एक्स पर कई पोस्टर डाले। न्यूज़18 के अनुसार एक पोस्ट में लिखा गया, “आज छत्तीसगढ़ में 500 रुपए वाले गैस सिलेंडर का ट्रक आ रहा है।” पोस्टर में ईरानी को सिलेंडरों से भरा ट्रक चलाते दिखाया गया। एक दूसरे पोस्ट में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को “लापता विकास” लिखे होर्डिंग के पीछे से झांकते दिखाया गया और कैप्शन था, “क्या दिखाएंगे बेचारे रिमोट वाले मुख्यमंत्री जी, जब पोस्टरों के अलावा दिखाने को कुछ ना हो तब…” मंत्रियों-विधायकों की बैठक पर कांग्रेस ने लिखा, “सारे होनहार एक ही क्लास में, अब मैडम किस-किस को संभालेंगी…?”
ये पोस्टर व्यंग्य हैं, कोई तथ्यात्मक दावा नहीं। लेकिन इनसे यह समझ आता है कि कांग्रेस ईरानी के दौरे को सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने का मौका बना रही है, ख़ासकर महंगाई, महिलाओं की सुरक्षा और विकास के मुद्दों पर। IBC24 के मुताबिक कांग्रेस ने मंत्रियों को अजीबोगरीब उपनाम देकर भ्रष्टाचार और जनता का काम न करने का आरोप लगाया और ईरानी से पूछा कि प्रदेश की महिलाओं को अपराध और महंगाई से मुक्ति कब मिलेगी।
भाजपा का जवाब
भाजपा ने कांग्रेस की पोस्टर पॉलिटिक्स को विपक्ष की ओछी सोच और मुद्दों की शून्यता बताया है, ऐसा IBC24 ने बताया। सिंहदेव की चुनाव लड़ने वाली टिप्पणी पर भाजपा या स्मृति ईरानी की ओर से अलग से कोई जवाब इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक सामने नहीं आया है, उनके जवाब का इंतज़ार है।
असली सवाल: नसीहत से ज़मीन पर क्या बदलेगा
ईरानी का दौरा उस वक्त हुआ है जब साय सरकार को दो साल से ज़्यादा हो चुके हैं और कार्यकर्ताओं की यह शिकायत अक्सर सुनाई देती है कि मंत्री आसानी से उपलब्ध नहीं होते। प्रभारी का “लो प्रोफाइल रहें, पर जनता के बीच दिखें” वाला संदेश इसी शिकायत का जवाब लगता है। मंत्रियों को दौरे बढ़ाने और खुद के प्रचार से बचने को कहना यह भी बताता है कि पार्टी नेतृत्व व्यक्तिगत ब्रांडिंग से ज़्यादा सरकार की योजनाओं की पहुंच पर ध्यान चाहता है।
कांग्रेस के लिए यह मौका दोहरा है। वह एक तरफ इसे भाजपा की अंदरूनी बेचैनी बताकर पेश कर रही है, और दूसरी तरफ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर अपने “वोट बचाओ, देश बचाओ” अभियान को आगे बढ़ा रही है, जिसकी बड़ी रैली 1 नवंबर को दिल्ली में होनी है। सिंहदेव की प्रेस कॉन्फ्रेंस भी इसी अभियान का हिस्सा थी।
आगे देखने वाली बातें तीन हैं। पहली, क्या आने वाले हफ्तों में मंत्रियों के ज़िला दौरे सच में बढ़ते हैं। दूसरी, क्या भाजपा संगठन जिन मंत्रियों पर शिकायतें आईं, उनके बारे में कोई औपचारिक कदम उठाता है, जिसकी फिलहाल कोई पुष्टि नहीं है। और तीसरी, क्या ईरानी का अगला दौरा इसी सख़्ती के साथ होता है। तब तक छत्तीसगढ़ की सियासत में यह बहस पोस्टरों और तंज के सहारे ही चलती दिख रही है।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: जनता से रिश्ता, IBC24, द टारगेट365, न्यूज़18 हिंदी, सीजी न्यूज़24।

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