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सरदार पटेल जयंती पर अमित शाह ने कांग्रेस पर लगाया भुलाने का आरोप, अधीर रंजन चौधरी ने याद दिलाया RSS पर प्रतिबंध

सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर दिल्ली में "रन फॉर यूनिटी" को हरी झंडी दिखाते हुए अमित शाह ने कांग्रेस पर पटेल को भुलाने की कोशिश का आरोप लगाया। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने जवाब में याद दिलाया कि पटेल ने 1948 में RSS पर प्रतिबंध लगाया था।

अमित शाह, सरदार वल्लभभाई पटेल और अधीर रंजन चौधरी की तस्वीरों के साथ राष्ट्रीय एकता दिवस पर बहस का ग्राफिक
Photos: Wikimedia Commons / Ministry of Home Affairs (GODL-India), Government of India (Public domain), Ministry of Railways (GODL-India). ग्राफिक: timetrolls.in

मुख्य बातें

  • अमित शाह ने क्या कहा
  • कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी का जवाब
  • RSS पर प्रतिबंध वाली बात का इतिहास क्या है
  • पटेल की विरासत पर खींचतान नई नहीं

सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को देश भर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया, लेकिन श्रद्धांजलि के इस दिन भी सियासत पीछे नहीं रही। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में “रन फॉर यूनिटी” को हरी झंडी दिखाते हुए कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने वर्षों तक पटेल को वह सम्मान नहीं दिया जिसके वे हकदार थे। कुछ ही घंटों में कांग्रेस की ओर से भी जवाब आ गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पटेल ने खुद RSS पर प्रतिबंध लगाया था, और यह बात गृह मंत्री को याद रखनी चाहिए।

यानी एक बार फिर वही पुरानी बहस सामने है, जो लगभग हर साल 31 अक्टूबर के आसपास उठती है: सरदार पटेल की असली राजनीतिक विरासत किसकी है?

अमित शाह ने क्या कहा

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक शाह ने कार्यक्रम में पटेल को श्रद्धांजलि देने के बाद कहा:

कई वर्षों तक भारत ने सरदार साहब को उनके योगदान के लिए वह सम्मान नहीं दिया, जिसके वे वास्तव में हकदार थे। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा सरदार साहब की स्मृतियों को मिटाने की कोशिश की है। हालांकि, सूरज की चमक को छिपाया नहीं जा सकता।

अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री (अमर उजाला के अनुसार)

शाह ने इसके साथ यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” की परिकल्पना की और उसके जरिए पटेल की विरासत को पूरे देश के सामने रखा। उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से पटेल की जयंती राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जा रही है।

अपने भाषण में शाह ने पटेल के काम को आंकड़ों में भी रखा। रिपब्लिक भारत के मुताबिक उन्होंने कहा कि आजादी के समय दुनिया के राजनीतिक पंडित कहते थे कि भारत बिखर जाएगा, लेकिन आजादी के बाद के 1,218 दिनों में पटेल ने वह कर दिखाया जिसे हर कोई असंभव मानता था। शाह के शब्दों में, कई नेता मिलकर भी पूरे जीवन में यह काम नहीं कर पाते।

भाषण का बड़ा हिस्सा सरकार की उपलब्धियों पर भी रहा। शाह ने अनुच्छेद 370 हटाने, नक्सलवाद खत्म करने के दावे और “एक देश, एक कर” का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने लोगों से 31 दिसंबर 2029 तक देश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने के लक्ष्य में साथ देने की अपील की और कहा कि विकसित भारत का पहला चरण नशामुक्त भारत है। इस अभियान पर हमारी पिछली रिपोर्ट यहां पढ़ें।

कांग्रेस की ओर से अधीर रंजन चौधरी का जवाब

ईटीवी भारत के लाइव अपडेट के अनुसार शाह के बयान के कुछ घंटों बाद दिल्ली में कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल कांग्रेस पार्टी के नेता थे और उन्होंने खुद RSS पर प्रतिबंध लगाया था। चौधरी ने सवाल किया कि पटेल ने RSS पर प्रतिबंध क्यों लगाया था, और कहा कि अगर भाजपा सचमुच पटेल का सम्मान करना चाहती है तो उसे अपना रवैया और विचारधारा बदलनी होगी।

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से भी पटेल को “लौह पुरुष” कहकर श्रद्धांजलि दी और उनके एक पुराने भाषण का वीडियो साझा किया, जिसमें पटेल नागरिकों से आपसी सद्भाव के साथ रहने की अपील करते हैं। ईटीवी भारत ने इस पोस्ट का भी जिक्र किया है। शाह के आरोप पर भाजपा या गृह मंत्रालय की ओर से अधीर के बयान का अलग से कोई जवाब इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक सामने नहीं आया था।

RSS पर प्रतिबंध वाली बात का इतिहास क्या है

अधीर रंजन चौधरी जिस घटना की ओर इशारा कर रहे हैं, वह 1948 की है। 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद फरवरी 1948 में केंद्र सरकार ने RSS पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय सरदार पटेल देश के गृह मंत्री थे। इंडियन एक्सप्रेस के एक्सप्लेनर के मुताबिक यह प्रतिबंध 1949 में तब हटाया गया जब RSS ने अपना लिखित संविधान अपनाया और खुले व संवैधानिक तरीके से काम करने की बात मानी।

भाजपा की ओर से अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि बाद में प्रतिबंध हटाने का फैसला भी पटेल के गृह मंत्री रहते ही हुआ, जबकि कांग्रेस 1948 के फैसले को पटेल की सोच का प्रमाण बताती है। यही वजह है कि पटेल की जयंती पर यह मुद्दा बार-बार उठता है और दोनों पक्ष इतिहास के अलग-अलग पन्ने सामने रखते हैं।

पटेल की विरासत पर खींचतान नई नहीं

सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। आजादी के बाद देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने 500 से ज्यादा रियासतों के भारत में विलय में केंद्रीय भूमिका निभाई। 15 दिसंबर 1950 को उनका निधन हुआ और 1991 में उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया। भाजपा यह सवाल उठाती रही है कि यह सम्मान इतनी देर से क्यों मिला।

2018 में गुजरात के केवड़िया (अब एकता नगर) में 182 मीटर ऊंची “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” का उद्घाटन हुआ था, जिसे दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा बताया जाता है। भाजपा इसे पटेल को उनका उचित स्थान दिलाने की कोशिश के रूप में पेश करती है। कांग्रेस का कहना रहा है कि पटेल जीवन भर कांग्रेस के नेता रहे और भाजपा उनकी विरासत को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करती है।

आज के दिन की बाकी तस्वीर

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और अमित शाह ने दिल्ली में पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की।
  • द हॉक के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर में करीब 426 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
  • अमर उजाला के अनुसार शाह ने बताया कि प्रधानमंत्री शाम 4:30 बजे एकता नगर में देश भर की पुलिस टुकड़ियों की परेड की सलामी लेंगे।
  • आज ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि भी है, जिस पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने उन्हें याद किया।

सियासी माहौल में इस बयान का मतलब

शाह का यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा और कांग्रेस के बीच तल्खी पहले से चरम पर है। विपक्षी INDIA गठबंधन आज दोपहर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक “महाभियोग” कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली की तैयारी में है। पिछले हफ्ते मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री के पिता पर टिप्पणी को लेकर भी दोनों दलों में तीखी बहस हुई थी, जिस पर हमारी रिपोर्ट यहां है।

ऐसे माहौल में राष्ट्रीय नायकों की विरासत भी दोनों दलों के बीच बहस का हिस्सा बन जाती है। भाजपा पटेल को “अखंड भारत के निर्माता” के तौर पर सामने रखकर कांग्रेस पर उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाती है, जबकि कांग्रेस पटेल को अपनी पार्टी का नेता बताकर RSS पर उनके फैसले की याद दिलाती है। आने वाले दिनों में एकता नगर की परेड में प्रधानमंत्री का संबोधन और विपक्ष की रैली, दोनों इस बहस को और आगे ले जा सकते हैं।

वीडियो स्रोत: NDTV (YouTube) | मूल वीडियो देखें

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: अमर उजाला, रिपब्लिक भारत, ईटीवी भारत, द हॉक, इंडियन एक्सप्रेस।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी TimeTrolls के संस्थापक और संपादक हैं। वे B.Tech (मैकेनिकल) और MBA (ऑपरेशंस) हैं और 4+ साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। TimeTrolls पर वे देश, खेल, टेक और रोज़गार से जुड़ी खबरें तथ्यों की जांच के बाद सरल हिंदी में प्रकाशित करते हैं।

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