देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा में चल रही अंदरूनी खींचतान अब राजनीति तक पहुंच गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को X पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि टाटा समूह को “आपराधिक तरीके से बर्बाद” किया जा रहा है और देश का कोई बड़ा कारोबारी इस पर बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा। द हिंदू के मुताबिक यह पहली बार है जब कांग्रेस ने टाटा समूह के भीतर चल रहे इस विवाद पर खुलकर कुछ कहा है।
राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिया। हालांकि उन्होंने अपनी पोस्ट में यह नहीं बताया कि सरकार की इस विवाद में क्या भूमिका है या वे किन “अपराधों” की बात कर रहे हैं। सरकार और टाटा समूह की तरफ से खबर लिखे जाने तक इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
राहुल गांधी ने ठीक-ठीक क्या कहा
समाचार एजेंसी भाषा के हवाले से ThePrint हिंदी ने उनकी पोस्ट का हिंदी अनुवाद इस तरह दिया है:
- “टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कोई भी कारोबारी नेता एक शब्द कहने की हिम्मत नहीं कर रहा।”
- “आप कब तक चुप रहेंगे? तब तक, जब तक वे आप पर कब्जा नहीं कर लेते?”
- “भारतीय कारोबार मोदी और शाह का खिलौना नहीं है। आपमें साहस की कमी है। हममें नहीं। हम इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे।”
अंग्रेजी में उनकी पोस्ट की शुरुआत “Tata is being criminally destroyed” से होती है। यह बयान ऐसे समय आया है जब टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच मतभेद अखबारों की सुर्खियों में हैं।
टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में झगड़ा किस बात पर है
टाटा समूह की कंपनियों की मालिक होल्डिंग कंपनी टाटा संस है, और उसकी करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स के पास है। यानी ट्रस्ट्स के पास समूह की असली चाबी है। टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा हैं, जबकि टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन हैं।
विवाद की जड़ 17 सितंबर 2026 को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक है। IANS के मुताबिक इस बैठक में चंद्रशेखरन को 21 फरवरी 2027 से अगले पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन बनाने का प्रस्ताव पास हुआ। नोएल टाटा ने 26 अक्टूबर को कंपनी सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव को चुनौती दी और कहा कि यह वैध नहीं है। द हिंदू के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स इस पुनर्नियुक्ति को अवैध बता रहा है, क्योंकि नोएल टाटा ने इस पर वीटो किया था।
नोएल टाटा की आपत्तियां
IANS और ANI की रिपोर्ट्स के अनुसार नोएल टाटा ने अपने पत्र में ये मुख्य बातें उठाई हैं:
- बोर्ड बैठक के मूल और संशोधित एजेंडे में चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति का साफ जिक्र नहीं था; आइटम-7 को सिर्फ नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की चर्चा के रूप में दिखाया गया था।
- कंपनी के नियमों (आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन) के तहत चयन समिति नहीं बनाई गई, और कुछ खास निदेशकों की जरूरी सहमति नहीं ली गई।
- बैठक की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, अंतिम मिनट्स और प्रस्ताव की प्रमाणित कॉपी दो बार मांगने के बाद भी उन्हें नहीं दी गई।
- मिनट्स फाइनल होने से पहले ही प्रस्ताव को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास दाखिल कर दिया गया।
- हैनो वन वेयरहाउसिंग नाम की कंपनी, जिसमें चंद्रशेखरन की पत्नी और बेटे निदेशक बताए गए हैं, से जुड़े संबंधों की जानकारी बोर्ड को पहले दी गई थी या नहीं।
नोएल टाटा ने सात दिन के भीतर रिकॉर्डिंग, मिनट्स, हर निदेशक के वोट का ब्योरा और एजेंडे के सभी संस्करण मांगे हैं। ANI के मुताबिक उन्होंने पत्र में लिखा, “The resolution is void”, यानी यह प्रस्ताव शून्य है। ये नोएल टाटा के आरोप हैं; टाटा संस या चंद्रशेखरन की ओर से इन पर विस्तृत सार्वजनिक जवाब अभी सामने नहीं आया है।
शेयर बाजार में लिस्टिंग का सवाल भी
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार झगड़ा सिर्फ एक नियुक्ति तक सीमित नहीं है। टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव पर भी दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। नोएल टाटा इसका विरोध कर रहे हैं, उनका तर्क है कि लिस्टिंग से टाटा ट्रस्ट्स का परोपकारी मकसद कमजोर हो सकता है और समूह बाजार के उतार-चढ़ाव में फंस सकता है। वहीं टाटा संस का बोर्ड बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के हिसाब से लिस्टिंग के पक्ष में बताया गया है। अखबार के मुताबिक अभी तक किसी पक्ष ने दूसरे के खिलाफ मुकदमा दायर नहीं किया है।
राजनीति में यह मुद्दा क्यों अहम है
राहुल गांधी लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि मोदी सरकार कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाती है। अब उन्होंने एक ऐसे समूह का नाम लिया है जिसकी छवि आम लोगों में भरोसे और परोपकार से जुड़ी है। इसलिए यह बयान कारोबार की खबर को सीधे राजनीतिक बहस में ले आता है।
दूसरी तरफ, सवाल यह भी है कि यह दो पक्षों के बीच कॉर्पोरेट गवर्नेंस का विवाद है, जिसमें सरकार की कोई भूमिका सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। राहुल गांधी ने यह नहीं बताया कि उनके आरोप का आधार क्या है। भाजपा अक्सर उनके ऐसे बयानों को उद्योग और निवेश के माहौल के खिलाफ बताती रही है, लेकिन इस खास बयान पर भाजपा या सरकार का जवाब अभी आना बाकी है। जवाब आने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
आगे क्या हो सकता है
नोएल टाटा ने दस्तावेजों के लिए सात दिन की मोहलत दी है, इसलिए अगले कुछ दिनों में टाटा संस का जवाब अहम होगा। अगर दस्तावेज नहीं मिलते तो मामला कानूनी रास्ते पर जा सकता है, हालांकि अभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। राजनीतिक मोर्चे पर देखना होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद या अपने अभियानों में उठाती है या नहीं, और सरकार या भाजपा इस आरोप का कैसे जवाब देती है।
टाटा समूह की कंपनियों में करोड़ों छोटे निवेशकों का पैसा लगा है और लाखों लोग इनमें काम करते हैं। इसलिए नेतृत्व को लेकर यह खींचतान जितनी लंबी चलेगी, उतना ही इसका असर कंपनियों के शेयरों और निवेशकों के भरोसे पर दिख सकता है।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: The Hindu, Times of India, ThePrint हिंदी (भाषा), IANS, Asianet Newsable (ANI)।

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