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‘25 साल तक कांग्रेस नहीं लौटेगी’: अरुण साव के ‘रिजेक्टेड प्रोडक्ट’ वाले बयान पर बैज और सिंहदेव का पलटवार

अमित शाह के ‘30 साल’ वाले दावे के बाद छत्तीसगढ़ में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि कांग्रेस 25 साल तक सत्ता में नहीं लौटेगी और उसके नेता ‘रिजेक्टेड प्रोडक्ट’ हैं। जवाब में दीपक बैज ने भाजपा नेताओं को सत्ता के नशे में बताया और टीएस सिंहदेव ने सब्र रखने की नसीहत दी।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव और टीएस सिंहदेव की तस्वीरें, बीच में VS और 25 साल तक नहीं लौटेगी कांग्रेस शीर्षक
फोटो: अरुण साव, प्रधानमंत्री कार्यालय / Wikimedia Commons (GODL-India); टीएस सिंहदेव, VishuN / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

मुख्य बातें

  • साव ने ठीक-ठीक क्या कहा
  • कांग्रेस का जवाब: ‘सत्ता का नशा’ और ‘दो साल में चुनाव’
  • यह जुमला कहां से आया
  • आंकड़े क्या कहते हैं

राष्ट्रीय राजनीति में जो जुमला गढ़ा जाता है, वह कुछ ही घंटों में राज्यों तक पहुंच जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ कहा, गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के अगले 30 साल सत्ता से बाहर रहने का दावा किया, और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इसी लाइन को प्रदेश के हिसाब से ढाल दिया। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अगले 25 साल तक सत्ता में नहीं लौटेगी, क्योंकि प्रदेश कांग्रेस में अब सिर्फ ‘रिजेक्टेड प्रोडक्ट’ बचे हैं।

बयान जितना तीखा था, जवाब भी उतनी ही तेज़ी से आया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा नेताओं को ‘सत्ता के नशे’ में बताया, और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भाजपा को सब्र रखने की सलाह दी। यह रिपोर्ट बताती है कि किसने क्या कहा, यह बहस अभी क्यों उठी, और आंकड़े किसके दावे के कितने करीब हैं।

साव ने ठीक-ठीक क्या कहा

हरिभूमि के मुताबिक साव ने प्रधानमंत्री के ‘फेल प्रोडक्ट को बार-बार लॉन्च करने’ वाले बयान का ज़िक्र करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भी अब सभी ‘रिजेक्टेड प्रोडक्ट’ हो चुके हैं। अमर उजाला ने इसी बात को ‘रिजेक्टेड माल’ शब्द के साथ छापा। दोनों रिपोर्टों में साव के बयान के ये हिस्से दर्ज हैं:

  • कांग्रेस अपने मौजूदा नेताओं के नेतृत्व में लगातार चुनाव हार रही है और अगले 25 साल तक सत्ता में वापसी नहीं कर पाएगी।
  • पार्टी के पास कोई नया नेतृत्व या ‘प्रोडक्ट’ नहीं बचा, जिसे वह दोबारा जनता के सामने रख सके।
  • कांग्रेस खुद रुकी हुई और ठहरी हुई पार्टी है, उसे रोकने के लिए अलग से कोशिश की ज़रूरत नहीं।
  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सिर्फ मीडिया में बयानबाज़ी करने वाले नेता हैं।
  • पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पार्टी की अंदरूनी कलह की वजह से दूसरे राज्य भेजा गया है।

साव ने उस आरोप पर भी जवाब दिया, जिसमें कांग्रेस कह रही थी कि दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए उसे ट्रेनों में कोच नहीं मिल रहे। साव के मुताबिक कांग्रेस मीडिया में बने रहने के लिए ऐसे आरोप लगा रही है। कोच वाले आरोप का पूरा ब्योरा, यानी किसने, किस ट्रेन के लिए और कितने कोच मांगे थे, उपलब्ध रिपोर्टों में साफ नहीं है।

कांग्रेस का जवाब: ‘सत्ता का नशा’ और ‘दो साल में चुनाव’

IBC24 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पलटवार में कहा कि भाजपा नेता सत्ता के नशे में हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का जवाब अपेक्षाकृत नपा-तुला था। उन्होंने भाजपा नेताओं को सब्र रखने की नसीहत दी और कहा कि दो साल में चुनाव हैं; अगर चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष हुए, तो जनता भाजपा को जवाब दे देगी।

सिंहदेव के जवाब में ‘अगर पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव हुए’ वाली शर्त अहम है। यह सीधे उस बहस से जुड़ती है जो इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश भर में चल रही है। यानी कांग्रेस का जवाब सिर्फ ‘हम लौटेंगे’ नहीं है, बल्कि यह भी है कि चुनावी प्रक्रिया पर उसे भरोसा नहीं रह गया। भूपेश बघेल को ‘दूसरे राज्य भेजने’ वाले साव के दावे पर बघेल या पार्टी की ओर से अलग से कोई प्रतिक्रिया हमें उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली; इस पर जवाब का इंतज़ार है।

यह जुमला कहां से आया

इस बयानबाज़ी की जड़ दिल्ली में है। प्रधानमंत्री के ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ वाले तंज और अमित शाह के ‘अगले 30 साल आपका नंबर नहीं’ वाले दावे के बाद भाजपा के राज्य स्तर के नेता इसी लाइन को अपने-अपने प्रदेश में दोहरा रहे हैं। IBC24 ने अपनी रिपोर्ट में शाह के दावे को 2014 से 2044 तक की अवधि के रूप में बताया है। साव ने इसमें छत्तीसगढ़ के लिए 25 साल का आंकड़ा जोड़ा।

राजनीतिक संदेश के लिहाज़ से यह एक सोची-समझी रणनीति लगती है: विपक्ष के ‘वोट चोरी’ वाले आरोपों के जवाब में भाजपा यह कहानी गढ़ रही है कि कांग्रेस हार इसलिए रही है क्योंकि उसके पास चेहरे और नेतृत्व नहीं हैं, न कि चुनावी प्रक्रिया की किसी खामी की वजह से।

आंकड़े क्या कहते हैं

दावे बड़े हैं, इसलिए पिछले तीन साल के नतीजों को देखना ज़रूरी है:

  • 2023 विधानसभा चुनाव: 90 सीटों में भाजपा को 54, कांग्रेस को 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी को 1 सीट मिली। कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर के मुताबिक दोनों दलों के बीच वोटों का अंतर 6,32,382 (करीब 4.04%) था।
  • 2024 लोकसभा चुनाव: राज्य की 11 में से 10 सीटें भाजपा ने जीतीं, कांग्रेस के खाते में सिर्फ कोरबा आया।
  • 2025 नगरीय निकाय चुनाव: सभी 10 नगर निगमों में महापौर पद भाजपा के खाते में गए।

यानी पिछले तीन बड़े चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है, और साव का आत्मविश्वास इसी पर टिका है। लेकिन 2023 में वोटों का अंतर करीब 4 प्रतिशत था, जो बहुत बड़ा नहीं है। यही वजह है कि कांग्रेस SIR में करीब 25 लाख नाम कटने के मुद्दे को इतना ज़ोर से उठा रही है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अकबर ने तर्क दिया था कि हटाए गए नाम 2023 के जीत के अंतर से लगभग चार गुना हैं। भाजपा इसे हार छिपाने का बहाना बताती है। इस पर दोनों दलों की सड़क की लड़ाई पहले से जारी है।

25 साल की भविष्यवाणी कितनी टिकाऊ

छत्तीसगढ़ का अपना इतिहास बताता है कि ऐसी भविष्यवाणियां कितनी जल्दी पलट सकती हैं। भाजपा ने 2003 से 2018 तक लगातार 15 साल राज किया, और तब भी कई नेता लंबे समय तक सत्ता में रहने का दावा करते थे। 2018 में कांग्रेस ने 68 सीटें जीतकर वह सिलसिला तोड़ा, और पांच साल बाद 2023 में भाजपा फिर लौट आई। यानी पिछले दो दशकों में मतदाता ने दोनों दलों को बड़ा जनादेश भी दिया है और झटका भी।

कांग्रेस के लिए असली सवाल साव का बयान नहीं, बल्कि उसमें छिपा तंज है: नेतृत्व। 2023 की हार के बाद से प्रदेश कांग्रेस में गुटबाज़ी की खबरें लगातार आती रही हैं, और भूपेश बघेल राष्ट्रीय भूमिका में दूसरे राज्य की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं। भाजपा इसी को निशाना बना रही है। दूसरी ओर, भाजपा के लिए जोखिम यह है कि सत्ता के तीसरे साल में ऐसे बड़े दावे ‘अहंकार’ की कहानी को हवा दे सकते हैं, जिसे बैज ‘सत्ता का नशा’ कहकर पहले ही भुनाने लगे हैं।

आगे क्या देखना है

अगला विधानसभा चुनाव 2028 के अंत में होना है, यानी सिंहदेव की ‘दो साल’ वाली बात तारीख के हिसाब से सही है। तब तक दोनों दलों के पास अपने-अपने दावे साबित करने के कई मौके होंगे: धान खरीदी और किसानों के बकाया का मुद्दा, SIR पर चल रही कानूनी और सड़क की लड़ाई, और 1 नवंबर को दिल्ली में INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली, जिसमें छत्तीसगढ़ कांग्रेस अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेगी। ट्रेन कोच वाला विवाद भी उसी रैली से जुड़ा है। बयानों की इस जंग में असली फैसला वोटर ही करेगा, और 25 साल की भविष्यवाणी से ज़्यादा अहम यह है कि अगले दो साल में कौन ज़मीन पर क्या करता है।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: अमर उजाला, हरिभूमि, IBC24, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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