ब्रेकिंग
राजनीतिताज़ा

DMF मामले में ED ने 31.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क की, 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक शिकायत दाखिल

ED ने छत्तीसगढ़ के DMF फंड मामले में 31.70 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की और रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। एजेंसी 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूली का आरोप लगाती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लोगो के साथ छत्तीसगढ़ DMF मामले में संपत्ति कुर्की पर ग्राफिक
Logo: Directorate of Enforcement (enforcementdirectorate.gov.in). ग्राफिक: timetrolls.in

मुख्य बातें

  • शिकायत में किसके नाम, और ED का दावा क्या है
  • कमीशन का कथित तरीका: 25 से 50 प्रतिशत तक
  • DMF फंड है क्या, और यह मामला इतना अहम क्यों

छत्तीसगढ़ के चर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) फंड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और कदम उठाया है। एजेंसी के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने करीब 31.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अस्थायी रूप से कुर्क की हैं। इसके साथ ही रायपुर की विशेष PMLA अदालत में 17 आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत, यानी आम बोलचाल में पूरक चार्जशीट, दाखिल की गई है। ED के मुताबिक कुर्की का अस्थायी आदेश 29 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ और शिकायत 30 अक्टूबर को अदालत में पेश की गई। एजेंसी के बयान की जानकारी शनिवार, 31 अक्टूबर को सामने आई और रविवार सुबह राज्य के लगभग सभी बड़े अखबारों में यह खबर प्रमुखता से छपी।

यह मामला तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल (2018-2023) से जुड़ा बताया जाता है, इसलिए इसकी गूंज सिर्फ जांच एजेंसी के दफ्तर तक सीमित नहीं है। ध्यान रहे कि यह कार्रवाई ऐसे दिन चर्चा में आई है, जब प्रदेश राज्य स्थापना दिवस मना रहा है और कांग्रेस के बड़े नेता दिल्ली में INDIA गठबंधन की रैली में शामिल होने गए हैं।

शिकायत में किसके नाम, और ED का दावा क्या है

ED की पूरक शिकायत में कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा (कुछ रिपोर्टों में चाबड़ा) और मंदीप चावला समेत कुल 17 लोगों के नाम हैं। दैनिक भास्कर के अनुसार इनमें 16 नए आरोपी बनाए गए हैं। एजेंसी ने छाबड़ा को इस कथित सिंडिकेट के मुख्य बिचौलियों और वित्तीय समन्वयकों में से एक बताया है। ED का आरोप है कि उसने चुनिंदा वेंडरों को सप्लाई के काम दिलाने, उनके पक्ष में परचेज ऑर्डर जारी कराने, भुगतान निकलवाने और कमीशन इकट्ठा कर आगे बांटने में भूमिका निभाई। छाबड़ा को ED ने 1 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था।

एजेंसी ने इस कार्रवाई से जुड़े आरोपियों की अपराध से अर्जित कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) करीब 35 करोड़ रुपये आंकी है, जिसके बदले 31.70 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई है। नईदुनिया के मुताबिक कुर्क संपत्तियों में जमीन, मकान, बैंक खातों में जमा राशि और दूसरे निवेश शामिल हैं। ED के अनुसार इस पूरे मामले में अब तक करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क हो चुकी है और IAS अधिकारी रानू साहू समेत चार लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

ये सभी आरोप जांच एजेंसी के हैं। अदालत में इन पर अभी सुनवाई होनी है और किसी भी आरोपी का दोष साबित नहीं हुआ है। PMLA के तहत अस्थायी कुर्की का आदेश बाद में न्यायनिर्णयन प्राधिकरण (एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी) के सामने पुष्टि के लिए जाता है।

कमीशन का कथित तरीका: 25 से 50 प्रतिशत तक

ED के बयान के मुताबिक, जैसा India Today ने PTI के हवाले से छापा, सरकारी कर्मचारियों और एजेंटों के एक संगठित समूह ने DMF फंड के आवंटन में हेरफेर की। ऐसे कामों को तरजीह दी गई जिनमें सामान की सप्लाई होनी थी और खरीद की कीमत बढ़ाकर दिखाई गई। एजेंसी का दावा है कि रेट कॉन्ट्रैक्ट वाली कंपनियों को जारी परचेज ऑर्डर की मूल कीमत का 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूला गया।

  • कमीशन कथित रूप से नकद और बैंक खातों, दोनों रास्तों से लिया गया।
  • पैसे का स्रोत छिपाने के लिए उसे कई संस्थाओं और खातों से घुमाया गया, ED ऐसा आरोप लगाती है।
  • कमीशन का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली लोगों तक पहुंचा, जिसके बदले काम का आवंटन, परचेज ऑर्डर और भुगतान आसानी से होता रहा।
  • जांच में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम (बीज निगम) के जरिए हुई ऐसी खरीद में भी इसी तरह के कमीशन की बात सामने आई है, जिनमें DMF के अलावा दूसरे सरकारी फंड लगे थे।

ED का कहना है कि जांच अभी जारी है और दूसरे सरकारी कर्मचारियों और एजेंटों की भूमिका भी देखी जा रही है।

DMF फंड है क्या, और यह मामला इतना अहम क्यों

जिला खनिज न्यास या DMF हर खनिज वाले जिले में बना एक ट्रस्ट है। खनन कंपनियां इसमें अंशदान देती हैं, और यह पैसा खदानों से प्रभावित इलाकों और वहां रहने वाले लोगों, ज्यादातर आदिवासी और ग्रामीण परिवारों, की सेहत, पानी, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर खर्च होना होता है। कोरबा, दंतेवाड़ा, रायगढ़ जैसे जिलों में यह फंड सैकड़ों करोड़ का होता है। इसलिए इसमें गड़बड़ी के आरोप सीधे उन्हीं लोगों के हक से जुड़ जाते हैं, जिनकी जमीन और जंगल खनन की वजह से प्रभावित हुए।

रिपोर्टों में इस पूरे मामले को करीब 575 करोड़ रुपये का बताया गया है। CNBC TV18 के मुताबिक जांचकर्ताओं का आरोप है कि DMF खर्च के नियम बदलकर सामग्री सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरण जैसी नई श्रेणियां जोड़ी गईं, ताकि ज्यादा कमीशन वाले काम मंजूर हो सकें। ED ने सितंबर 2025 में 18 ठिकानों और जून 2026 में नौ ठिकानों पर छापे मारे थे।

EOW की चार्जशीट से शुरू हुई कड़ी

इस मामले में राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (EOW-ACB) ने जनवरी 2024 में FIR दर्ज की थी, जो ED की एक रिपोर्ट के आधार पर हुई थी। Hindustan Times के मुताबिक मई 2025 में EOW ने कोरबा DMF मामले में करीब 6,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कोरबा की तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू, तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया और आदिवासी विकास विभाग की सहायक आयुक्त माया वारियर समेत कई नाम थे। EOW ने आरोप लगाया था कि वेंडर योग्यता के बजाय रिश्वत देने की तैयारी के आधार पर चुने गए। ED ने बाद में इन्हीं FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच आगे बढ़ाई, जिसमें कांकेर जिले में दर्ज एक FIR भी जोड़ी गई, जैसा अमर उजाला ने बताया है।

यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ हफ्तों में ED और EOW ने कई अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की है। 30 अक्टूबर को रायपुर समेत कई जगह हुई छापेमारी पर हमारी पिछली रिपोर्ट यहां पढ़ी जा सकती है। DMF मामला उससे अलग है।

राजनीतिक पक्ष और जवाब

DMF मामला पहले भी सियासी बहस का मुद्दा बन चुका है। जून 2025 में जब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने इस पर सोशल मीडिया पोस्ट किया था, तब उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने The Rural Press की रिपोर्ट के मुताबिक कहा था कि “यह घोटाला भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था”। कांग्रेस इससे पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को राजनीति से प्रेरित बताती रही है।

ताजा कुर्की और पूरक शिकायत पर कांग्रेस, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल या नामजद आरोपियों की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया हमें किसी रिपोर्ट में नहीं मिली है। उनके जवाब का इंतज़ार है; जवाब आने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

आगे क्या होगा

विशेष PMLA अदालत अब पूरक शिकायत पर संज्ञान लेने के सवाल पर विचार करेगी। कुर्क संपत्तियों पर अंतिम फैसला न्यायनिर्णयन प्राधिकरण के सामने होगा, जहां आरोपी अपना पक्ष रख सकते हैं। ED ने संकेत दिया है कि जांच में और नाम जुड़ सकते हैं। खनन प्रभावित जिलों के लोगों के लिए असली सवाल यही रहेगा कि उनके हिस्से का फंड आगे पारदर्शी तरीके से खर्च हो।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: दैनिक भास्कर, अमर उजाला, नईदुनिया, India Today (PTI), Hindustan Times, CNBC TV18, The Rural Press।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी TimeTrolls के संस्थापक और संपादक हैं। वे B.Tech (मैकेनिकल) और MBA (ऑपरेशंस) हैं और 4+ साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। TimeTrolls पर वे देश, खेल, टेक और रोज़गार से जुड़ी खबरें तथ्यों की जांच के बाद सरल हिंदी में प्रकाशित करते हैं।

अगली खबर › खड़गे ने विपक्ष के ‘जन महाभियोग’ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए 6 आरोप, भाजपा ने बताया संसद का मज़ाक

सबसे ज़्यादा पढ़ी गई

और विषय पढ़ें

टिप्पणियाँ

अपनी राय दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

WhatsApp पर शेयर करें
Exit mobile version