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छत्तीसगढ़ में ED और EOW ने कई जिलों में एक साथ छापे मारे, रायपुर में अनवर ढेबर के घर पहुंची ED टीम

छत्तीसगढ़ में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय और राज्य की EOW-ACB ने कई जिलों में एक साथ कार्रवाई की। रायपुर के बैरन बाजार में शराब घोटाले के आरोपी अनवर ढेबर के घर ED टीम पहुंची, जबकि राजनांदगांव, नवापारा-राजिम और रायपुर में कारोबारियों के ठिकानों पर EOW ने दस्तावेज खंगाले।

छत्तीसगढ़ में ED और EOW की छापेमारी, ग्राफिक
ED और EOW की कई जिलों में कार्रवाई (ग्राफिक: timetrolls.in)

मुख्य बातें

  • रायपुर में कहां-कहां पहुंची टीमें
  • राजनांदगांव और नवापारा-राजिम में भी दबिश
  • अब तक क्या मिला, क्या नहीं पता
  • चार दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई

दिवाली से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियां एक साथ सक्रिय दिखीं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य के आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो व एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) की टीमों ने रायपुर, राजनांदगांव, बिलासपुर और नवापारा-राजिम में कई ठिकानों पर दबिश दी। IBC24 के मुताबिक टीमें सुबह करीब 6 बजे से ही अलग-अलग जगह पहुंचनी शुरू हो गई थीं।

सबसे ज्यादा चर्चा राजधानी रायपुर के बैरन बाजार की है, जहां ED की टीम अनवर ढेबर के घर पहुंची। अनवर ढेबर चर्चित शराब घोटाले के आरोपी हैं और रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर के भाई हैं। एक ही सुबह में कई शहरों में कार्रवाई होने से प्रदेश के राजनीतिक और कारोबारी हलकों में हलचल है, हालांकि जांच एजेंसियों ने खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

रायपुर में कहां-कहां पहुंची टीमें

लल्लूराम और जनता से रिश्ता की रिपोर्ट के अनुसार रायपुर में ED तीन से चार अलग-अलग ठिकानों पर जांच कर रही है। अनवर ढेबर के घर के बाहर सुरक्षा के लिए जवान तैनात किए गए और अंदर अधिकारी दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगालते रहे। नईदुनिया और IBC24 के मुताबिक यह कार्रवाई CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) और कोल लेवी से जुड़े मामलों में हो रही है, जबकि कुछ रिपोर्टों में ढेबर को शराब घोटाला और कोल लेवी, दोनों मामलों का आरोपी बताया गया है। किस छापे का संबंध किस केस से है, यह एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही साफ होगा।

इसी दौरान राज्य की EOW-ACB ने भी रायपुर में अलग कार्रवाई की। नईदुनिया और IBC24 के लाइव अपडेट के अनुसार:

  • वीआईपी स्टेट इलाके में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े सुदर्शन शर्मा के घर EOW-ACB की टीम शराब घोटाले की जांच के सिलसिले में पहुंची।
  • अवंती विहार इलाके में प्रॉपर्टी डीलर विनोद धानेचा के ठिकाने पर भी दबिश दी गई।
  • टीमें लेनदेन, संपत्ति और डिजिटल डिवाइस से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।

राजनांदगांव और नवापारा-राजिम में भी दबिश

राजनांदगांव में EOW की टीम सुबह करीब 7 बजे दो गाड़ियों में लगभग 10 अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के साथ पहुंची। नईदुनिया के मुताबिक पहला ठिकाना सनसिटी में कारोबारी वैभव गोलछा का निवास और दूसरा लाल बाग इलाके में कारोबारी जय बग्गा का ठिकाना है। IBC24 ने वैभव गोलछा को रेत खनन कारोबार से जुड़ा बताया है।

नईदुनिया की रिपोर्ट में जांच अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि यह कार्रवाई शराब घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी है, और दोनों कारोबारी पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के करीबी और उनसे कारोबारी संबंध रखने वाले बताए जा रहे हैं। यह फिलहाल जांच एजेंसी की ओर से बताया गया संबंध है, जिस पर कारोबारियों या लखमा की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

उधर नवापारा और राजिम में EOW-ACB ने सोना-चांदी और कपड़ा कारोबारी विमल पारख और राजा पारख के ठिकानों पर कार्रवाई की। IBC24 के अनुसार शांति विजय और नवकार ज्वेलर्स में जांच चल रही है और यह मामला कोल लेवी घोटाले से जुड़ा बताया गया है। जनता से रिश्ता ने बिलासपुर में भी टीमें पहुंचने की जानकारी दी है।

अब तक क्या मिला, क्या नहीं पता

IBC24 ने साफ लिखा है कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस कार्रवाई में कौन-से दस्तावेज या सामग्री मिली है। कुछ पोर्टलों ने सूत्रों के हवाले से अहम दस्तावेज और संदिग्ध लेनदेन के सबूत हाथ लगने का दावा किया है, लेकिन ED या EOW की ओर से न तो किसी जब्ती की आधिकारिक पुष्टि हुई है और न ही किसी गिरफ्तारी की खबर है। इसलिए इस वक्त इसे तलाशी और दस्तावेज जांच की कार्रवाई के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

चार दिन में दूसरी बड़ी कार्रवाई

यह छापेमारी अलग-थलग नहीं है। 27 अक्टूबर को ED ने रायपुर में ज्वेलरी कारोबारी नितिन डागा और दुर्ग में ट्रांसपोर्ट कारोबारी गुलशन बघेल के ठिकानों पर तलाशी ली थी, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट timetrolls.in पर प्रकाशित हुई थी। द हितवाद की रिपोर्ट के मुताबिक उस कार्रवाई में नकदी तो नहीं मिली, लेकिन मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त किए गए। अखबार ने ED के एक वरिष्ठ सूत्र के हवाले से लिखा कि जिनके यहां तलाशी हुई, उनकी भूमिका शराब सिंडिकेट के कुछ प्रभावशाली सदस्यों के लिए बिचौलियों जैसी थी।

ऐसे में शुक्रवार की कार्रवाई को उसी जांच की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि इस बार टीम उन अनवर ढेबर के घर पहुंची है, जो इस जांच में पहले गिरफ्तार हो चुके आरोपियों में शामिल हैं।

शराब घोटाले की जांच अब तक कहां पहुंची

ED के अनुसार यह कथित घोटाला करीब 3,200 करोड़ रुपये का है और पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में चले शराब सिंडिकेट से जुड़ा है। द हितवाद की रिपोर्ट में इस जांच के कुछ अहम पड़ाव गिनाए गए हैं:

  • 9 अक्टूबर को ED ने प्रदेश कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। ED का आरोप है कि करीब 860 से 880 करोड़ रुपये रायपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन तक पहुंचे।
  • ED के मुताबिक अब तक कुल कुर्की, जब्ती और फ्रीज की गई संपत्ति लगभग 610 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
  • इस जांच में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व IAS अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और CSMCL के पूर्व MD अरुण पति त्रिपाठी गिरफ्तार हो चुके हैं।
  • 14 अक्टूबर को EOW-ACB ने 20 लोगों और 22 फर्मों के खिलाफ करीब 27 हजार पन्नों का दसवां पूरक चालान पेश किया।

ये सभी आरोप जांच एजेंसियों के हैं और अदालत में इनकी परख अभी बाकी है। कांग्रेस इन कार्रवाइयों का विरोध करती रही है। रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने रायपुर में ED दफ्तर का घेराव भी किया था।

सियासी टाइमिंग पर नजर

यह कार्रवाई ऐसे दिन हुई है जब प्रदेश की राजनीति पहले से गर्म है। अमर उजाला के मुताबिक आज ही केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा दुर्ग में भाजपा के “लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ” अभियान की सभा और पदयात्रा में शामिल होने वाले हैं, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान की “वोट बचाओ, देश बचाओ” रैली के लिए रवाना हो रहे हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन चुनावी मुद्दों पर आमने-सामने खड़े दोनों दलों के बीच यह मामला बयानबाजी को और तेज कर सकता है।

शुक्रवार की छापेमारी पर अनवर ढेबर, संबंधित कारोबारियों या कांग्रेस संगठन की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जवाब का इंतज़ार है। इसी तरह ED और EOW की ओर से भी कार्रवाई के नतीजों पर आधिकारिक जानकारी का इंतज़ार है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर

  • तलाशी खत्म होने के बाद ED और EOW क्या आधिकारिक जानकारी जारी करती हैं और क्या कोई जब्ती या पूछताछ होती है।
  • CGMSC, कोल लेवी और शराब घोटाला, तीनों में से किस मामले में किस ठिकाने की तलाशी हुई, इसकी पुष्टि।
  • कांग्रेस और भाजपा की प्रतिक्रियाएं, खासकर तब जब दोनों दल 30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच बड़े राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे हैं।

वीडियो स्रोत: Zee Madhya Pradesh Chhattisgarh (YouTube) | मूल वीडियो देखें

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: IBC24, IBC24 लाइव, नईदुनिया, लल्लूराम, जनता से रिश्ता, जनता से रिश्ता, द हितवाद, अमर उजाला, तरुण मित्र।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी TimeTrolls के संस्थापक और संपादक हैं। वे B.Tech (मैकेनिकल) और MBA (ऑपरेशंस) हैं और 4+ साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। TimeTrolls पर वे देश, खेल, टेक और रोज़गार से जुड़ी खबरें तथ्यों की जांच के बाद सरल हिंदी में प्रकाशित करते हैं।

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