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India New Zealand FTA लागू: 100% भारतीय सामान ड्यूटी-फ्री

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता आज विजयादशमी से लागू हो गया। न्यूजीलैंड ने भारतीय सामान की सभी टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी हटाई, कपड़ा-चमड़ा पर 10% और दवाओं पर 5% तक की ड्यूटी अब शून्य।

India New Zealand FTA: ऑकलैंड में पीएम नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन हाथ मिलाते हुए
11 जुलाई 2026: ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन। फोटो: PMO / PIB, भारत सरकार (GODL-India)

मुख्य बातें

  • India New Zealand FTA 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) से लागू
  • न्यूजीलैंड में 100% भारतीय टैरिफ लाइनों पर जीरो ड्यूटी
  • कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर पर 10% तक और दवाओं-खेती उत्पादों पर 5% तक की ड्यूटी खत्म
  • अप्रैल 2026 को भारत मंडपम में हुआ था साइन
  • में दोनों देशों का व्यापार 1.3 अरब डॉलर, डेयरी-चीनी जैसे संवेदनशील उत्पाद छूट से बाहर

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: India New Zealand FTA (भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता) आज विजयादशमी के दिन से लागू हो गया है। इसके साथ ही न्यूजीलैंड जाने वाले 100% भारतीय सामान पर अब कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। कपड़ा, चमड़ा, जूते, दवाएं और खेती से जुड़े उत्पाद अब बिना टैक्स के न्यूजीलैंड के बाजार में बिक सकेंगे।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को PIB की प्रेस रिलीज में बताया कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की। सरकार ने 20 अक्टूबर की तारीख इसलिए चुनी, क्योंकि विजयादशमी को जीत और नई शुरुआत का दिन माना जाता है।

India New Zealand FTA: किस सामान पर कितनी ड्यूटी हटी

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के अपर महानिदेशक संपत कुमार ने हैदराबाद में समाचार एजेंसी ANI से कहा कि India New Zealand FTA की सबसे खास बात यह है कि 100% टैरिफ लाइनें यानी सामान की सभी श्रेणियां पहले ही दिन से जीरो ड्यूटी पर आ जाएंगी।

उनके मुताबिक अब तक कपड़ा और रेडीमेड कपड़ों, चमड़े और फुटवियर पर न्यूजीलैंड में अधिकतम 10% तक ड्यूटी लगती थी, जो अब शून्य हो गई है। वहीं दवाओं, खेती और समुद्री उत्पादों, प्लास्टिक, केमिकल और इलेक्ट्रिकल सामान पर 5% तक की ड्यूटी भी खत्म कर दी गई है।

सेक्टरपहले न्यूजीलैंड में ड्यूटी20 अक्टूबर 2026 से
कपड़ा और रेडीमेड कपड़े10% तक0%
चमड़ा और फुटवियर10% तक0%
दवाएं (फार्मा)5% तक0%
खेती और समुद्री उत्पाद5% तक0%
प्लास्टिक, केमिकल, इलेक्ट्रिकल सामान5% तक0%

स्रोत: DGFT अधिकारी का ANI को बयान और PIB, 19 अक्टूबर 2026।

PIB के मुताबिक India New Zealand FTA से रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स, प्रोसेस्ड फूड और कृषि उत्पादों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोल और धातु के स्क्रैप जैसे कच्चे माल पर भी ड्यूटी नहीं लगेगी। इससे भारत के छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) की लागत घट सकती है।

27 अप्रैल को हुआ था India New Zealand FTA पर साइन

यह समझौता 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में साइन हुआ था। पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले ने इस पर हस्ताक्षर किए थे (PIB, 27 अप्रैल 2026)। इसके बाद दोनों देशों में अंदरूनी प्रक्रिया पूरी की गई। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर 2026 को इससे जुड़ा कानून पास किया और 21 सितंबर को लागू होने की तारीख घोषित की गई (PIB, 21 सितंबर 2026)।

जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूजीलैंड गए थे। सरकार के मुताबिक यह चार दशक में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी। इस दौरे में दोनों देशों ने 2030 तक सामान और सेवाओं का आपसी व्यापार दोगुना करके 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (करीब ₹35,000 करोड़) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। India New Zealand FTA को इस लक्ष्य की बड़ी सीढ़ी माना जा रहा है।

11 जुलाई 2026: ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन। फोटो: PMO / PIB, भारत सरकार (GODL-India), via Wikimedia Commons

India New Zealand FTA से पहले कितना व्यापार होता था

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच सामान का कुल व्यापार 1.3 अरब डॉलर रहा। यह पिछले वित्त वर्ष से 49% ज़्यादा था। इस दौरान भारत ने न्यूजीलैंड को 71.1 करोड़ डॉलर (711 मिलियन डॉलर) का सामान बेचा।

सितंबर की PIB रिलीज में 2025-26 के लिए यह व्यापार करीब 1.1 अरब डॉलर बताया गया है। यानी आकार के हिसाब से यह व्यापार अभी छोटा है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि India New Zealand FTA की जीरो ड्यूटी से इसमें तेज़ी आएगी। DGFT अधिकारी संपत कुमार ने कहा कि इस FTA से न्यूजीलैंड के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस और बढ़ेगा।

India New Zealand FTA पर गोयल और मैक्ले ने क्या कहा

पीयूष गोयल ने कहा, “हमारी साझेदारी मैदान पर भी जीतने वाली है और मैदान के बाहर भी।” उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के बाजार में 100% ड्यूटी-फ्री पहुंच से भारतीय निर्यातकों, खासकर MSME, कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए बड़े मौके खुलेंगे। (PIB के अंग्रेज़ी बयान का हिंदी अनुवाद)

टॉड मैक्ले ने इसे दोनों देशों के रिश्तों का “वॉटरशेड मोमेंट” यानी ऐतिहासिक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय सामान अब न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री जा सकेंगे, जिससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के दूसरे FTA साझेदारों के बराबर मौका मिलेगा।

India New Zealand FTA लागू होने से एक दिन पहले, 19 अक्टूबर को गोयल ने भारत से न्यूजीलैंड जाने वाली पहली JCB मशीन को हरी झंडी दिखाई। यह मशीन पुणे (महाराष्ट्र) में बनी है। PIB के मुताबिक 20 अक्टूबर को खेती, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग, खेल का सामान, फुटवियर और चमड़ा सेक्टर के कई उत्पादों की खेप भी रवाना करने की योजना है।

भारत ने अपने किसानों के लिए क्या बचाया

न्यूजीलैंड ने पहले दिन से अपनी सभी टैरिफ लाइनों पर ड्यूटी हटाई है, जबकि भारत ने करीब 70% टैरिफ लाइनों पर ही छूट दी है। सरकार के मुताबिक India New Zealand FTA में डेयरी, पशु मांस (भेड़ के मांस को छोड़कर), प्रमुख कृषि उत्पाद, चीनी और खाने के तेल को ड्यूटी में छूट से बाहर रखा गया है। न्यूजीलैंड कस्टम्स के मुताबिक भारत भेजे जाने वाले न्यूजीलैंड के मौजूदा निर्यात के 95% हिस्से पर टैरिफ घटेगा।

न्यूजीलैंड के सेब, कीवी और मनुका शहद को भारत में सीमित कोटा (टैरिफ रेट कोटा) के तहत ही छूट मिलेगी। इसमें न्यूनतम आयात मूल्य और मौसम के हिसाब से आयात की खिड़की की शर्त भी है, ताकि देश के किसानों को नुकसान न हो।

इसके साथ एक ‘कृषि उत्पादकता साझेदारी’ भी बनी है। इसके तहत कीवी के लिए नगालैंड के फुत्सेरो और उत्तराखंड के मगरा में पहले चरण की जगहें चुनी गई हैं। सेब के लिए हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में, और शहद के लिए उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का प्रस्ताव है।

दवा कंपनियों और सर्विस सेक्टर को क्या मिला

India New Zealand FTA में भारतीय दवा और मेडिकल डिवाइस कंपनियों के लिए एक बड़ा बदलाव यह है कि न्यूजीलैंड अब अमेरिका के US FDA, यूरोप की EMA, ब्रिटेन की MHRA और हेल्थ कनाडा जैसे भरोसेमंद रेगुलेटरों की जांच-मंजूरी को मान्यता देगा। इससे मंजूरी में लगने वाला लंबा इंतज़ार घट सकता है।

सर्विस सेक्टर में न्यूजीलैंड ने करीब 118 सेक्टरों में बाजार पहुंच और करीब 139 सब-सेक्टरों में मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा दिया है। PIB के मुताबिक पहली बार न्यूजीलैंड ने आयुर्वेद, योग और दूसरी आयुष पद्धतियों के लिए अलग से पहुंच दी है। न्यूजीलैंड ने भारत में 20 अरब डॉलर का निवेश लाने में मदद की प्रतिबद्धता भी जताई है।

India New Zealand FTA: छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए वीज़ा

  • कुशल भारतीयों के लिए 5,000 ‘टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री’ (TEE) वीज़ा का कोटा। इमिग्रेशन न्यूजीलैंड के मुताबिक ये वीज़ा 3 साल के लिए होंगे, एक समय में अधिकतम 5,000 लोग इन पर रह सकेंगे और इनसे स्थायी निवास (रेज़िडेंस) का रास्ता नहीं खुलता।
  • 18 से 30 साल के युवाओं के लिए हर साल 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीज़ा। इमिग्रेशन न्यूजीलैंड के मुताबिक यह स्कीम समझौता लागू होने के 2 साल के अंदर शुरू होगी।
  • भारतीय छात्रों की संख्या पर कोई सीमा नहीं। STEM ग्रेजुएट को पढ़ाई के बाद 3 साल तक और PhD वालों को 4 साल तक काम का अधिकार।
  • पढ़ाई के दौरान हफ्ते में कम से कम 20 घंटे काम करने की छूट की प्रतिबद्धता।

इसका मतलब यह नहीं कि वीज़ा अपने-आप मिल जाएगा। आवेदक को मान्यता प्राप्त नियोक्ता से नौकरी का ऑफर, ज़रूरी योग्यता, अंग्रेज़ी भाषा और स्वास्थ्य-चरित्र से जुड़ी शर्तें पूरी करनी होंगी। क्रिकेट फैंस के लिए भी यह हफ्ता न्यूजीलैंड वाला है: IND vs NZ टी20 सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू हो रही है।

नवी मुंबई का जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT), देश के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाहों में से एक। फोटो: Wikimedia Commons / Jaxer, CC BY 3.0

निर्यातक फायदा कैसे उठाएं

India New Zealand FTA का ड्यूटी-फ्री फायदा लेने के लिए सामान का ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ यानी मूल देश के नियमों पर खरा उतरना ज़रूरी होता है। इसके लिए निर्यातकों को सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन लेना होगा। समझौते की पूरी जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की फैक्टशीट और FAQ दस्तावेज में दी गई है। न्यूजीलैंड सरकार की ओर से जानकारी MFAT की वेबसाइट पर है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि अब असली काम इस मौके को लोगों के लिए असली फायदे में बदलना है। उनके मुताबिक मंत्रालय India New Zealand FTA की जानकारी को लेकर उद्योग और संगठनों के साथ मिलकर इसे देश के हर जिले तक पहुंचाने पर काम कर रहा है।

आगे क्या देखना होगा

India New Zealand FTA से बाजार तो खुल गया है, लेकिन असली असर इस बात से तय होगा कि भारतीय कंपनियां इसका कितना इस्तेमाल करती हैं। टॉड मैक्ले ने भी कहा कि India New Zealand FTA की सफलता इस बात से मापी जाएगी कि कारोबारी इसका कितना फायदा उठाते हैं। अगले कुछ महीनों के व्यापार आंकड़े बताएंगे कि जीरो ड्यूटी से निर्यात में कितनी बढ़त आई।

शेयर बाजार और कारोबार की दूसरी खबरों के लिए पढ़ें: शेयर बाजार में गिरावट: Nifty 22,900 के नीचे, बैंक शेयर टूटे।

आपकी राय: क्या जीरो ड्यूटी से भारत के कपड़ा और चमड़ा उद्योग को न्यूजीलैंड जैसे छोटे बाजार में बड़ा फायदा होगा? कमेंट में बताइए।

स्रोत

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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