भारतीय नौसेना ने अरब सागर में मुंबई से 3,000 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर एक बड़ा एंटी-पायरेसी ऑपरेशन पूरा किया है। सोमाली समुद्री डाकुओं के कब्जे में गए ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाज ‘अजिनी’ (Azini) को नौसेना ने 2 नवंबर 2026 को 48 घंटे से ज्यादा चले अभियान के बाद छुड़ा लिया। नौसेना के मुताबिक जहाज पर सवार सभी 20 क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और ऑपरेशन में किसी की जान नहीं गई, न कोई घायल हुआ।
इस ऑपरेशन में नौसेना का युद्धपोत INS कोलकाता, एक समुद्री टोही विमान, नौसेना के मरीन कमांडो (मार्कोस) और भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर विमान शामिल रहा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना और वायुसेना को इस कामयाबी पर बधाई दी है।

क्या हुआ था: सोमालिया के तट पर अगवा हुआ ‘अजिनी’
अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी मछली पकड़ने वाला जहाज अजिनी 29 अक्टूबर (गुरुवार) को उत्तर-पूर्वी सोमालिया के तटीय कस्बों बंदर बायला और हाफून के बीच अगवा किया गया था। अधिकारियों के हवाले से आई जानकारी के अनुसार करीब 12 हथियारबंद डाकू जहाज पर चढ़े थे। शुरुआती अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में जहाज पर 21 ईरानी क्रू सदस्य और दो सोमाली सुरक्षा गार्ड बताए गए थे, जबकि भारतीय नौसेना ने अपने बयान में 20 क्रू सदस्यों को सुरक्षित छुड़ाने की बात कही है।
यूरोपीय संघ के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर-हिंद महासागर (MSCIO) ने अगवा होने के बाद चेतावनी जारी की थी कि यह जहाज व्यापारिक जहाजों के रास्ते की ओर बढ़ रहा है। आशंका थी कि डाकू इसे ‘मदर शिप’ की तरह इस्तेमाल करेंगे, यानी समुद्र में दूर तक जाकर दूसरे मालवाहक जहाजों पर हमला करने के लिए एक तैरते अड्डे की तरह। यूरोपीय संघ की नौसैनिक फोर्स (EUNAVFOR ऑपरेशन अटलांटा) ने भी इस घटना की जांच शुरू की थी।
48 घंटे का ऑपरेशन कैसे चला
भारतीय नौसेना के बयान के अनुसार खतरे को देखते हुए इलाके में पहले से तैनात (मिशन-डिप्लॉयड) युद्धपोत को अजिनी तक पहुंचने का काम सौंपा गया। ऑपरेशन को चार हिस्सों में समझा जा सकता है:
- तलाश और निगरानी: युद्धपोत INS कोलकाता और समुद्री टोही विमान ने मिलकर लगातार निगरानी की और अजिनी की सटीक लोकेशन का पता लगाया।
- घेराबंदी: जहाज की हर हरकत पर नजर रखी गई और “नपे-तुले गैर-घातक (नॉन-काइनेटिक) उपायों” से उसकी आवाजाही रोकी गई, ताकि डाकू जहाज लेकर भाग न सकें। नौसेना ने इन उपायों का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है।
- आसमान से कमांडो: भारतीय वायुसेना के C-17 विमान से मरीन कमांडो (मार्कोस) को समुद्र में पैरा-ड्रॉप किया गया, जिससे मौके पर मौजूद टीम की ताकत बढ़ी।
- टैक्टिकल कार्रवाई: इसके बाद तेज और तालमेल वाली कार्रवाई में नौसेना ने जहाज को अपने नियंत्रण में लिया, डाकुओं के खतरे को खत्म किया और सभी 20 क्रू सदस्यों को सुरक्षित छुड़ाया।

नौसेना ने कहा, “यह सफल ऑपरेशन भारतीय नौसेना की उच्च परिचालन तैयारी और सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल के जरिए जटिल समुद्री सुरक्षा अभियान चलाने की क्षमता का प्रमाण है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ और ‘पसंदीदा सुरक्षा साझेदार’ बने रहने की भारत की प्रतिबद्धता को भी दिखाता है।”
राजनाथ सिंह ने क्या कहा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर ऑपरेशन की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए लिखा कि मुंबई से 3,000 किलोमीटर से ज्यादा दूर अरब सागर में भारी हथियारों से लैस डाकुओं से क्रू और जहाज को तेजी से ढूंढना, रोकना और सुरक्षित छुड़ाना, वह भी वायुसेना के समय पर मिले सहयोग के साथ, नौसेना की ऊंची परिचालन तैयारी और समुद्री खतरों का निर्णायक जवाब देने की क्षमता को दिखाता है।
उन्होंने लिखा, “हमारे बहादुर जवानों ने एक बार फिर जान बचाने, समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की भारत की क्षमता, इरादा और संकल्प दिखाया है। भारत ‘सुरक्षित समुद्र’ (SAFE SEAS) और एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद महासागर क्षेत्र के लिए दृढ़ता से खड़ा है।” भारतीय नौसेना के प्रवक्ता हैंडल @indiannavy ने भी रक्षा मंत्री की यह पोस्ट साझा की।

तस्वीरों में क्या दिखा
रक्षा मंत्री की साझा की गई एक तस्वीर में पीछे INS कोलकाता खड़ा दिख रहा है और अजिनी के डेक पर हथियारबंद कमांडो कुछ लोगों पर नजर रखे हुए हैं। दूसरी तस्वीर में जहाज के डेक पर जब्त हथियारों का बड़ा जखीरा कतार में रखा दिखता है, जिसमें राइफलें और मैगजीन शामिल हैं। वीडियो में हेलीकॉप्टर से ली गई तस्वीरों में मछली पकड़ने वाला जहाज, उसके पास नौसेना की छोटी नावें और दूर खड़ा युद्धपोत नजर आता है। डाकुओं पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी, इस पर नौसेना ने अपने बयान में अभी ब्योरा नहीं दिया है।
INS कोलकाता: पहले भी डाकुओं को झुका चुका है
INS कोलकाता नौसेना के कोलकाता श्रेणी के गाइडेड मिसाइल विध्वंसकों में पहला जहाज है, जिसे 2014 में नौसेना में शामिल किया गया था और जिसे मुंबई के मझगांव डॉक में बनाया गया। मार्च 2024 में इसी युद्धपोत ने करीब 2,600 किलोमीटर दूर डाकुओं के कब्जे वाले मालवाहक जहाज MV रुएन को रोका था। करीब 40 घंटे चले उस ऑपरेशन में भी वायुसेना के C-17 से मार्कोस कमांडो उतारे गए थे, 35 डाकुओं ने आत्मसमर्पण किया था और 17 क्रू सदस्य छुड़ाए गए थे। डाकुओं को मुंबई लाकर समुद्री डकैती रोधी अधिनियम, 2022 के तहत केस चलाया गया था।

इस बार का ऑपरेशन उससे भी ज्यादा दूरी पर हुआ। 2024 की शुरुआत में भी नौसेना ने अरब सागर और अदन की खाड़ी में कई ईरानी मछली पकड़ने वाले जहाजों और मालवाहक जहाजों को डाकुओं से छुड़ाया था। नौसेना 2008 से अदन की खाड़ी और अफ्रीका के पूर्वी तट पर लगातार एंटी-पायरेसी गश्त कर रही है।
यह ऑपरेशन क्यों अहम है
- व्यापारिक रास्ते की सुरक्षा: अरब सागर और अदन की खाड़ी से भारत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और माल आता-जाता है। एक ‘मदर शिप’ डाकुओं को दूर समुद्र तक पहुंचने का अड्डा दे सकती थी।
- दोनों सेनाओं का तालमेल: नौसेना के युद्धपोत और टोही विमान, वायुसेना का C-17 और मार्कोस कमांडो एक साथ हजारों किलोमीटर दूर काम करते दिखे।
- मानवीय पहलू: क्रू सदस्य ईरानी थे, फिर भी भारत ने सबसे पहले मदद पहुंचाई। यही ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका है।
- बिना खून-खराबे के: नौसेना के मुताबिक पूरे ऑपरेशन में न किसी की जान गई, न कोई घायल हुआ।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
अजिनी कौन सा जहाज है?
अजिनी एक ईरानी मछली पकड़ने वाला जहाज है, जिसे 29 अक्टूबर 2026 को उत्तर-पूर्वी सोमालिया के तट के पास हथियारबंद डाकुओं ने अगवा कर लिया था।
ऑपरेशन कब और कहां हुआ?
2 नवंबर 2026 को अरब सागर में, मुंबई से 3,000 किलोमीटर से ज्यादा दूर। पूरा अभियान 48 घंटे से ज्यादा चला।
ऑपरेशन में कौन-कौन शामिल था?
नौसेना का युद्धपोत INS कोलकाता, एक समुद्री टोही विमान, मार्कोस (मरीन कमांडो) और भारतीय वायुसेना का C-17 विमान, जिससे कमांडो पैरा-ड्रॉप किए गए।
क्या कोई घायल हुआ?
नहीं। नौसेना के अनुसार सभी 20 क्रू सदस्य सुरक्षित छुड़ाए गए और कोई हताहत या घायल नहीं हुआ।
स्रोत
- भारतीय नौसेना का आधिकारिक बयान (3 नवंबर 2026), जैसा राष्ट्रीय मीडिया में प्रकाशित
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आधिकारिक X हैंडल @rajnathsingh (2 नवंबर 2026 की पोस्ट, तस्वीरें और वीडियो)
- भारतीय नौसेना प्रवक्ता, आधिकारिक X हैंडल @indiannavy
- मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर-हिंद महासागर (MSCIO) की चेतावनी, Associated Press के हवाले से (1 नवंबर 2026)
- MV रुएन ऑपरेशन (मार्च 2024) पर भारतीय नौसेना/PIB की पूर्व जानकारी








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