राजनीति में रॉकेट की उपमा नई नहीं है, लेकिन 22 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे सीधे विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर मोड़ दिया। NDTV World Summit 2026 के मंच से उन्होंने नाम लिए बिना कहा कि कांग्रेस अपने नेता को जितनी बार लॉन्च करने की कोशिश करती है, उतनी लॉन्चिंग तो श्रीहरिकोटा से भी साल भर में नहीं होती। अगले ही दिन भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इस हमले को और आगे बढ़ाया, और कांग्रेस की ओर से शशि थरूर ने उसी मंच पर जवाब दिया।
यह टकराव ऐसे समय हो रहा है जब राहुल गांधी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर दिल्ली की सड़कों पर विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों की अगुवाई कर रहे हैं। यानी यह सिर्फ जुमलों की जंग नहीं, बल्कि इस बात की लड़ाई भी है कि विपक्ष के आंदोलन को देश किस नज़र से देखे।
‘फेल्ड प्रोडक्ट’ और श्रीहरिकोटा: मोदी ने क्या कहा
NDTV इंडिया के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया जहां नए ऑर्डर की तलाश में है, वहीं कुछ लोग भारत में डिसऑर्डर के सपने देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग विदेशों में जाकर भारत को बदनाम करते हैं और विदेशियों से दखल की अर्जी लगाते हैं। इसके बाद आई वह पंक्ति जो सबसे ज़्यादा चर्चा में है:
सालभर में हमारे श्रीहरिकोटा से उतनी लॉन्चिंग नहीं होती, जितनी एक साल में कांग्रेस के लोग अपने नेता की लॉन्चिंग की नाकाम कोशिश कर लेते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, NDTV World Summit 2026 (NDTV इंडिया के अनुसार)
मोदी ने यह भी कहा, “पता नहीं, कब तक कांग्रेस अपने फेल्ड प्रोडक्ट की लॉन्चिंग के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी।” उन्होंने गांधी परिवार को पार्टी पर बोझ बताया और दावा किया कि पार्टी के बड़े-बुज़ुर्ग अकेले में मिलने पर यह बात उन्हें बताते भी हैं, “लेकिन अपमान का घूंट पीकर चुप भी रहते हैं।” अंगूर खट्टे होने वाली कहावत को मोड़ते हुए उन्होंने कहा कि अंगूर इतने खट्टे हैं कि कांग्रेस अंगूर की बेल को ही काटने में जुट गई है।
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‘परजीवी’ और ‘दिमागी नक्सल’: हमले का दूसरा हिस्सा
भाषण का सबसे तीखा हिस्सा कांग्रेस के चरित्र पर था। प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के रवैये का नुकसान सरकार के ईमानदार आलोचकों को भी होता है, क्योंकि जो लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के खिलाफ अपनी बात रखना चाहते हैं, उनकी आवाज़ भी कांग्रेस के शोर में खो जाती है। संसद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के कई युवा सांसद अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस संसद नहीं चलने देती क्योंकि उसे “एक ही को लाइमलाइट में रखना है।”
फिर उन्होंने कहा, “कांग्रेस वो परजीवी बन गई है जो किसी को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती। दिमागी नक्सलियों ने कांग्रेस के दिमाग पर ऐसा कब्जा कर लिया है कि कांग्रेस ने खुद के सोचने की क्षमता ही खो दी।” इसी क्रम में उन्होंने जोड़ा कि जो जंगलों में विनाश करते थे, वे अब कांग्रेस में घुसकर देश का सर्वनाश करने पर तुले हैं।
यह ध्यान देने वाली बात है कि यही भाषण विश्व व्यवस्था पर भी था। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मोदी ने संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में सुधार, व्यापार के हथियार बनने और समुद्री रास्तों पर बढ़ते तनाव की बात की, और कहा कि ऐसे समय में भारत की भूमिका अहम हो जाती है। घरेलू राजनीति पर हमला इसी ‘मज़बूत भारत की छवि’ वाले तर्क से जोड़ा गया था।
अगले दिन भाजपा का हमला और तेज़
23 अक्टूबर को भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्यसभा सांसद और भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री की बात को आगे बढ़ाया। ThePrint पर प्रकाशित PTI की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी सिर्फ ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ नहीं, बल्कि मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति भी लगते हैं। त्रिवेदी ने इसके लिए राहुल के उन हालिया दावों का ज़िक्र किया कि वे 200 सरकारी अफसरों के संपर्क में हैं, कि मुख्य चुनाव आयुक्त उन्हें संदेश भेजते हैं, और कि हिरासत में लेने वाले पुलिसवालों ने उनके कान में कहा कि वे सही हैं। उन्होंने आकाशवाणी परिसर में राहुल के प्रवेश और संसद में प्रधानमंत्री को गले लगाने के बाद आंख मारने वाले पुराने प्रसंग का भी हवाला दिया।
त्रिवेदी ने कांग्रेस के 1 नवंबर के प्रस्तावित दिल्ली प्रदर्शन पर भी निशाना साधा। द हिंदू के मुताबिक उन्होंने इस तारीख को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जोड़ा और दावा किया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दिल्ली की सड़कों पर फिर “अराजकता” का विचार पाल रहे हैं। ये सब भाजपा के आरोप हैं; कांग्रेस ने इन्हें स्वीकार नहीं किया है।
थरूर का जवाब: ‘इसीलिए बदनाम करने की कोशिश’
कांग्रेस की तरफ से सबसे चर्चित जवाब शशि थरूर का रहा, जो उसी NDTV World Summit में शुक्रवार को बोल रहे थे। दैनिक भास्कर के मुताबिक थरूर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राहुल गांधी ने युवा मतदाताओं में पॉपुलैरिटी हासिल की है और भाजपा को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। NDTV की रिपोर्ट में उनका यह तर्क भी दर्ज है कि भाजपा ने राहुल पर ध्यान दिया है, इसीलिए वह उन्हें इस तरह बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
प्रधानमंत्री के ‘बड़े-बुज़ुर्ग चुप रहते हैं’ वाले दावे पर थरूर ने खुद का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कई बार पार्टी से अलग राय रखने के बावजूद वे पार्टी में हैं, प्रचार करते हैं और विदेश मामलों की संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं; अलग राय रखने से कोई पार्टी में ‘विधर्मी’ नहीं बन जाता। ‘परजीवी’ वाले आरोप पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा और सरकार का बराबरी के मैदान पर मुकाबला करने को तैयार है। त्रिवेदी के ‘मानसिक अस्थिरता’ वाले आरोप पर राहुल गांधी या कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
जुमलों के पीछे की राजनीति
‘फेल्ड प्रोडक्ट’ का तंज भाजपा के लिए नया नहीं है; यह राहुल गांधी को गैर-गंभीर नेता के रूप में पेश करने की पुरानी रणनीति का हिस्सा रहा है। नया यह है कि प्रधानमंत्री ने इसे एक अंतरराष्ट्रीय मंच वाले कार्यक्रम में, विश्व व्यवस्था पर अपने भाषण के साथ जोड़कर कहा। संदेश साफ है: भाजपा विपक्ष के मौजूदा आंदोलन को देश की छवि बिगाड़ने वाली गतिविधि के रूप में दिखाना चाहती है, जबकि कांग्रेस उसे चुनाव प्रणाली की खामियों के खिलाफ लोकतांत्रिक संघर्ष बताती है।
थरूर का जवाब भी अपने आप में दिलचस्प है। वे खुद कई मौकों पर पार्टी लाइन से हटकर बोलते रहे हैं, इसलिए प्रधानमंत्री के ‘भीतर से असंतोष’ वाले दावे का जवाब उनके मुंह से आना कांग्रेस के लिए ज़्यादा असरदार माना जा सकता है। अब नज़र 1 नवंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन पर है, जहां यह ज़ुबानी जंग सड़क पर किस रूप में दिखती है, यह तय करेगा कि किसका नैरेटिव ज़्यादा टिकता है।
यह रिपोर्ट NDTV इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस, ThePrint/PTI, द हिंदू, दैनिक भास्कर और NDTV की खबरों पर आधारित है। अंग्रेज़ी रिपोर्टों से लिए गए बयानों का भावार्थ हिंदी में दिया गया है।








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