किसी फोटो प्रदर्शनी का राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन जाना आम बात नहीं है। लेकिन दिल्ली के बीकानेर हाउस में यही हुआ। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के 26 साल के बेटे रेहान वाड्रा की प्रदर्शनी ‘No Idea Is Final’ से 105 में से 74 तस्वीरें हटाने या बदलने को कहा गया। इसके बाद दो दिन के भीतर बहस कला की आज़ादी से शुरू होकर गांधी परिवार की अंदरूनी राजनीति तक पहुंच गई।
बीकानेर हाउस में हुआ क्या
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शनी शुरू होने के बाद रेहान को दोपहर 3:30 बजे लिखित नोटिस मिला। उसमें 74 तस्वीरें हटाने या बदलने के लिए 30 मिनट का समय दिया गया था। अब दीवारों पर सिर्फ 35 फ्रेम बचे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हटाई गई ज़्यादातर तस्वीरें विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी थीं, और इनमें तिरंगे वाली दो तस्वीरें भी शामिल थीं।
तिरंगे वाली तस्वीरों पर रेहान का रुख साफ रहा। उन्होंने कहा, “मैं भारत के झंडे की तस्वीर नहीं हटाऊंगा।” प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक चलनी है। रेहान का कहना है कि हटाई गई तस्वीरों को वे किसी दूसरी जगह दिखाने की कोशिश करेंगे।
बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है (द हिंदू)। उसके प्रबंधन ने बयान जारी कर कहा कि कुछ तस्वीरें बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी की नीति के अनुरूप नहीं पाई गईं, इसलिए उन्हें हटाने का अनुरोध किया गया। प्रबंधन के मुताबिक उसकी नीति परिसर में राजनीतिक सामग्री की अनुमति नहीं देती।
तारीखों की लड़ाई: किसने क्या कब बताया
इस विवाद का सबसे दिलचस्प हिस्सा तारीखें हैं। द ट्रिब्यून और इंडिया टुडे के अनुसार भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी का दावा है कि 10 जून को भेजे गए ईमेल में प्रदर्शनी की थीम प्रकृति, वन्यजीव, कलाकृति और मूर्तिकला बताई गई थी। यह आवेदन 30 जून को स्वीकार हुआ और 21 अक्टूबर को तस्वीरें हटाने का नोटिस दिया गया।
दूसरी तरफ रेहान का कहना है कि प्रदर्शनी का लेआउट 15 अक्टूबर को साझा किया गया था और उसे स्वीकार भी किया गया था। उनके पिता रॉबर्ट वाड्रा ने भी कहा कि आपत्तियां तभी आईं जब प्रदर्शनी लगनी शुरू हो चुकी थी। दोनों दावे एक साथ सच भी हो सकते हैं। मूल आवेदन की थीम कुछ और रही हो और बाद का लेआउट बदल गया हो। असली सवाल यह है कि अगर 15 अक्टूबर को लेआउट मंज़ूर हुआ था, तो उद्घाटन के बाद सिर्फ आधे घंटे का समय देकर तस्वीरें क्यों हटवाई गईं। पूरे ईमेल रिकॉर्ड अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं, इसलिए इस पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
विपक्ष की आवाज़ें: ‘सेंसरशिप’ का आरोप
प्रियंका गांधी ने बेटे के समर्थन में लिखा कि जब कोई ताकतवर व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह जिस ताकत को बचाना चाहता है, उसे पहले ही खो चुका होता है। उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।
When even the Tricolour isn’t safe from the censor’s scissors, perhaps the problem isn’t the art. It’s the regime.
पवन खेड़ा, कांग्रेस (मीडिया रिपोर्टों के अनुसार)
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे सेंसरशिप का साफ उदाहरण बताया। शिवसेना (UBT) के आदित्य ठाकरे और NCP (SP) की सुप्रिया सुले ने भी रेहान का समर्थन किया। विपक्ष का तर्क यह है कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, और उनकी तस्वीरों को ‘राजनीतिक’ बताकर हटाना कला पर पाबंदी है।
भाजपा ने बहस का रुख कैसे बदला
वीडियो स्रोत: TOI Bharat (YouTube) | मूल वीडियो देखें
भाजपा ने इसे सेंसरशिप के बजाय कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का मुद्दा बनाने की कोशिश की। प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया, “Priyanka Vadra’s entire attempt was to soft launch her son by manufacturing a controversy. She has lost political faith in Rahul Gandhi!” यानी उनके मुताबिक प्रियंका ने विवाद खड़ा करके बेटे को राजनीति में उतारने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस में अब ‘प्रियंका बनाम राहुल’ चल रहा है।
इंडिया टुडे के मुताबिक राहुल गांधी फिलहाल निजी दौरे पर वियतनाम में हैं और इस विवाद पर उनकी कोई पोस्ट सामने नहीं आई है। भाजपा इसी चुप्पी को दरार का सबूत बता रही है। लेकिन यह सिर्फ राजनीतिक व्याख्या है। कांग्रेस की ओर से भाई-बहन में किसी मतभेद की कोई बात नहीं कही गई है, और राहुल का जवाब अभी आना बाकी है। राहुल गांधी को लेकर भाजपा का यह तीखा रुख नया नहीं है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ वाली टिप्पणी पर भी दोनों दलों में ज़ोरदार बहस हुई थी।
असल सवाल: सार्वजनिक जगह, किसकी नीति
इस पूरे विवाद के बीच एक गंभीर सवाल दब सकता है। सरकारी स्वामित्व वाली सांस्कृतिक जगहें किस आधार पर तय करती हैं कि कौन-सी कला ‘राजनीतिक’ है? अगर नीति पहले से लिखी है तो उसे आवेदन के समय ही साफ-साफ लागू किया जाना चाहिए, उद्घाटन के बाद नहीं। और अगर आवेदन में बताई गई थीम से अलग सामग्री लगाई गई, तो कलाकार को भी यह जवाब देना होगा कि उसने इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी।
रेहान वाड्रा का नाम जुड़ा होने से यह मामला सुर्खियों में है, पर ऐसे सवाल देश के हर उस कलाकार के लिए अहम हैं जो सरकारी गैलरी या भवन में अपना काम दिखाना चाहता है। साफ नियम, लिखित समय-सीमा और अपील का रास्ता हो, तो ऐसे विवाद उद्घाटन के दिन की आपाधापी में नहीं, कागज़ पर ही सुलझ सकते हैं।
आगे किस पर नज़र रहेगी
- क्या बीकानेर हाउस प्रबंधन या राजस्थान सरकार पूरा ईमेल रिकॉर्ड सार्वजनिक करती है।
- रेहान हटाई गई तस्वीरें कहां और कब दिखाते हैं।
- राहुल गांधी इस विवाद पर क्या कहते हैं, और क्या कांग्रेस भाजपा के ‘दरार’ वाले आरोप का औपचारिक जवाब देती है।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: द इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे, TOI Bharat (YouTube)।








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