नागपुर, 20 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आज विजयादशमी पर नागपुर के रेशिमबाग मैदान से अपने सालाना भाषण में कहा कि देश में आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म पर नियमों की ज़रूरत बताई, नशे को गंभीर राष्ट्रीय समस्या कहा और चेताया कि कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने की योजना बना रही हैं। आज का यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के समापन का भी था।
इस कार्यक्रम में दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता मुख्य अतिथि थे। RSS के आधिकारिक X हैंडल के मुताबिक पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मोहन भागवत के पूरे भाषण का आधिकारिक पाठ RSS की वेबसाइट पर जारी किया गया है। सुबह से ही X पर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’, ‘प्रमुख मोहन भागवत’ और #RSSFoundationDay टॉप ट्रेंड में हैं।
मोहन भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें
- आंदोलन पर: समस्याएं और व्यवस्था की कमियां हैं, इसलिए आंदोलन स्वाभाविक हैं, लेकिन वे समाधान के लिए हों। आंदोलन राजनीति का साधन बने तो भारत-विरोधी ताकतें फायदा उठाती हैं।
- OTT और सोशल मीडिया: कई देशों ने इन पर नियम बनाए हैं; भारत में भी खासकर OTT प्लेटफॉर्म को लेकर ऐसी ज़रूरत महसूस हो रही है, सरकार इस पर विचार करे।
- नशा: नशा गंभीर राष्ट्रीय समस्या है; स्वयंसेवक इसके खिलाफ देशव्यापी अभियान खड़ा करने की कोशिश करेंगे।
- संतुलित विकास: नेपाल की त्रासदी के पीछे कहीं न कहीं हिमालय क्षेत्र में एकांगी विकास है; AI जैसी तकनीक का नैतिक इस्तेमाल ज़रूरी।
- एकता और वंदे मातरम: विविधता के बावजूद हम एक समाज हैं; राष्ट्रगीत वंदे मातरम को पूरा, गर्व से गाने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।
मोहन भागवत ने आंदोलनों पर क्या कहा
भाषण का सबसे ज़्यादा चर्चा वाला हिस्सा आंदोलनों पर था। RSS की ओर से जारी हिंदी अंश के मुताबिक मोहन भागवत ने कहा, “अपने इतने बड़े समाज में समस्याएँ तो हैं। व्यवस्था की कमियाँ भी ढेर सारी होंगी। उनके चलते आंदोलनों का होना भी स्वाभाविक ही है। परन्तु आंदोलन समाधान देने के लिए होने चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि आंदोलन करने वाला कोई समूह हो, शांति-व्यवस्था के लिए कार्रवाई करने वाला शासन-प्रशासन हो या राजनीतिक नेता, किसी की करनी से समाज में अनबन, द्वेष या विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए। भावनाएं तेज़ हों तब भी काम संविधान और कानून की मर्यादा में हो। मोहन भागवत ने यह भी कहा कि वोट, सस्ती लोकप्रियता या राजनीतिक फायदे का लालच हमारे विवेक पर हावी नहीं होना चाहिए।
मोहन भागवत के मुताबिक जब आंदोलन किसी व्यक्ति, समूह या विचार के खिलाफ दुश्मनी के भाव से राजनीति का हथियार बन जाता है, तब भारत को कमज़ोर करने वाली ताकतें उसका फायदा उठाती हैं। वे मतभेदों को दुश्मनी में बदलती हैं, लोगों में पीड़ित होने का भाव जगाती हैं और देश की व्यवस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करती हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने आशा भोसले के गाए एक पुराने मराठी गीत की पंक्तियां भी सुनाईं, जिनका भाव है: ‘हमेशा सावधान रहो और नज़र एक लक्ष्य पर रखो।’
उन्होंने यह भी कहा कि हर समस्या न तो अकेले सरकार हल कर सकती है, न सिर्फ आंदोलन से हल होती है। समाज की भागीदारी और आपसी संवाद से भी समाधान निकलते हैं। इसके उदाहरण में उन्होंने बताया कि 21 प्रांतों के 210 ज़िलों के 1,296 स्कूलों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जहां गांव वालों और स्वयंसेवकों ने साथ मिलकर काम किया, वहां बच्चों की हाज़िरी और पढ़ाई का स्तर बेहतर हुआ।
भाषण का सियासी संदर्भ: CJP का आंदोलन
मोहन भागवत ने अपने भाषण में किसी संगठन या पार्टी का नाम नहीं लिया। लेकिन यह बयान ऐसे समय आया है जब दिल्ली में युवाओं की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर लगातार प्रदर्शन कर रही है। नवभारत टाइम्स ने भी भाषण के इस हिस्से को CJP प्रदर्शनों और Gen Z के लिए संदेश के तौर पर देखा है। CJP के दो नेताओं की हिरासत और उस पर ममता बनर्जी के बयान की पूरी खबर यहां पढ़ें: ममता बनर्जी ने मांगी CJP नेताओं की रिहाई, 2 दिन बढ़ी हिरासत।
भाषण में एक और तीखी बात थी। मोहन भागवत ने कहा कि पश्चिम से एक ऐसी “आंधी” चली है, जो भारत समेत पूरी दुनिया में भद्रता और सांस्कृतिक-मानवीय मूल्यों को नष्ट करना चाहती है। उनके मुताबिक ये “आसुरी ताकतें” भारत, हिंदू समाज और संघ को तोड़ने की योजना बनाती हैं, और “क्षुद्र सत्ता स्वार्थ तथा विवेकहीनता के कारण कुछ महत्वाकांक्षी नेता लोग भी” उनके साथ मिल जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति के साथ दुनिया के देशों में अस्थिरता फैलाकर अपने मोहरे बिठाने वाली इन ताकतों की योजनाएं नाकाम होंगी।
इंडियन एक्सप्रेस के लाइव अपडेट के मुताबिक मोहन भागवत ने बांग्लादेश, फ्रांस और अल्बानिया में हुई अशांति का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत में ऐसा “रिजीम चेंज” (सत्ता परिवर्तन) नहीं होगा। हालांकि RSS के जारी लिखित भाषण में इन देशों के नाम नहीं हैं, यानी यह हिस्सा मंच से बोले गए शब्दों का हो सकता है।
OTT प्लेटफॉर्म पर नियम की मांग, नशा राष्ट्रीय समस्या
मोहन भागवत ने कहा कि सोशल मीडिया के ज़रिए हर तरह की जानकारी सबके पास पहुंच रही है और नई पीढ़ी उसे बिना सही-गलत का विवेक किए ग्रहण कर लेती है। उन्होंने कहा, “उसके दुष्परिणामों का अनुभव होने के बाद विभिन्न देशों ने कुछ अनुशासन और निर्बन्ध लागू किये हैं। हमारे अपने देश में भी इस प्रकार की आवश्यकता, विशेषत: ‘OTT platforms’ को लेकर, समाज में अनुभव की जा रही है।” उन्होंने सरकार से इस पर विचार करने को कहा।
नशे पर मोहन भागवत ने कहा, “नशा एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है और उसके परिहार के लिए समय रहते शासन-प्रशासन तथा समाज को प्रयास प्रारम्भ करने चाहिए।” उन्होंने कहा कि माता-पिता और बड़ों को यह विवेक नई पीढ़ी को देना होगा। लिखित भाषण के मुताबिक स्वयंसेवक इस समस्या पर काम कर रहे सभी लोगों को जोड़कर नशे के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने की कोशिश करेंगे।
ABP न्यूज़ के मुताबिक मोहन भागवत ने AI के नैतिक इस्तेमाल की बात भी की। लिखित भाषण में उन्होंने कहा कि विवेक के बिना परमाणु विज्ञान से साफ ऊर्जा से ज़्यादा विनाशकारी हथियार बनेंगे, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उपयोगी तकनीक भी लोगों को गुमराह करने और झूठ फैलाने में इस्तेमाल होती रहेगी।

नेपाल की त्रासदी और संतुलित विकास
मोहन भागवत ने विज्ञान और तकनीक का स्वागत करने को कहा, लेकिन यह भी कहा कि तकनीक सिर्फ साधन है। RSS के हिंदी अंश के मुताबिक उन्होंने कहा कि नेपाल ने जो भयंकर त्रासदी झेली, जिसमें हज़ारों लोगों की जान गई, उसके मूल में कहीं न कहीं भारत, तिब्बत, भूटान और चीन से गुज़रने वाले पूरे हिमालय क्षेत्र में चला एकांगी विकास है। इसलिए विकास की समग्र और संतुलित दृष्टि बनाना ज़रूरी है।
एकता, वंदे मातरम और ‘हिंदू भाव’
भाषण का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय एकता पर था। मोहन भागवत ने कहा कि संविधान ने हमें “हम, भारत के लोग” कहकर एक जन के रूप में परिभाषित किया है। आस्था, क्षेत्र, जाति, भाषा और खान-पान की विविधता के बावजूद भारत एक समाज है। जब-जब हम बंटे, कमज़ोर हुए और गुलामी झेलनी पड़ी।
उन्होंने बंग-भंग का उदाहरण दिया और कहा कि लॉर्ड कर्ज़न के बंगाल विभाजन के प्रस्ताव को समाज ने एकजुट होकर विफल किया था और उस दौर में ‘वंदे मातरम’ एकता का प्रतीक बना। मोहन भागवत ने कहा कि वंदे मातरम हमारा राष्ट्रगीत है और इसे पूरा, गर्व के साथ और ऊंचे स्वर में गाने में कोई हिचक या आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि संगठित और बलशाली हिंदू समाज की बात करना सभी पंथों के सम्मान या राष्ट्र की भावनात्मक एकता के खिलाफ नहीं है, क्योंकि हिंदू समाज का स्वभाव समावेशी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कैप्टन स्मित मछर का नाम लिया, जिन्होंने उनके मुताबिक अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक स्मित मछर flydubai के पायलट हैं।
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि इतिहास के टकरावों की वजह से मन में जो गांठें हैं, उन्हें सुलझाना है और नई गांठें नहीं बनने देनी हैं। सरकार और प्रशासन को भी कोई अभियान या नीति लागू करते समय नागरिकों की गरिमा का ध्यान रखते हुए विनम्र और अपनेपन वाला व्यवहार करना चाहिए।
संघ शताब्दी वर्ष के आंकड़े
मोहन भागवत ने संघ के शताब्दी वर्ष में हुए कार्यक्रमों का ब्योरा भी दिया। RSS के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:
- संपर्क अभियान: 4,61,527 गांवों और 41,076 शहरी बस्तियों में 10,19,88,511 घरों से संपर्क
- प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी: 1,117 ज़िलों में, 4,26,497 प्रमुख लोग शामिल
- सद्भावना बैठक: 5,036 खंडों (तालुका) में
- हिंदू सम्मेलन: 34,187 मंडलों में
- युवा सम्मेलन: 39,25,225 युवाओं की भागीदारी
उन्होंने कहा कि ‘पंच परिवर्तन’ की पांचों पहलों (सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, स्व-बोध व स्वदेशी और नागरिक अनुशासन) का समाज के हर वर्ग में स्वागत हुआ है और ये सिर्फ एक साल का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका हैं। मोहन भागवत ने संत रविदास की 650वीं जयंती, स्वामी श्रद्धानंद के बलिदान के 100 साल, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की जन्म शताब्दी और ‘हिंदू मेला’ के प्रवर्तक राज नारायण बसु की 200वीं जयंती का भी स्मरण किया।
मुख्य अतिथि संजय गुप्ता ने क्या कहा
मुख्य अतिथि संजय गुप्ता ने कहा कि पिछली सदी में संघ का ध्यान तुष्टीकरण की वजह से हिंदू समाज के सामने आई चुनौतियों को दूर करने पर था, जबकि अगली सदी के लिए संघ ने देशवासियों में चरित्र निर्माण को सबसे ऊपर रखा है। RSS के X हैंडल के मुताबिक उन्होंने कहा, “आज भारतीयता और हिन्दुत्व की विश्व में अपनी धमक है तो इसका श्रेय प्रमुख रूप से संघ को दिया जाना चाहिए।”
आगे क्या
विजयादशमी का भाषण RSS के लिए साल भर की दिशा तय करने वाला माना जाता है। इस बार मोहन भागवत ने साफ किया कि शताब्दी वर्ष पूरा होने के बाद संघ समाज की संगठित और मेहनती शक्ति खड़ी करने की ओर बढ़ेगा। OTT पर नियम और नशे के खिलाफ अभियान की उनकी बातें आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष, दोनों की बहस का हिस्सा बन सकती हैं। वहीं आंदोलनों पर उनकी टिप्पणी को विपक्ष किस तरह लेता है, यह भी देखना होगा।
आज विजयादशमी है, त्योहार से जुड़ी जानकारी के लिए पढ़ें: दशहरा 2026: आज रावण दहन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि। आज से लागू हुए भारत-न्यूजीलैंड व्यापार समझौते की खबर: India New Zealand FTA लागू: 100% भारतीय सामान ड्यूटी-फ्री।
आपकी राय: क्या OTT प्लेटफॉर्म पर सरकार को नए नियम बनाने चाहिए? और क्या आंदोलनों पर मोहन भागवत की बात से आप सहमत हैं? कमेंट में बताइए।
स्रोत
- RSS (आधिकारिक): सरसंघचालक का विजयादशमी उत्सव 2026 भाषण, पूरा पाठ (20 अक्टूबर 2026)
- RSS (आधिकारिक): मुख्य अतिथि संजय गुप्ता का भाषण
- Indian Express: Mohan Bhagwat Speech Live Updates (20 अक्टूबर 2026)
- नवभारत टाइम्स: आंदोलन पर मोहन भागवत का संदेश (20 अक्टूबर 2026)
- ABP न्यूज़: ‘जब भी बंटे, कमजोर हुए’ (20 अक्टूबर 2026)
- हिंदुस्थान समाचार: 20 अक्टूबर को रेशिमबाग में विजयादशमी उत्सव की घोषणा
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