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ममता बनर्जी ने मांगी CJP नेताओं की रिहाई, 2 दिन बढ़ी हिरासत

ममता बनर्जी ने CJP नेता आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई मांगी, हिरासत को स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद कहा। जंतर-मंतर केस में कस्टडी 2 दिन बढ़ी, पूरा मामला।

ममता बनर्जी ने जिस मुद्दे पर आवाज़ उठाई: दिल्ली के जंतर-मंतर पर तिरंगे के साथ युवाओं का प्रदर्शन (जुलाई 2026)
जुलाई 2026: दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवाओं का प्रदर्शन। अक्टूबर में इस जगह को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया। फोटो: Alnitak-Alnilam-Mintaka / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0

मुख्य बातें

  • ममता बनर्जी ने CJP नेताओं की हिरासत को "स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद" बताया
  • आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत 19 अक्टूबर को 2 दिन बढ़ी
  • केस दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपा गया, अगली पेशी 21 अक्टूबर को
  • अक्टूबर को दोनों डीनोटिफाई हो चुके जंतर-मंतर में घुसे थे, शांति बॉन्ड तोड़ने का आरोप
  • CJP मतदाता सूची (SIR) को लेकर CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रही है

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को तुरंत रिहा करने की मांग की है। दिल्ली के जंतर-मंतर में घुसने के मामले में दोनों की न्यायिक हिरासत सोमवार को 2 दिन और बढ़ा दी गई। इसके बाद ममता बनर्जी ने X पर लिखा कि यह “स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद” है। आज गूगल ट्रेंड्स पर ममता बनर्जी का नाम देश के टॉप ट्रेंडिंग विषयों में है।

ममता बनर्जी जिस फैसले पर भड़कीं, वह आदेश नई दिल्ली के मंदिर मार्ग थाने में बैठे स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने दिया। द हिंदू के मुताबिक दोनों नेताओं को अब बुधवार, 21 अक्टूबर को फिर पेश किया जाएगा। पुलिस सूत्रों के हवाले से PTI ने बताया कि इस केस को अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है।

ममता बनर्जी ने X पर क्या लिखा

ममता बनर्जी ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं आशुतोष और सौरव की हिरासत बढ़ाने के पीछे की बेचैनी भरी मंशा समझ सकती हूं। यह एक खतरनाक वायरस है, जिसका इस्तेमाल रोज़ लोकतंत्र पर हमले के लिए हो रहा है। Gen Z के लड़के-लड़कियों को सताना बंद करो। आज जो सत्ता में हैं, वे कल नहीं रहेंगे।” (अंग्रेज़ी पोस्ट का हिंदी अनुवाद)

उन्होंने आगे लिखा कि कोलकाता से दिल्ली और मुंबई तक पूरे देश में अत्याचार अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गए हैं। आज़ादी की लड़ाई का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने भी अंग्रेज़ों के अत्याचार झेले, लेकिन हिम्मत से लड़े। ममता बनर्जी ने साफ शब्दों में इसे “स्टेट स्पॉन्सर्ड आतंकवाद” और “पुलिस स्पॉन्सर्ड अत्याचार” बताया और कहा, “अगर आप लोकतंत्र में विश्वास करते हैं, तो आशुतोष और सौरव को तुरंत रिहा करें।”

यह पहली बार नहीं है जब ममता बनर्जी CJP के समर्थन में उतरी हैं। 14 अक्टूबर को दोनों नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा करते हुए उन्होंने लिखा था कि यह “एक पूरी पीढ़ी को डराने और चुप कराने की कोशिश” है। PTI के मुताबिक उस दिन उन्होंने युवाओं से कहा था, “आपकी दीदी आज भी आपके साथ है और हमेशा रहेगी।” 16 अक्टूबर को CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने पर उन्होंने इसे “अघोषित इमरजेंसी” कहा था।

मजिस्ट्रेट ने हिरासत क्यों बढ़ाई

हिंदुस्तान टाइम्स ने SEM का दो पेज का आदेश देखा है। इसके मुताबिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि दोनों ने 11 अक्टूबर को भरे गए अपने शांति बॉन्ड को “जानबूझकर” तोड़ा और उनका आचरण दिखाता है कि वे बार-बार उन जगहों पर प्रदर्शन बुलाते हैं, जिन्हें प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया जा चुका है। मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों को 2 दिन में लिखित दलील जमा करने का मौका दिया है।

ममता बनर्जी के आरोपों के उलट, दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि अगर दोनों को छोड़ा गया तो “शांति और व्यवस्था” बिगड़ सकती है। पुलिस के मुताबिक दोनों ने लोगों को जंतर-मंतर पर जुटने के लिए उकसाया, जबकि उसे प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था। पहले उन्होंने शर्तें मानने का भरोसा देकर प्रदर्शन की इजाज़त ली थी, लेकिन वादा नहीं निभाया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने HT से कहा कि दोनों कई बार कानून तोड़ चुके हैं और अभी त्योहारों का मौसम है, ऐसे में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा नहीं लिया जा सकता। पुलिस को यह भी आशंका है कि रिहा होने पर वे फिर से प्रदर्शन की योजना बनाएंगे।

CJP और वकीलों का आरोप: ‘बेबुनियाद वजहें’

CJP के वकील अभिक चिमनी ने HT से कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है कि दोनों से कोई खतरा है। उनके मुताबिक ज़मानतदारों (श्योरिटी) को दस्तावेज़ों में “फोटो मेल न खाने” जैसी वजह बताकर खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि कानून कहता है कि पहले रिहा करो, फिर सत्यापन करो।

CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने X पर लिखा कि सरकारी वकील ने कानून पर कोई दलील नहीं दी और सारी बातें “सिर्फ अंदाज़े” पर थीं। उन्होंने इसे “असहमति की आवाज़ों को दबाने की कोशिश” बताया। CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी आरोप लगाया कि अदालती कार्यवाही जानबूझकर टाली जा रही है, ताकि दोनों जेल में ही रहें।

ममता बनर्जी के बयान से पहले इस मामले में एक और मोड़ आया था। HT के मुताबिक रविवार को केस सुन रहे पहले SEM ने दावा किया कि उन्हें मैसेज पर धमकियां मिल रही हैं, जिसके बाद वे केस से हट गए। उनकी शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और सोमवार को नए SEM ने सुनवाई की। पुलिस ने मजिस्ट्रेट बदलने को भी हिरासत बढ़ाने की एक वजह बताया।

दिपके ने 19 अक्टूबर को अपने साथियों के बारे में लिखा कि कुछ साल पहले आशुतोष लंदन में ऊंची तनख्वाह वाली कॉरपोरेट नौकरी करते थे और सौरव देश की कानूनी व्यवस्था पर लिखते थे। CJP का कहना है कि दोनों ने अच्छा करियर छोड़कर यह आंदोलन चुना।

ममता बनर्जी जिस मामले पर बोलीं, उसकी पूरी टाइमलाइन

  • 10 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और दूसरे नेताओं को हिरासत में लिया।
  • 11 अक्टूबर: तीनों नेता ₹50,000 के निजी और ज़मानती बॉन्ड भरकर छूटे। शर्त थी कि वे एक साल तक शांति बनाए रखेंगे। इसी दिन दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने स्टैंडिंग ऑर्डर जारी कर जंतर-मंतर रोड को तय प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया।
  • 13 अक्टूबर: रांका और दास कुछ साथियों के साथ बंद गेट पर चढ़कर जंतर-मंतर पहुंचे, तिरंगा फहराया और CEC के खिलाफ नारे लगाए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
  • 14 अक्टूबर: SEM ने दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा और उन्हें तिहाड़ जेल ले जाया गया। उनके साथ पकड़े गए अजिंक्य शिंदे को ज़मानत मिल गई।
  • 16-17 अक्टूबर: कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन से पहले दिपके को फिर हिरासत में लिया गया। वे 17 अक्टूबर को नया शांति बॉन्ड भरकर छूटे।
  • 19 अक्टूबर: रांका और दास की हिरासत 2 दिन बढ़ी, केस क्राइम ब्रांच को गया। अगली पेशी 21 अक्टूबर को।

स्रोत: द वीक, इंडियन एक्सप्रेस, BBC और HT/PTI की रिपोर्ट।

जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल क्यों नहीं

मिंट के मुताबिक दिल्ली पुलिस के सर्कुलर में कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रदर्शन के लिए दूसरी जगहें तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई थी। उसी की सिफारिश पर जंतर-मंतर को सूची से हटाया गया। अब बड़े प्रदर्शनों के लिए तीन जगहें तय की गई हैं: मध्य दिल्ली का रामलीला ग्राउंड, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी ग्राउंड और शाहदरा का CBD ग्राउंड।

संसद के पास बना जंतर-मंतर दशकों से देश में विरोध प्रदर्शनों की सबसे पहचानी जगह रहा है। CJP और ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार प्रदर्शनों को सत्ता के केंद्र से दूर धकेलना चाहती है। दिपके ने कहा था, “अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा।” पुलिस का कहना है कि उसकी कार्रवाई सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) क्या है

BBC के मुताबिक CJP मई 2026 में एक ऑनलाइन अभियान के रूप में शुरू हुई थी, जब देश के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी में कुछ बेरोज़गार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई थी। महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले के अभिजीत दिपके ने इसी शब्द को अपनी पहचान बना लिया। यह Gen Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं का आंदोलन है। BBC के मुताबिक यह चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है।

जुलाई में CJP ने पेपर लीक के खिलाफ बड़े प्रदर्शन किए, जिसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। अब संगठन मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ी का आरोप लगाकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

चुनाव आयोग इन आरोपों को नकारता है। BBC के मुताबिक आयोग का कहना है कि SIR का मकसद अयोग्य, मृत और दोहरे नाम वाले मतदाताओं को सूची से हटाना है और वह किसी पार्टी का पक्ष नहीं ले रहा। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर SIR को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है और आयोग की स्वतंत्रता का बचाव किया है।

विपक्ष का साथ, ममता बनर्जी सबसे मुखर

ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री, जिन्होंने CJP नेताओं की रिहाई मांगी
ममता बनर्जी की आधिकारिक तस्वीर (2015, मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान)। फोटो: मुख्यमंत्री कार्यालय, पश्चिम बंगाल सरकार, via Wikimedia Commons, CC BY 1.0

BBC के मुताबिक लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी CJP नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की है और जंतर-मंतर को फिर से प्रदर्शन के लिए खोलने की मांग की है। हालांकि BBC के मुताबिक विपक्षी दल और CJP ज़्यादातर अलग-अलग प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं में ममता बनर्जी इस मुद्दे पर लगातार सबसे मुखर आवाज़ बनकर उभरी हैं।

ममता बनर्जी ने 14 अक्टूबर की पोस्ट में बंगाल का मुद्दा भी उठाया था और कहा था कि बंगाल में उनके 14,000 लोग पुलिस और राजनीतिक कार्रवाई झेल रहे हैं। यानी ममता बनर्जी दिल्ली के इस मामले को बंगाल में अपने समर्थकों पर हो रही कार्रवाई से जोड़कर देख रही हैं। बंगाल में चुनाव और मतदान से जुड़ी हमारी पुरानी रिपोर्ट भी पढ़ें: लोकसभा चुनाव 2024 में असम और पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग।

कानून क्या कहता है: शांति बॉन्ड तोड़ने पर हिरासत

द वीक की कानूनी रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत किसी व्यक्ति से अधिकतम एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरवाया जा सकता है। धारा 141(1)(b) के तहत अगर मजिस्ट्रेट को लगे कि बॉन्ड तोड़ा गया है, तो वह कारण दर्ज करके बॉन्ड की बाकी अवधि तक व्यक्ति को हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है।

कानूनी जानकारों के मुताबिक शांति बॉन्ड प्रदर्शन पर पूरी पाबंदी नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) शांतिपूर्ण और बिना हथियार के इकट्ठा होने का अधिकार देता है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था के लिए उस पर उचित पाबंदी लगाई जा सकती है। असली सवाल यह है कि क्या बॉन्ड सच में टूटा और क्या तय प्रक्रिया का पालन हुआ। इसी पर अब बहस चल रही है।

आगे क्या होगा

ममता बनर्जी समेत पूरे विपक्ष की नज़र अब 21 अक्टूबर की पेशी पर है, जब रांका और दास को फिर SEM के सामने पेश किया जाएगा। तब तक दोनों पक्ष अपनी लिखित दलीलें जमा करेंगे। केस क्राइम ब्रांच के पास जाने के बाद पुलिस दोनों से प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को लेकर पूछताछ भी करना चाहती है। CJP ने कहा है कि अगर नेता जेल में रहे तो भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।

ममता बनर्जी के तीखे बयान से साफ है कि यह मामला अब सिर्फ दिल्ली पुलिस और एक युवा संगठन के बीच का नहीं रहा। यह विपक्ष बनाम केंद्र की बड़ी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बन चुका है। त्योहार के इस मौसम की दूसरी खबरें: दशहरा 2026: आज रावण दहन का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। आज RSS प्रमुख के विजयादशमी भाषण पर हमारी रिपोर्ट: मोहन भागवत का विजयादशमी भाषण।

आपकी राय: क्या शांति बॉन्ड तोड़ने के आरोप में प्रदर्शनकारियों को जेल में रखना सही है, या यह विरोध के अधिकार पर चोट है? कमेंट में बताइए।

स्रोत

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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