फीचर्ड इमेज: नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। स्रोत: PIB (@PIB_India, आधिकारिक X) वीडियो फ्रेम
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को देश के सबसे बड़े क्लीन एनर्जी मंच से साफ कहा कि अब एनर्जी सिक्योरिटी ही इकोनॉमिक सिक्योरिटी है, और भारत अगले 10-11 साल में 500 गीगावॉट नई नॉन-फॉसिल (गैर-जीवाश्म) बिजली क्षमता जोड़ने की कोशिश करेगा। 2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो’ का उद्घाटन करते हुए उन्होंने पीएम सूर्य घर, कुसुम, ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर मैन्युफैक्चरिंग के ताजा आंकड़े रखे और निवेशकों से कहा कि इस दशक के अंत तक भारत के क्लीन एनर्जी सेक्टर में 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश अवसर बनेंगे। यह जानकारी प्रधानमंत्री के संबोधन के मूल पाठ से है, जिसे पत्र सूचना कार्यालय (PIB) ने शाम 6:58 बजे जारी किया।
मंच पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद नाइक मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने भाषण की शुरुआत में ही दोनों का नाम लेकर अभिवादन किया और बताया कि पीएम सूर्य घर योजना से जुड़ा एक ताजा आंकड़ा उन्हें अभी-अभी प्रल्हाद जोशी ने ही दिया है।
समिट क्या है और इस बार खास क्यों
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2 से 5 नवंबर तक भारत मंडपम में चल रहा है। इसकी थीम ‘Invest. Innovate. Inspire.’ रखी गई है और PIB के अनुसार 125 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि इसमें शामिल हो रहे हैं। इसी दौरान इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) की 9वीं असेंबली और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी हो रहा है। राज्यों ने अपने-अपने पवेलियन लगाए हैं, जिनमें वे अपनी ऊर्जा परियोजनाएं और निवेश के मौके दिखा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समिट “विशेष परिस्थितियों” में हो रहा है। कोरोना महामारी से लेकर वेस्ट एशिया संकट तक दुनिया ने कई झटके देखे हैं और वेस्ट एशिया का संकट अभी भी जारी है। उनके मुताबिक अगर भारत ने पिछले एक दशक में क्लीन एनर्जी में निवेश न किया होता, तो यह संकट भारत के लिए बाकी दुनिया से कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता था। उन्होंने कहा कि जीवाश्म ईंधन के भंडार सीमित हैं और कुछ ही इलाकों में हैं, जबकि रिन्यूएबल एनर्जी का पोटेंशियल हर देश के पास है।

500 गीगावॉट का लक्ष्य: कहां तक पहुंचा भारत
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2021 के COP-26 सम्मेलन में भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल क्षमता का संकल्प लिया था। पेरिस समझौते के तहत भारत ने अपनी आधी स्थापित बिजली क्षमता गैर-जीवाश्म स्रोतों से पूरी करने का जो लक्ष्य रखा था, वह 2025 में ही, यानी तय समय से पांच साल पहले, हासिल हो गया। आज भारत की 50 प्रतिशत से ज्यादा स्थापित बिजली क्षमता नॉन-फॉसिल स्रोतों पर आधारित है।
- अब तक: करीब 300 गीगावॉट नॉन-फॉसिल क्षमता हासिल।
- रैंकिंग: सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी में भारत दुनिया के टॉप-3 देशों में।
- नया लक्ष्य: अगले 10-11 वर्षों में 500 गीगावॉट नई नॉन-फॉसिल क्षमता जोड़ना। प्रधानमंत्री ने माना कि यह “थोड़ा कठिन” है, लेकिन दोहराया, “We will do it!”
आम लोगों के लिए क्या: सूर्य घर, कुसुम और सूर्य सरोवर
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
फरवरी 2024 में शुरू हुई इस योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों की छत पर सोलर पैनल लगाना है। प्रधानमंत्री के मुताबिक 24-25 महीनों में 65 लाख से ज्यादा घर इससे जुड़ चुके हैं और हर 6 दिन में करीब एक लाख नए घर जुड़ रहे हैं। एक अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन घरों के बिजली बिल करीब 76 प्रतिशत तक कम हुए हैं, लाखों परिवारों का बिल शून्य हो गया है और कई परिवार बची बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इसका एक उदाहरण राजनांदगांव का खैरा गांव है, जो 100 प्रतिशत सोलर गांव बना।
सरकारी इमारतें और किसान
देश में 44 हजार से ज्यादा सरकारी इमारतें सोलर एनर्जी से जुड़ चुकी हैं, जिससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। कुसुम योजना से 30 लाख से अधिक किसानों को सोलर सिंचाई मिली है और अनुमान के मुताबिक सोलर पंप वाले हर किसान को सालाना करीब एक लाख रुपये की बचत हो रही है। प्रधानमंत्री ने ‘पीएम सूर्य सरोवर’ का भी जिक्र किया, जिसमें तालाबों और झीलों के ऊपर तैरते सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाई जाती है, ताकि जमीन का खर्च भी बचे।
किसानों के लिए उन्होंने नया नारा दिया: “अन्नदाता, ऊर्जादाता बने।” उनका सुझाव था कि खाली जमीन ही नहीं, खेतों की मेढ़ पर भी सोलर पैनल लगें। साथ ही उन्होंने कहा कि हर सरकारी इमारत, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल और स्ट्रीट लाइट को सोलर से जोड़ने के लिए राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच “हेल्दी कंपीटिशन” होना चाहिए।

ग्रीन हाइड्रोजन, ग्रिड और मैन्युफैक्चरिंग
नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत इस दशक के अंत तक 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले भारत ने पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन भी शुरू की है।
बिजली पहुंचाने के मोर्चे पर उन्होंने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और ‘वन नेशन वन ग्रिड’ का जिक्र किया। देश के 5 क्षेत्रीय ग्रिड अब एक ही फ्रीक्वेंसी वाले एकीकृत नेटवर्क से जुड़े हैं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के अगले चरण के लिए करीब 2 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है।
मैन्युफैक्चरिंग पर सबसे बड़ा आंकड़ा यह रहा कि एक दशक पहले भारत की सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता करीब 2 गीगावॉट थी, जो अब 200 गीगावॉट से ज्यादा है। सोलर सेल बनाने की क्षमता भी करीब 40 गीगावॉट तक पहुंच गई है।
निवेशकों से क्या कहा: 15 लाख करोड़ आ चुके, 20 लाख करोड़ के मौके
- बीते एक दशक में रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा (करीब 164 अरब डॉलर) का निवेश आया।
- 2024 के RE-INVEST समिट के बाद, यानी दो साल में ही करीब 6 लाख करोड़ रुपये (63 अरब डॉलर से ज्यादा) का निवेश।
- इस दशक के अंत तक 20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा (करीब 220 अरब डॉलर) के निवेश अवसर बनने का अनुमान।
- अफ्रीका के लिए 200 मिलियन डॉलर की ‘अफ्रीका सोलर फैसिलिटी’ का प्रस्ताव, ताकि जरूरतमंद देशों तक फंडिंग, टेक्नोलॉजी और विशेषज्ञता पहुंचे।
उन्होंने स्टार्टअप्स, IITs और उद्यमियों से ऐसे मॉडल बनाने को कहा, जिनसे घर में 24 घंटे सोलर बिजली मिले, छत की सोलर बिजली से खाना पकाया जा सके (क्लीन कुकिंग), घर पर ही स्कूटी-बाइक-कार चार्ज हो सकें और डेयरी व फसल कटाई के बाद के काम के लिए सोलर उपकरण बनें। बैटरी स्टोरेज के स्वदेशी समाधान को उन्होंने सबसे बड़ा अवसर बताया और कहा कि इससे पैनल बनाने से लेकर इंस्टॉलेशन और सर्विसिंग तक हजारों ग्रीन जॉब बनेंगी।

छत्तीसगढ़ की भागीदारी
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR) की विज्ञप्ति के अनुसार राज्य भी इस समिट में अपना पवेलियन लगाकर ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियां और निवेश संभावनाएं दिखा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन, देश-विदेश के निवेशकों से संवाद और प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद मुख्यमंत्रियों व केंद्रीय मंत्रियों की राउंड टेबल में राज्य का ऊर्जा विजन पेश करना शामिल बताया गया है। केंद्र से राज्यों को मिलने वाले पैसे पर हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट 2026 कब और कहां है?
2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में। उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2 नवंबर को किया।
भारत का नया रिन्यूएबल लक्ष्य क्या है?
2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल क्षमता का लक्ष्य पहले से है (अभी करीब 300 गीगावॉट)। प्रधानमंत्री ने अब अगले 10-11 साल में 500 गीगावॉट नई क्षमता जोड़ने की बात कही है।
पीएम सूर्य घर योजना से कितने घर जुड़े?
प्रधानमंत्री के अनुसार 65 लाख से ज्यादा घर, और हर 6 दिन में करीब एक लाख नए घर जुड़ रहे हैं। लक्ष्य एक करोड़ घरों का है।
स्रोत
- PIB: ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो’ के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ (02 नवंबर 2026, 6:58 PM; रिलीज आईडी 2331739, अंग्रेजी 2331737)
- PIB India (@PIB_India) आधिकारिक X: उद्घाटन भाषण और प्रदर्शनी अवलोकन के वीडियो
- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (@narendramodi) आधिकारिक X: कार्यक्रम का लाइव प्रसारण
- DPR छत्तीसगढ़ (dprcg.gov.in) विज्ञप्ति क्रमांक 10558: वैश्विक ऊर्जा समिट में छत्तीसगढ़ पवेलियन
और बिजनेस/फाइनेंस खबरों के लिए देखें: TimeTrolls फाइनेंस, साथ ही अक्टूबर 2026 में UPI का रिकॉर्ड।








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