फीचर्ड इमेज: राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर 2026) पर गुजरात में महिलाओं से संवाद करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जहां उन्होंने विश्व बैंक की इसी रिपोर्ट का जिक्र किया। फोटो: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India, आधिकारिक X)।
विश्व बैंक (World Bank) की ताजा “पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ: इंडिया, अक्टूबर 2026” के मुताबिक भारत में अत्यधिक गरीबी 2011 के 27.1% से घटकर 2023 में सिर्फ 2.6% रह गई है। रिपोर्ट कहती है कि इस दौरान भारत ने दुनिया में गरीबी में सबसे तेज गिरावटों में से एक दर्ज की और करीब 49.6 करोड़ (496 मिलियन) लोग निम्न-मध्यम आय वाली गरीबी रेखा से ऊपर आए। 30 अक्टूबर को जारी इस रिपोर्ट का जिक्र वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X पर किया और अगले दिन राष्ट्रीय एकता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने भाषण में इसका हवाला दिया।
लेकिन दो पन्नों की इस रिपोर्ट में सिर्फ अच्छी खबर नहीं है। विश्व बैंक ने बढ़ती युवा बेरोजगारी, मजदूरी में भारी असमानता और कुछ राज्यों में गरीबी के सिमट जाने जैसी चुनौतियां भी गिनाई हैं। नीचे आसान भाषा में समझिए रिपोर्ट के आंकड़े और इनका मतलब।

एक नजर में: विश्व बैंक रिपोर्ट के मुख्य आंकड़े
- अत्यधिक गरीबी ($3 प्रतिदिन, 2021 PPP): 2011 में 27.1% → 2023 में 2.6% (लगभग 7.52 करोड़ लोग)
- निम्न-मध्यम आय गरीबी रेखा ($4.20 प्रतिदिन): 57.7% → 16.1% (लगभग 34.2 करोड़ लोग अब भी इस रेखा के नीचे)
- गरीबी से बाहर आए: करीब 49.6 करोड़ लोग (2011 से 2023)
- अनुमान: $4.20 वाली रेखा पर गरीबी दर 2026 में 14.2% से घटकर 2028 तक 12.1%
- गिनी इंडेक्स (असमानता): 23.0 (2023); प्रॉस्पेरिटी गैप 4.9
- बहुआयामी गरीबी (विश्व बैंक MPI): 15.5% (2022-23)
- बिजली: सिर्फ 1% आबादी बिजली से वंचित (2022 सर्वे)
$3 और $4.20 वाली गरीबी रेखा का मतलब क्या है?
विश्व बैंक अलग-अलग देशों की तुलना के लिए गरीबी को डॉलर में “परचेजिंग पावर पैरिटी” (PPP) के आधार पर मापता है, यानी डॉलर को भारत में उसकी असली खरीद क्षमता के हिसाब से बदला जाता है। $3 प्रतिदिन को अंतरराष्ट्रीय अत्यधिक गरीबी रेखा माना जाता है। भारत जैसे निम्न-मध्यम आय वाले देशों के लिए $4.20 प्रतिदिन की रेखा “मध्यम” गरीबी मापती है। दोनों 2021 की PPP कीमतों पर आधारित हैं। एक तीसरी, ऊंची रेखा $8.30 प्रतिदिन (उच्च-मध्यम आय देशों के लिए) है, जिसके नीचे भारत की करीब 80% आबादी 2023 में भी थी।
गरीबी इतनी तेजी से क्यों घटी
रिपोर्ट के अनुसार यह गिरावट मुख्य रूप से तीन वजहों से आई:
- खपत में तेज बढ़ोतरी: गांव और शहर दोनों में परिवारों का उपभोग खर्च बढ़ा। गांवों में सुधार ज्यादा तेज रहा, जिससे गांव-शहर का अंतर घटा।
- रोजगार, खासकर महिलाओं का: 2017 से 2023 के बीच करीब 13.4 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, जो कामकाजी उम्र की आबादी की बढ़त का लगभग दोगुना है। इसमें ग्रामीण महिलाओं के पेड काम में आने का बड़ा हाथ रहा, जिससे परिवारों में कमाने वालों की संख्या बढ़ी।
- सामाजिक सहायता: खाद्य सब्सिडी जैसी योजनाओं के जरिए सरकारी मदद का दायरा बढ़ा।
गैर-मौद्रिक पैमाने पर भी सुधार दिखा। ऑक्सफोर्ड (OPHI) के बहुआयामी गरीबी सूचकांक के मुताबिक बहुआयामी गरीबी 2005-06 के 53.8% से घटकर 2019-21 में 16.4% रह गई।

रिपोर्ट की चेतावनियां: बेरोजगारी, असमानता और गरीबी का “भूगोल”
- युवा बेरोजगारी बढ़ी: FY2026 की पहली तिमाही से FY2027 की पहली तिमाही के बीच युवा बेरोजगारी 14.6% से बढ़कर 15.9% हो गई, खासकर ग्रामीण युवा महिलाओं में।
- असली कमाई ठहरी: रोजगार बढ़ा, लेकिन ज्यादातर कम उत्पादकता वाले कामों में, इसलिए वास्तविक कमाई लगभग जस की तस रही।
- मजदूरी में भारी अंतर: 2023 में सबसे ऊपर के 10% कामगारों की औसत (मीडियन) कमाई सबसे नीचे के 10% से करीब 13 गुना थी।
- कुछ राज्यों में सिमटी गरीबी: उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक फैली पट्टी के राज्यों में देश के करीब 57% गरीब रहते हैं। आगे गरीबी घटाना इन्हीं राज्यों में बेहतर रोजगार पर निर्भर करेगा।
- गांव अब भी पीछे: $4.20 की रेखा पर ग्रामीण गरीबी 19.3% और शहरी 8.6% है; 0-14 साल के बच्चों में यह 21.8% है।

आंकड़ों पर विश्व बैंक की अपनी सावधानी
रिपोर्ट साफ कहती है कि ये अनुमान 2011-12 के उपभोग सर्वे (CES) और 2022-23 व 2023-24 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वे (HCES) पर आधारित हैं। सर्वे के तरीके में सुधार हुआ है, इसलिए 2022-23 से 2023-24 के बीच दिखी बड़ी बढ़त में “असली सुधार और बेहतर मापन” दोनों का असर हो सकता है। विश्व बैंक के मुताबिक सर्वे अमीर परिवारों का पूरा उपभोग नहीं पकड़ पाते, इसलिए असमानता असल से कम दिख सकती है। 2028 तक के अनुमान माइक्रो-सिमुलेशन पर आधारित हैं और नए आंकड़े आने पर बदल सकते हैं।
सरकार ने क्या कहा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अक्टूबर को X पर रिपोर्ट के मुख्य बिंदु साझा करते हुए इसे सरकार की लगातार नीतिगत कोशिशों का नतीजा बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस पर कहा कि विश्व बैंक की रिपोर्ट बताती है कि 2024 से पहले के 10-12 वर्षों में 50 करोड़ भारतीयों ने गरीबी को परास्त किया है। सरकारी योजनाओं से जुड़ी हाल की खबरें, जैसे PM-किसान की 24वीं किस्त और अक्टूबर का GST कलेक्शन, भी पढ़ें।

FAQ
विश्व बैंक के मुताबिक भारत में अत्यधिक गरीबी कितनी है?
$3 प्रतिदिन (2021 PPP) की रेखा पर 2023 में 2.6%, जो 2011 में 27.1% थी।
कितने लोग गरीबी से बाहर आए?
2011 से 2023 के बीच करीब 49.6 करोड़ लोग $4.20 प्रतिदिन वाली निम्न-मध्यम आय गरीबी रेखा से ऊपर आए।
यह रिपोर्ट कब जारी हुई?
“इंडिया पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ: अक्टूबर 2026” 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई।
रिपोर्ट में कौन-सी चिंताएं बताई गई हैं?
युवा बेरोजगारी का 15.9% तक बढ़ना, वास्तविक कमाई का ठहराव, मजदूरी में 13 गुना अंतर और यूपी से बंगाल तक की पट्टी में 57% गरीबों का होना।
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स्रोत
- World Bank, India Poverty and Equity Brief: October 2026 (documents.worldbank.org, दस्तावेज 099722104222534584)
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आधिकारिक X (x.com/nsitharaman/status/2116132720023920819, 30 अक्टूबर 2026)
- प्रधानमंत्री कार्यालय, आधिकारिक X (x.com/PMOIndia/status/2116531065628340716) और MyGov India, आधिकारिक X (x.com/mygovindia/status/2116614380146335877), 31 अक्टूबर 2026
- The Hindu, Mint, BusinessLine (30-31 अक्टूबर 2026)








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