पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र शुक्रवार, 23 अक्टूबर को अपने दूसरे ही दिन बड़े टकराव का गवाह बना। भोलाथ से कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा को बाकी सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया। सदन के भीतर मुद्दा था मानसा में एक नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या, पर कार्रवाई की वजह बनी एक टिप्पणी।
सुबह का घटनाक्रम: काले दुपट्टे और ‘लानत पत्र’
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक कांग्रेस विधायक काले दुपट्टे पहनकर और एक ‘लानत पत्र’ लेकर सदन पहुंचे। उनका विरोध 13 अक्टूबर को मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या को लेकर था। कांग्रेस ने इस मामले में मुख्यमंत्री भगवंत मान का इस्तीफा मांगा और सुबह करीब 10:34 बजे सदन से वॉकआउट कर दिया।
पंजाब में नशा पिछले कई चुनावों से सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। ऐसे में एक नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का सीधा मौका बन गई। विपक्ष का कहना है कि ज़मीनी हालात सरकार के दावों से मेल नहीं खाते। हत्या की जांच की प्रगति पर सरकार की ओर से सदन में विस्तृत जवाब का इंतज़ार है।
निलंबन क्यों हुआ
वॉकआउट के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने खैहरा के निलंबन का प्रस्ताव रखा। सरकार की आपत्ति यह थी कि खैहरा ने सदन में ‘बंधुआ मज़दूर’ जैसी टिप्पणी की और स्पीकर के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया। स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की अध्यक्षता में यह प्रस्ताव पारित हो गया। उस वक्त विपक्ष सदन में मौजूद नहीं था (द स्टेट्समैन)।
विपक्ष की गैरमौजूदगी में किसी विधायक का निलंबन तकनीकी रूप से नियमों के भीतर हो सकता है, पर इससे सरकार पर यह आरोप लगना तय था कि उसने विरोध की आवाज़ दबाने के लिए मौके का इस्तेमाल किया। दूसरी तरफ, सदन की मर्यादा और चेयर के सम्मान का सवाल भी उतना ही असली है। सदन में स्पीकर के लिए इस्तेमाल हुई भाषा पर कार्रवाई की परंपरा लगभग हर विधानसभा में रही है।
खैहरा का पलटवार
निलंबन के बाद खैहरा ने X पर लिखा कि अगर पंजाब के लिए बोलना अपराध है, परविंदर झोटा के लिए न्याय मांगना अपराध है, या गुलज़ार दिड़बा की मौत के लिए हरपाल चीमा को आरोपी बताना अपराध है, तो खैहरा ऐसे अपराध हर दिन और हर जगह करेगा। उन्होंने इस कार्रवाई को अपने खिलाफ “एक और बदले की कार्रवाई” बताया।
I welcome yet another vindictive action against me.
सुखपाल खैहरा, X पर (द स्टेट्समैन के अनुसार)
यहां एक बात साफ कर देना ज़रूरी है। गुलज़ार दिड़बा की मौत को लेकर हरपाल चीमा पर खैहरा का आरोप सिर्फ एक राजनीतिक आरोप है। किसी अदालत या जांच एजेंसी ने इस बारे में कोई निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। इस आरोप पर चीमा की ओर से अलग से कोई विस्तृत जवाब हमें उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिला, इसलिए उनके जवाब का इंतज़ार है।
वीडियो स्रोत: News18 Punjab (YouTube) | मूल वीडियो देखें
‘चिट्टा पार्टी’ से 1984 तक: सदन की तल्ख़ी
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक बहस के दौरान चीमा और कांग्रेस विधायक परगट सिंह के बीच भी तीखी नोकझोंक हुई। चीमा ने परगट से कहा, “Mr Pargat Singh, you are a member of the chitta party.” ‘चिट्टा’ पंजाब में हेरोइन के लिए बोला जाने वाला शब्द है। चीमा ने 1984 के दंगों और परगट के पुराने अकाली दल वाले दौर का भी ज़िक्र किया। यह बताता है कि नशे का मुद्दा अब नीति की बहस कम और एक-दूसरे पर लेबल लगाने की लड़ाई ज़्यादा बन गया है।
इसी सत्र में परगट सिंह ने मुख्यमंत्री मान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव भी दिया है (हिंदुस्तान टाइम्स)। उनका आरोप है कि बेअदबी विरोधी कानून पर 2018 के विधेयक और उससे जुड़े दस्तावेज़ों को लेकर मुख्यमंत्री ने सदन को गुमराह किया। इस साल 13 अप्रैल को संशोधन विधेयक पारित हुआ था। यह आरोप भी अभी विपक्ष का दावा है, जिस पर स्पीकर को फैसला करना है।
इस टकराव का बड़ा मतलब
पंजाब में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह सत्र दोनों दलों के लिए मंच बन गया है। AAP सरकार ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ जैसे अभियानों को अपनी उपलब्धि बताती है, जबकि कांग्रेस एक नशा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या को उसी दावे के खिलाफ सबूत की तरह पेश कर रही है। नशे का मुद्दा सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार ने भी नशा मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया है, और राज्यों की कार्रवाई इसी कसौटी पर परखी जाएगी।
लोकतंत्र के लिहाज़ से सबसे ज़रूरी बात यह है कि सदन में बहस हो। विपक्ष का वॉकआउट और उसके बाद विपक्ष की गैरमौजूदगी में निलंबन, दोनों ही उस बहस को कमज़ोर करते हैं। मानसा की हत्या की जांच कहां तक पहुंची, आरोपी कौन हैं, और नशा तस्करी के खिलाफ अभियान का ज़मीनी असर क्या है, इन सवालों के जवाब नारों से नहीं, आंकड़ों से मिलेंगे।
अब आगे
विशेष सत्र 27 अक्टूबर तक चलना है। नज़र इस पर रहेगी कि क्या कांग्रेस खैहरा के निलंबन के खिलाफ कोई औपचारिक कदम उठाती है, परगट सिंह के विशेषाधिकार प्रस्ताव पर स्पीकर क्या फैसला लेते हैं, और मानसा हत्याकांड की जांच पर सरकार सदन में क्या जानकारी रखती है।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: हिंदुस्तान टाइम्स, द स्टेट्समैन, हिंदुस्तान टाइम्स (विशेषाधिकार प्रस्ताव), News18 Punjab (YouTube)।








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