कोलकाता के कालीघाट इलाके में शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी के पारिवारिक आवास के बाहर दो गुटों के बीच झड़प हुई। 7 नवंबर को अभिषेक बनर्जी का 39वां जन्मदिन है और उनके समर्थक रात में ही जश्न की तैयारी कर रहे थे। हिंदुस्तान टाइम्स ने जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों के हवाले से लिखा है कि रात करीब 2 बजे से 3:30 बजे के बीच कई दौर में झड़प हुई और कथित तौर पर आठ लोग घायल हुए। अभिषेक बनर्जी ने इसे भाजपा कार्यकर्ताओं का सुनियोजित हमला बताया है, जबकि भाजपा नेता और राज्य के मंत्री दिलीप घोष ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे जन्मदिन के जश्न पर हुई प्रतिक्रिया बताया।
पुलिस ने अब तक किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सुबह करीब 7 बजे एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि स्थिति नियंत्रण में है, आवास के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है और कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिसकर्मियों के घायल होने के आरोप की उन्होंने पुष्टि नहीं की।

रात 2 बजे कालीघाट में क्या हुआ
अलग-अलग रिपोर्टों में घटनाक्रम का जो क्रम सामने आया है, उसके अनुसार अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास उनके जन्मदिन के कटआउट और बैनर लगाए गए थे। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार भाजपा समर्थकों पर आरोप है कि उन्होंने “चोर” और “गोरू चोर” (मवेशी चोर) जैसे नारे लगाए और बधाई वाले बैनर-कटआउट फाड़ दिए। एनडीटीवी ने लिखा है कि नारेबाजी से शुरू हुई बहस हाथापाई और ईंट-पत्थर तक पहुंच गई। अभिषेक बनर्जी ने जो वीडियो साझा किया, उसमें कुछ लोग बैनर और पोस्टर फाड़ते दिखते हैं।
दूसरी ओर भाजपा समर्थकों की कहानी अलग है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उनका कहना है कि वे रविवार की काली पूजा के लिए कालीघाट के कुम्हारों से मूर्तियां खरीदने जा रहे थे, तभी उन पर हमला हुआ। भास्कर इंग्लिश ने लिखा है कि दोनों तरफ से ईंट-पत्थर चलने के आरोप हैं और बाद में पुलिस ने दोनों गुटों को अलग कर सड़क के बीच बैरिकेड लगा दिए। यानी इस वक्त दो परस्पर विरोधी दावे सामने हैं और पुलिस जांच से ही साफ होगा कि झड़प किसने शुरू की।
ईटीवी भारत (बांग्ला) की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ी मौके पर पहुंची। एक तृणमूल कार्यकर्ता को हिरासत में लिए जाने के बाद अभिषेक बनर्जी की पुलिस से तीखी बहस हुई और वे घर के बाहर फुटपाथ पर धरने पर बैठ गए। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार यह धरना सुबह करीब 6:30 बजे तक चला, जबकि हिंसा उससे घंटों पहले थम चुकी थी। ईटीवी भारत के मुताबिक हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता को छोड़े जाने के बाद ही वे घर के अंदर गए।
अभिषेक बनर्जी के आरोप: “सातवीं कोशिश”
अभिषेक बनर्जी ने रात में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया। इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी और द स्टेट्समैन ने उनकी पोस्ट अंग्रेजी में ज्यों की त्यों छापी है:
“After I released the recce video this morning, my house was attacked just now, at 2 AM by BJP goons, right under the watch of the Kolkata police.”
अभिषेक बनर्जी, X पर पोस्ट (हिंदी आशय: सुबह रेकी का वीडियो जारी करने के बाद अभी रात 2 बजे कोलकाता पुलिस की मौजूदगी में भाजपा के गुंडों ने मेरे घर पर हमला किया)
बाद की एक पोस्ट में उन्होंने इसे पिछले छह महीनों में अपनी जान लेने की “सातवीं कोशिश” बताया और पुलिस के साथ-साथ अदालतों पर भी सवाल उठाए। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उन्होंने लिखा: “This is the seventh attempt on my life in the last six months. Yet, there has been no police action and no judicial intervention.” यानी अभिषेक का आरोप है कि इतनी घटनाओं के बावजूद न पुलिस ने कार्रवाई की, न अदालत ने दखल दिया।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने घायलों का ब्योरा भी दिया। एनडीटीवी के अनुसार उन्होंने कहा कि उनके एक साथी तपस के अंगूठे के पास का ऊतक कुचल गया है और डॉक्टर ने प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत बताई है, जबकि एक अन्य को आंख के नीचे की हड्डी में फ्रैक्चर है। अभिषेक ने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा समर्थक रिवॉल्वर लेकर आए थे और उनका इरादा जान लेने का था। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक रात करीब 3 बजे उन्होंने कहा कि उन्होंने एक पुलिस अधिकारी को भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा थप्पड़ मारे जाते देखा। ये सभी अभिषेक बनर्जी के आरोप हैं; पुलिस ने इनकी पुष्टि नहीं की है।
भाजपा का पक्ष: दिलीप घोष ने आरोप खारिज किए

राज्य सरकार में मंत्री और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने अभिषेक के आरोपों को सिरे से खारिज किया। न्यूज एजेंसी एएनआई के वीडियो के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने न्यू टाउन में दिया गया उनका बयान इस तरह छापा है:
“This is the first time we’ve seen a politician’s birthday being celebrated on the footpath. If someone creates a disturbance, there is bound to be a backlash. Besides, who has the time to kill Abhishek Banerjee?”
दिलीप घोष, भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री (हिंदी आशय: पहली बार किसी नेता का जन्मदिन फुटपाथ पर मनते देखा; कोई गड़बड़ी करेगा तो प्रतिक्रिया होगी ही; अभिषेक बनर्जी को मारने का समय किसके पास है)
हिंदुस्तान टाइम्स ने सुबह की सैर के दौरान दिए घोष के बयान का एक और हिस्सा छापा है, जिसमें उन्होंने कहा कि लोग ऐसे आयोजनों के लिए आमतौर पर हॉल किराए पर लेते हैं और चुनावी हार के बाद लोग होश खो बैठते हैं। एनडीटीवी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि भाजपा ने पूरे मामले को “ड्रामा” बताया है। कोलकाता पुलिस की ओर से अब तक कोई औपचारिक बयान या एफआईआर का ब्योरा सार्वजनिक नहीं हुआ है; इस पर आधिकारिक जवाब का इंतज़ार है।
एक दिन पहले रेकी का आरोप
यह झड़प अचानक नहीं आई। शुक्रवार, 6 नवंबर को अभिषेक बनर्जी ने एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया था कि पिछले दो दिनों से कुछ अज्ञात लोग उनके दफ्तर और घर की रेकी कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उन्होंने लिखा था कि टोकने पर उन लोगों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया। उन्होंने पूछा था कि एक निर्वाचित सांसद के घर और दफ्तर की निगरानी किसके आदेश पर हो रही है, और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्रालय, कोलकाता पुलिस और पश्चिम बंगाल पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की थी। इस रेकी के आरोप पर भी पुलिस का औपचारिक जवाब सामने नहीं आया है।

सत्ता बदलने के बाद बंगाल की नई सियासी तस्वीर
इस घटना को समझने के लिए बंगाल की बदली हुई राजनीति को देखना जरूरी है। मई 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद सुवेंदु अधिकारी 9 मई को राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री बने। जो कोलकाता पुलिस कभी ममता बनर्जी सरकार के अधीन थी, वह अब भाजपा सरकार के अधीन है। इसलिए जब अभिषेक बनर्जी कहते हैं कि हमला “कोलकाता पुलिस की निगरानी में” हुआ, तो उनका निशाना सीधे राज्य सरकार पर है। वहीं दिलीप घोष का “चुनावी हार” वाला बयान इसी पृष्ठभूमि की ओर इशारा करता है।
सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला टकराव भी नहीं है। द हिंदू और इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक 30 मई 2026 को सोनारपुर में चुनाव बाद की हिंसा के एक पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे अभिषेक बनर्जी पर भीड़ ने हमला किया था; उस मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद कैमक स्ट्रीट स्थित उनके दफ्तर से होर्डिंग हटाने को लेकर हुए विवाद में पुलिस ने अभिषेक और डेरेक ओ’ब्रायन समेत तृणमूल नेताओं को एफआईआर में नामजद किया था। पिछले महीने TimeTrolls ने SIR पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अभिषेक की नए चुनाव की मांग पर भी रिपोर्ट की थी।
अदालतों पर टिप्पणी क्यों अहम है

इस बार अभिषेक के बयान का एक हिस्सा राजनीति से आगे जाता है। उन्होंने कलकत्ता हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को सीधे संबोधित करते हुए लिखा कि अदालतें “मूक दर्शक” बनी हुई हैं। किसी मौजूदा सांसद की ओर से न्यायपालिका पर इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी असामान्य है, और आने वाले दिनों में इस पर कानूनी और राजनीतिक बहस हो सकती है। फिलहाल किसी अदालत ने इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
आगे किन बातों पर नजर रहेगी
- कोलकाता पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान और एफआईआर का ब्योरा कब सार्वजनिक करती है, और क्या दोनों पक्षों की शिकायतें दर्ज होती हैं।
- अभिषेक बनर्जी के साझा किए गए सीसीटीवी फुटेज और रेकी वाले वीडियो की जांच से क्या निकलता है।
- तृणमूल इस मुद्दे पर सड़क पर विरोध या लोकसभा अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत का रास्ता अपनाती है या नहीं।
- रविवार की काली पूजा के दौरान कालीघाट इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कैसी रहती है।
अभी तक की तस्वीर यह है कि झड़प हुई, लोग घायल हुए और पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन हमले के पीछे कौन था, इस पर तृणमूल और भाजपा के दावे एक-दूसरे के उलट हैं। हत्या की साजिश और पुलिस की मिलीभगत जैसे आरोप अभिषेक बनर्जी के हैं, जिनकी किसी जांच एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है। पुलिस या राज्य सरकार का आधिकारिक बयान आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
रिपोर्ट के आधार: हिंदुस्तान टाइम्स, एनडीटीवी, इंडियन एक्सप्रेस, द स्टेट्समैन, टाइम्स ऑफ इंडिया, ईटीवी भारत (बांग्ला), भास्कर इंग्लिश (सभी 7 नवंबर 2026); अभिषेक बनर्जी का X हैंडल @abhishekaitc।








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