फीचर्ड इमेज क्रेडिट: CM फोटो – DPR छत्तीसगढ़; पृष्ठभूमि – AI से बनी सांकेतिक तस्वीर।
छत्तीसगढ़ के लाखों मजदूरों और नियोक्ताओं के लिए वेतन से जुड़ा कानूनी ढांचा बदल गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार में राज्य के श्रम विभाग ने केंद्र की मजदूरी संहिता, 2019 (Code on Wages) के तहत मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026 की अंतिम अधिसूचना 28 अक्टूबर 2026 को राजपत्र (असाधारण) में छाप दी है। DPR छत्तीसगढ़ ने 1 नवंबर को बताया कि राजपत्र में छपते ही ये नियम लागू हो गए हैं। श्रम विभाग का जिम्मा राज्य के श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के पास है।

कौन से पुराने नियम खत्म हुए
नए नियमों ने दो पुराने राज्य नियमों की जगह ली है: न्यूनतम वेतन (छत्तीसगढ़) नियम, 1958 और छत्तीसगढ़ वेतन भुगतान नियम, 1962। ये नियम मध्य प्रदेश के ज़माने से चले आ रहे थे। अब न्यूनतम मजदूरी तय करने, समय पर वेतन देने, बोनस और समान पारिश्रमिक जैसे सभी मामले एक ही संहिता के तहत चलेंगे।
नियम कैसे बने
श्रम विभाग ने इनका प्रारूप 13 अप्रैल 2026 को राजपत्र में छापा था। उस पर 45 दिनों तक नागरिकों, श्रमिक संगठनों और नियोक्ताओं से आपत्तियाँ और सुझाव माँगे गए। उन पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी हुए।
चार श्रम संहिताएँ: बड़ी तस्वीर
केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर चार श्रम संहिताएँ बनाई हैं: मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता। श्रम समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए हर राज्य को इन्हें लागू करने के लिए अपने नियम बनाने होते हैं। केंद्र में यह विभाग श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के पास है, जो आज ही राज्योत्सव का उद्घाटन करने रायपुर आ रहे हैं।
मजदूरों के लिए क्या बदलता है
1. न्यूनतम मजदूरी हर कामगार का हक
पुराने कानून में न्यूनतम वेतन सिर्फ “अनुसूचित रोजगारों” यानी सूची में दर्ज कामों पर लागू होता था। मजदूरी संहिता में न्यूनतम मजदूरी का हक संगठित और असंगठित, दोनों तरह के सभी कामगारों तक फैलाया गया है। उदाहरण: किसी दुकान में सफाई या डिलीवरी का काम करने वाला कर्मचारी, जिसका काम पहले किसी सूची में नहीं था, अब भी अधिसूचित न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन नहीं पा सकता।
2. समय पर वेतन
संहिता वेतन भुगतान की समय-सीमा तय करती है। दैनिक मजदूरी पाने वाले को उसी पाली के अंत में, साप्ताहिक मजदूरी वाले को सप्ताह की छुट्टी से पहले, और मासिक वेतन वाले को अगले महीने की 7 तारीख तक भुगतान होना चाहिए। उदाहरण: रायपुर की किसी फैक्ट्री में मासिक वेतन पाने वाले मजदूर को अक्टूबर का वेतन 7 नवंबर तक मिल जाना चाहिए। नौकरी छोड़ने या हटाए जाने पर बकाया वेतन दो कार्य दिवस में देना होगा।
3. “वेतन” की एक परिभाषा
संहिता में “वेतन” की एक समान परिभाषा है, जिसमें भत्ते कुल पारिश्रमिक के 50% से ज़्यादा होने पर अतिरिक्त हिस्सा वेतन में जोड़ा जाता है। इसका असर पीएफ, ग्रेच्युटी जैसी गणनाओं पर पड़ता है। उदाहरण: अगर किसी का कुल पैकेज 20,000 रुपये है और मूल वेतन सिर्फ 7,000 रुपये, तो 10,000 रुपये तक को वेतन माना जाएगा।
4. महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन
एक जैसे काम के लिए लिंग के आधार पर वेतन में भेदभाव पर रोक है। भर्ती की शर्तों में भी भेदभाव नहीं किया जा सकता।
5. कटौती पर सीमा और शिकायत
वेतन से कुल कटौती की सीमा तय है और बिना कारण कटौती नहीं हो सकती। शिकायत श्रम विभाग के निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता (Inspector-cum-Facilitator) के पास की जा सकती है।

दुकान, फैक्ट्री और ठेकेदारों के लिए
- वेतन रजिस्टर, भुगतान की तारीखें और रिकॉर्ड नए नियमों के हिसाब से अपडेट करें।
- सैलरी स्ट्रक्चर में भत्तों का हिस्सा 50% से ऊपर है तो अपने सलाहकार से असर समझ लें।
- पुराने 1958/1962 के नियमों के फॉर्म और रिटर्न अब लागू नहीं हैं।
न्यूनतम मजदूरी की दरें बदलीं क्या?
विज्ञप्ति में नई दरों का ज़िक्र नहीं है। दरें श्रम विभाग की अलग अधिसूचना से तय होती हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर “नई दरें” वाले दावों पर तभी भरोसा करें जब वे विभाग की अधिसूचना से मेल खाएँ।

FAQ
नियम कब से लागू हैं?
28 अक्टूबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशन के साथ।
शिकायत कहाँ करें?
जिले के श्रम कार्यालय में।
यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का पूरा कार्यक्रम।
स्रोत: DPR छत्तीसगढ़, 1 नवंबर 2026; छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण), 28 अक्टूबर 2026; मजदूरी संहिता, 2019। Last updated: 1 Nov 2026







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