रायपुर, 30 अक्टूबर 2026 (शाम 4 बजे तक की जानकारी): चक्रवात ‘अर्नब’ का असर भले अब कमजोर पड़ गया हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के कई जिलों में खेतों में पकी खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को फसल क्षति का तत्काल सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। राज्य जनसंपर्क विभाग की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक नुकसान का आकलन होने के बाद पात्र किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र यानी आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों और तय मानदंडों के हिसाब से सहायता राशि दी जाएगी।
यह खबर उन लाखों किसान परिवारों के लिए अहम है जिनकी फसल कटाई से ठीक पहले बारिश और तेज हवा की चपेट में आई है। नीचे हमने आसान भाषा में समझाया है कि सरकार ने क्या कहा है, सर्वे कैसे होगा, किसान अभी क्या कर सकते हैं और आगे मौसम कैसा रहने वाला है।
सरकार के निर्देश में असल में क्या है
जनसंपर्क विभाग (dprcg.gov.in) पर 30 अक्टूबर को जारी विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने तीन बातें साफ तौर पर कही हैं। पहली, प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का जल्द आकलन हो। दूसरी, सहायता राशि आर.बी.सी. 6-4 और तय मानदंडों के मुताबिक पात्र किसानों तक पहुंचे। तीसरी, सर्वे से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया में बेवजह देरी न हो और जिला प्रशासन संवेदनशीलता से काम करे। समाचार एजेंसी PTI ने भी अधिकारियों के हवाले से यही जानकारी दी है।
इससे एक दिन पहले, 29 अक्टूबर को आपदा प्रबंधन एवं राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि नुकसान का आकलन अनावरी रिपोर्ट के आधार पर होगा और पात्र किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा आर.बी.सी. 6-4 के तहत मुआवजा मिलेगा। यानी राहत के दो रास्ते हैं: एक राज्य सरकार की आपदा सहायता और दूसरा फसल बीमा का दावा।
खेतों में कितना और कहां नुकसान दिख रहा है
अलग-अलग जिलों से आ रही रिपोर्टें बताती हैं कि नुकसान बिखरा हुआ है, यानी हर गांव में एक जैसा नहीं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक बलौदाबाजार जिले के सुहेला इलाके में 28 और 29 अक्टूबर की रुक-रुककर बारिश और हवा से पकी धान चादर की तरह खेतों में बिछ गई। ETV भारत की बालोद से ग्राउंड रिपोर्ट में हजारों एकड़ में फसल गिरने और खेतों में पानी भरने की बात कही गई है। द हितवाद के अनुसार कवर्धा और बलौदाबाजार में भी खड़ी धान गिरी है, जबकि कोंडागांव में तेज हवा से एक घर पर पेड़ गिरा, हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
गिरी हुई फसल के साथ दिक्कत सिर्फ उत्पादन घटने की नहीं है। गीली बालियों में दाने काले पड़ सकते हैं, अंकुर निकल सकते हैं और फफूंद लग सकती है। दलदली खेतों में हार्वेस्टर उतारना भी मुश्किल हो जाता है, इसलिए कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भरता और खर्च दोनों बढ़ते हैं। यही वजह है कि किसान जल्द सर्वे की मांग कर रहे हैं, ताकि नुकसान का रिकॉर्ड फसल काटने से पहले दर्ज हो सके।
अनावरी और आर.बी.सी. 6-4 को आसान भाषा में समझें
अनावरी राजस्व विभाग का वह आकलन है जिसमें किसी इलाके की फसल की वास्तविक पैदावार की तुलना सामान्य पैदावार से की जाती है। पटवारी और राजस्व अमला खेतों में जाकर नुकसान का प्रतिशत तय करता है। यही आंकड़ा आगे राहत की पात्रता का आधार बनता है।
आर.बी.सी. 6-4 छत्तीसगढ़ के राजस्व पुस्तक परिपत्र का वह खंड है जिसके तहत प्राकृतिक आपदा, जैसे अतिवृष्टि, ओलावृष्टि या तूफान से हुए नुकसान पर सरकारी आर्थिक सहायता दी जाती है। सहायता की राशि नुकसान के प्रतिशत, फसल के प्रकार और जमीन के रकबे जैसे मानदंडों पर तय होती है। इस बार कितनी राशि दी जाएगी, इसका कोई नया आंकड़ा सरकार ने अभी घोषित नहीं किया है, इसलिए किसी अनुमानित रकम पर भरोसा न करें और अपने तहसील कार्यालय से ही पुष्टि करें।
एक व्यावहारिक पेच भी है। मंत्री टंकराम वर्मा ने 29 अक्टूबर को खुद माना था कि राज्य के पटवारी करीब दो हफ्ते से हड़ताल पर हैं और इस समय धान खरीदी से पहले गिरदावरी का काम चल रहा है। सर्वे का बड़ा हिस्सा पटवारियों के जिम्मे होता है, इसलिए जमीन पर सर्वे कितनी तेजी से होगा, यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि जिलों में राजस्व अमले की व्यवस्था कैसे की जाती है। इस हड़ताल पर हमारी पिछली रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।
प्रभावित किसान अभी क्या करें
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने 29 अक्टूबर की सलाह में किसानों को कुछ जरूरी बातें बताई थीं। इनके साथ बीमा से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया भी जोड़कर देखें:
- गिरी या डूबी फसल की तारीख के साथ फोटो और वीडियो लें और उन्हें संभालकर रखें। IGKV ने भी नुकसान की तस्वीरें और रिकॉर्ड रखने की सलाह दी है।
- अगर आपकी फसल का बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में है, तो नुकसान की सूचना जल्द से जल्द दें। योजना के नियमों में स्थानीय आपदा और कटाई के बाद खेत में सूख रही फसल के नुकसान की सूचना आम तौर पर 72 घंटे के भीतर देनी होती है। सूचना Crop Insurance ऐप, बीमा कंपनी, बैंक या कृषि विभाग के जरिए दी जा सकती है, और राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14447 भी है।
- अपने हल्का पटवारी, ग्राम पंचायत या तहसील कार्यालय में लिखित आवेदन देकर नुकसान दर्ज कराएं और उसकी पावती रखें।
- खेत से अतिरिक्त पानी निकालें और मौसम साफ होने तक कटाई दो-तीन दिन टालने की IGKV की सलाह पर ध्यान दें। कटी हुई उपज को सुरक्षित और सूखी जगह पर रखें।
- बारिश के दौरान खाद या कीटनाशक का छिड़काव न करें, क्योंकि वह बह जाता है और पैसा बेकार जाता है।
धान खरीदी पर इसका क्या असर पड़ सकता है
PTI के मुताबिक राज्य सरकार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की घोषणा कर चुकी है। दर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल और सीमा 21 क्विंटल प्रति एकड़ तय है। खरीदी में अब करीब दो हफ्ते बचे हैं। ऐसे में जिन किसानों की फसल गीली हुई है, उनके सामने दाने की गुणवत्ता और नमी का सवाल रहेगा, क्योंकि खरीदी केंद्रों पर गुणवत्ता के मानक लागू होते हैं। इसलिए फसल को अच्छी तरह सुखाकर ही केंद्र पर ले जाना समझदारी होगी।
मौसम अब कैसा रहेगा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के बुलेटिन के अनुसार ‘अर्नब’ के अवशेष वाला डिप्रेशन 29 अक्टूबर की शाम कमजोर होकर मध्य छत्तीसगढ़ और पास के ओडिशा के ऊपर सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र में बदल गया था और इसके और कमजोर होने का अनुमान है। यानी छत्तीसगढ़ में बारिश का दौर धीरे-धीरे थमने की उम्मीद है। हमने 29 अक्टूबर को अर्नब के डिप्रेशन बनने पर विस्तार से लिखा था।
हालांकि, द हिंदू की लाइव कवरेज में IMD के हवाले से बताया गया है कि अंडमान सागर के ऊपर बना एक नया निम्न दबाव क्षेत्र 31 अक्टूबर के आसपास डिप्रेशन बन सकता है और अगले दो दिनों में आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। छत्तीसगढ़ पर इसका कितना असर होगा, यह अभी साफ नहीं है। किसान अपने जिले के लिए IMD रायपुर और कृषि विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखें और कटाई की योजना उसी हिसाब से बनाएं।
हमारी राय: रफ्तार ही असली राहत है
सर्वे का आदेश आना पहला कदम है। किसानों के लिए असली फर्क इस बात से पड़ेगा कि सर्वे दल कितनी जल्दी खेतों तक पहुंचते हैं, क्योंकि कटाई होने के बाद गिरी फसल का नुकसान साबित करना मुश्किल हो जाता है। पटवारियों की हड़ताल और धान खरीदी की तैयारी के बीच प्रशासन के सामने यह दोहरी चुनौती है। जैसे ही सरकार सहायता राशि या सर्वे की समय-सीमा पर कोई नया आदेश जारी करेगी, हम यह खबर अपडेट करेंगे।
स्रोत: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (dprcg.gov.in) की 30 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति, PTI, नईदुनिया, दैनिक भास्कर, ETV भारत, द हितवाद (IGKV कृषि मौसम सलाह), द हिंदू (IMD अपडेट) और IMD बुलेटिन। जानकारी 30 अक्टूबर 2026, शाम 4 बजे (IST) तक की।







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