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खड़गे ने विपक्ष के ‘जन महाभियोग’ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगाए 6 आरोप, भाजपा ने बताया संसद का मज़ाक

INDIA गठबंधन ने शनिवार को मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली आवास पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक "जन महाभियोग" किया। खड़गे ने छह आरोप रखे और CEC को हटाने की मांग की, जबकि भाजपा सांसद संबित पात्रा ने इसे संसद का मज़ाक बताया।

मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीरों के साथ जन महाभियोग पर ग्राफिक
Photos: Wikimedia Commons / Prime Minister's Office, Government of India (GODL-India) - Mallikarjun Kharge; Wikimedia Commons / Prime Minister's Office (GODL-India) - Gyanesh Kumar. ग्राफिक: timetrolls.in

मुख्य बातें

  • खड़गे के प्रस्ताव में कौन से छह आरोप
  • खड़गे ने अपने भाषण में क्या कहा
  • मंच पर और कौन, क्या बोला
  • भाजपा का जवाब: "संसद का मज़ाक"

दिल्ली के 10 राजाजी मार्ग पर शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 की दोपहर एक अलग तरह की “कार्यवाही” हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के सरकारी आवास के लॉन में विपक्षी INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक “जन महाभियोग” चलाया। इसकी अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की और खड़गे ने CEC को पद से हटाने का प्रस्ताव रखा, जिसमें छह आरोप गिनाए गए। उसी समय दिल्ली में भाजपा सांसद संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे कार्यक्रम को संसद का मज़ाक बताया।

यह कोई संवैधानिक या कानूनी प्रक्रिया नहीं थी। बीबीसी हिंदी ने साफ लिखा है कि यह कार्यक्रम संसद की औपचारिक कार्यवाही या संवैधानिक महाभियोग का विकल्प नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक राजनीतिक विरोध है। फिर भी इसकी सियासी अहमियत इस बात में है कि यह 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली विपक्ष की बड़ी रैली से ठीक एक दिन पहले हुआ।

खड़गे के प्रस्ताव में कौन से छह आरोप

एनडीटीवी इंडिया और एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्ताव में ज्ञानेश कुमार पर ये आरोप लगाए गए। ये सभी विपक्ष के आरोप हैं, जिनकी किसी अदालत या जांच में पुष्टि नहीं हुई है:

  1. चुनाव चुराने की साजिश रचना।
  2. 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाना।
  3. संसद की निगरानी या जानकारी के बिना “फॉर्म 6” में बदलाव करना।
  4. ECINET के जरिए मतदाता सूचियों पर कब्जा करना।
  5. बाकी दो चुनाव आयुक्तों को प्रक्रिया से बाहर रखना।
  6. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करना।

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक X हैंडल @INCIndia पर भी यही छह बिंदु “Resolution For The Public Impeachment” शीर्षक से साझा किए। प्रस्ताव के साथ विपक्ष ने तीन मांगें भी रखीं: CEC को तुरंत पद से हटाया जाए, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा 2023 का कानून रद्द हो और मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) रोका जाए।

खड़गे ने अपने भाषण में क्या कहा

खड़गे ने भाषण की शुरुआत सरदार वल्लभभाई पटेल और इंदिरा गांधी को याद करते हुए की, जिनकी आज क्रमशः 151वीं जयंती और 42वीं पुण्यतिथि है। एनडीटीवी इंडिया के अनुसार उन्होंने कहा:

ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर चुनाव आयोग को चला रहे हैं। हमारा उनसे कोई निजी बैर नहीं है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि चुनाव आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करे और देश के लोगों के मताधिकार की रक्षा हो।

मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष (एनडीटीवी इंडिया के अनुसार)

एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार खड़गे ने संविधान के अनुच्छेद 326 का जिक्र किया, जो हर वयस्क नागरिक को वोट का अधिकार देता है, और कहा कि यह अधिकार आज गंभीर खतरे में है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2023 का कानून विपक्ष के 145 सांसदों को निलंबित करके लाया गया और यह चुनाव आयुक्त को ऐसी सुरक्षा देता है जो राष्ट्रपति को भी नहीं है। खड़गे ने महाराष्ट्र और कर्नाटक के चुनावों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि “वोट चोरी” पकड़े जाने के बाद SIR का ऐलान किया गया।

SIR पर खड़गे ने यह भी साफ किया कि विपक्ष मृत मतदाताओं के नाम सूची में रखने की पैरवी नहीं कर रहा। द हिंदू के लाइव अपडेट के मुताबिक उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन “घुसपैठियों” को बचाने के लिए नहीं, बल्कि असली मतदाताओं के लिए लड़ रहा है। एबीपी के अनुसार उनकी मांग थी कि आयोग यह आंकड़ा सार्वजनिक करे कि किसके नाम किस वजह से हटे, ताकि पता चल सके कि तरीका सही है या नहीं।

मंच पर और कौन, क्या बोला

  • द हिंदू के मुताबिक राजद नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि CEC प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर “वोट चोरी” करा रहे हैं।
  • टीएमसी सांसद सौगत राय ने कहा कि विपक्ष ने महाभियोग नोटिस के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाई थी, लेकिन संसद में मुद्दा उठाने नहीं दिया गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर के हवाले से द हिंदू ने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा के पीठासीन अधिकारियों ने विपक्ष के नोटिस स्वीकार नहीं किए।
  • कांग्रेस के पवन खेड़ा ने कहा कि यह “मॉक पार्लियामेंट” नहीं, बल्कि CEC का “पब्लिक इंपीचमेंट” है।

भाजपा का जवाब: “संसद का मज़ाक”

कार्यक्रम के समानांतर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पुरी से सांसद संबित पात्रा ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पात्रा ने विपक्ष के कार्यक्रम को “संसद का ही मज़ाक” बताया। उन्होंने CEC को मिली कानूनी सुरक्षा का बचाव करते हुए कहा कि भाजपा ने कोई ऐसा कानून नहीं बनाया जो पहले से मौजूद न हो।

वोट चोरी के आरोप पर पात्रा ने पलटवार के लिए इतिहास का सहारा लिया। इंडियन एक्सप्रेस और एबीपी न्यूज़ के अनुसार उन्होंने कहा कि अगर भारत में कभी वोट चोरी हुई तो वह पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की, जब कांग्रेस नेताओं ने सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट दिए थे। पात्रा ने SIR का बचाव करते हुए “ASDD” श्रेणियों को समझाया, जिनमें A का मतलब अनुपस्थित (Absent) और S का मतलब स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) है, और कहा कि BLO तीन बार घर जाता है, फिर भी व्यक्ति न मिले तो उसे अनुपस्थित माना जाता है। द हिंदू के मुताबिक उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 नहीं बदला गया, सिर्फ एक घोषणा पत्र जोड़ा गया है, और जिनके नाम छूट गए हैं वे फॉर्म 6 भरें।

इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को लखनऊ में राहुल गांधी और अखिलेश यादव को चुनौती दी थी। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक शाह ने कहा कि भाजपा “वोट चोरी” के हर आरोप पर संसद के विशेष सत्र में चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष चर्चा नहीं करना चाहता। उन्होंने विपक्ष पर हार मानने के बजाय “अंपायर” पर आरोप लगाने की बात कही।

जहां तक चुनाव आयोग की बात है, इस प्रतीकात्मक कार्यक्रम और छह आरोपों पर आयोग या ज्ञानेश कुमार की ओर से इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आयोग का जवाब आने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।

वीडियो स्रोत: India Today (YouTube) | मूल वीडियो देखें

विवाद की जड़: SIR और 13 करोड़ नाम

पूरा टकराव मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़ा है। विपक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में देश भर में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूचियों से बाहर हो गए। भाजपा और आयोग के समर्थक इसे फर्जी, मृत, स्थानांतरित और दोहराए गए नामों की सफाई बताते हैं। पात्रा ने भी यही तर्क दिया कि कई राज्यों में 13 करोड़ लोगों के नाम अभी अंतिम सूची में शामिल नहीं हुए हैं और इसकी वजह ASDD श्रेणियां हैं।

संवैधानिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज जैसी है, यानी संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। विपक्ष के पास इतना संख्या बल नहीं है, और पीठासीन अधिकारियों ने उसके नोटिस भी स्वीकार नहीं किए। इसी वजह से विपक्ष ने संसद के बाहर “सांकेतिक” रास्ता चुना। CEC के खिलाफ इससे पहले पंजाब विधानसभा भी प्रस्ताव पारित कर चुकी है, जिस पर हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

अब नज़र रविवार की रैली पर

INDIA गठबंधन रविवार, 1 नवंबर को मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से रामलीला मैदान तक मार्च और फिर रैली करेगा। दिल्ली पुलिस ने सुबह 10 से शाम 5 बजे तक मध्य दिल्ली में ट्रैफिक पाबंदियों की घोषणा की है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि गृह मंत्री लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे भाजपा ने “झूठ” बताकर सबूत मांगा है। इस रैली से जुड़े पिछले विवाद पर हमारी रिपोर्ट यहां है।

छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता दिल्ली पहुंच रहे हैं। दैनिक भास्कर के मुताबिक कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश से 5 से 7 हजार लोग रैली में शामिल होंगे, जबकि प्रदेश के मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना कांग्रेस की आदत बन गई है। साफ है कि शनिवार का “जन महाभियोग” रविवार की रैली के लिए माहौल बनाने की कवायद था। अब देखना होगा कि रैली के बाद विपक्ष का अगला कदम क्या होता है और चुनाव आयोग आरोपों पर क्या जवाब देता है।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी इंडिया, एबीपी न्यूज़, बीबीसी हिंदी, टाइम्स ऑफ इंडिया, न्यू इंडियन एक्सप्रेस, दैनिक भास्कर।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी TimeTrolls के संस्थापक और संपादक हैं। वे B.Tech (मैकेनिकल) और MBA (ऑपरेशंस) हैं और 4+ साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। TimeTrolls पर वे देश, खेल, टेक और रोज़गार से जुड़ी खबरें तथ्यों की जांच के बाद सरल हिंदी में प्रकाशित करते हैं।

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