फीचर्ड इमेज: नई दिल्ली स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) का मुख्यालय। फोटो: DiplomatTesterMan / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
ओमान से प्रत्यर्पित होकर भारत लाए गए महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप के कथित मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने रविवार, 2 नवंबर 2026 को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर CBI को सौंप दिया। अदालत का फैसला आते ही रायपुर से दिल्ली तक बयानबाजी तेज हो गई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पूछताछ से पता चलेगा कि “प्रोटेक्शन मनी” किन लोगों तक पहुंचती थी, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटकर ED और CBI से पूछा कि ऐप का असली मालिक आखिर कौन है।
भिलाई के रहने वाले चंद्राकर को अब रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। अमर उजाला और जनता से रिश्ता की रिपोर्ट के मुताबिक CBI उसे मंगलवार, 3 नवंबर को रायपुर लाकर अदालत में पेश करने की तैयारी में है; रिमांड आदेश के तहत यह पेशी 4 नवंबर या उससे पहले होनी है।
दिल्ली की अदालत में दिनभर चली बहस
ThePrint की रिपोर्ट के अनुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने करीब पूरे दिन सुनवाई के बाद CBI की अर्जी मंजूर की। बचाव पक्ष के वकील तुषार गिरी की मुख्य दलील यह थी कि ओमान से प्रत्यर्पण का आदेश केवल ED के मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) केस के लिए है, CBI के मामले के लिए नहीं। उन्होंने इसके लिए प्रत्यर्पण कानून के “स्पेशियलिटी” सिद्धांत का हवाला दिया, यानी जिस अपराध के लिए किसी को सौंपा गया हो, उसी में मुकदमा चले।
CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक वी.के. पाठक और नवीन निश्चल ने कहा कि गिरफ्तारी रायपुर की अदालत के वारंट पर हुई है। अदालत ने अपने आदेश में लिखा कि वह इस तथ्य से “अनजान नहीं रह सकती” कि ED का केस उसी मूल अपराध से निकला है जो CBI की एफआईआर RC No. RPZO/10/2022 का विषय है। जज ने यह भी कहा कि प्रत्यर्पण कानून की धारा 21 के अपवादों का सवाल इस चरण में तय नहीं हो सकता। सुनवाई के दौरान CBI ने आरोपी को हथकड़ी लगाकर ले जाने की अनुमति मांगी, तो जज ने पूछा कि क्या एजेंसी को अपने ही अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। ED ने भी अदालत में अपनी अलग टीम भेजी थी।

मुख्यमंत्री और डिप्टी CM ने क्या कहा
The Hindu के मुताबिक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चंद्राकर से पूछताछ में यह सामने आएगा कि कौन-कौन लोग प्रोटेक्शन मनी ले रहे थे। साय 2 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में छत्तीसगढ़ से जुड़े एक ऊर्जा निवेश कार्यक्रम में थे।
उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता अरुण साव ने ETV भारत से कहा कि चंद्राकर को वापस लाना बहुत कठिन काम था और पूछताछ के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई होगी। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता उज्जवल दीपक ने नईदुनिया से बातचीत में आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में सट्टे के कारोबार को राजनीतिक संरक्षण मिला। उन्होंने कहा कि करीब 508 करोड़ रुपये के कथित लेन-देन और निलंबित ASI चंद्रभूषण वर्मा की भूमिका का सच सामने आएगा, और यह भी कहा कि “भूपेश बघेल अपने जवाब तैयार रखें”। भाजपा छत्तीसगढ़ के आधिकारिक X हैंडल ने 3 नवंबर सुबह लिखा कि चंद्राकर के भारत आते ही “कांग्रेसी आकाओं की नींद उड़ गई है”।

भूपेश बघेल का पलटवार: शुभम सोनी का वीडियो किसने जारी किया
रायपुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए भूपेश बघेल ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। PTI-भाषा के हवाले से ThePrint हिंदी और Moneycontrol में छपी रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “जांच एजेंसियां वही करेंगी, जो सरकार उनसे करवाना चाहेगी, लेकिन हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।”
बघेल ने दावा किया कि उनकी सरकार ने 2022 में ऐप से जुड़े 72 मामले दर्ज किए थे और 2023 में केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर की मांग की थी। फिर उन्होंने शुभम सोनी वाले वीडियो का मुद्दा उठाया: “शुभम सोनी का वीडियो किसे मिला? ईडी को। और इसे किसने जारी किया? भाजपा कार्यालय ने।” उनके मुताबिक उस वीडियो में शुभम सोनी खुद को ऐप का मालिक और बाकी लोगों को अपना कर्मचारी बताता है, इसलिए ED और CBI को “स्पष्ट करना चाहिए कि असली मालिक कौन है—शुभम सोनी या सौरभ चंद्राकर।”
कांग्रेस के संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने ETV भारत से कहा कि “डबल इंजन” सरकार के रहते ऐप कैसे चलता रहा और किन भाजपा नेताओं ने चंद्राकर को संरक्षण दिया, इसका जवाब भी आना चाहिए। उन्होंने उन चर्चाओं का भी जिक्र किया जिनमें ऐप के तार PMO तक जुड़ने की बात कही गई थी। भाजपा की ओर से शुक्ला के इस आरोप पर अलग से जवाब अभी सामने नहीं आया है।

केस की पृष्ठभूमि: 2022 की एफआईआर से ओमान तक
महादेव बुक ऑनलाइन बेटिंग ऐप पर आरोप है कि वह कई देशों से संचालित नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, कैसीनो और दूसरे खेलों पर अवैध सट्टा चलाता था। ED इस धंधे से हुई कमाई करीब 6,000 करोड़ रुपये आंकती है। मार्च 2024 में राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने जो एफआईआर दर्ज की, उसमें भूपेश बघेल के साथ सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और शुभम सोनी के नाम थे। बघेल इसे शुरू से राजनीतिक बदले की कार्रवाई कहते रहे हैं।
अगस्त 2024 में राज्य सरकार ने 70 मामले और EOW का एक केस CBI को सौंप दिए। लल्लूराम की रिपोर्ट के मुताबिक CBI ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम की धाराओं में आरोपपत्र दायर किए हैं, जबकि ED कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। शुभम सोनी का जिस वीडियो का बघेल जिक्र कर रहे हैं, वह 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आया था; NDTV इंडिया की तब की रिपोर्ट के अनुसार उसमें सोनी ने खुद को ऐप का मालिक बताया था और 508 करोड़ रुपये के कथित भुगतान का आरोप लगाया था। ये सभी आरोप हैं, जिनकी सच्चाई अदालत में तय होगी।
आगे क्या होगा
- रायपुर में पेशी: विशेष CBI अदालत तय करेगी कि चंद्राकर को पूछताछ के लिए CBI की हिरासत में भेजा जाए या न्यायिक हिरासत में।
- स्पेशियलिटी पर कानूनी लड़ाई: बचाव पक्ष ने संकेत दिया है कि प्रत्यर्पण आदेश के दायरे का सवाल आगे भी उठाया जाएगा। दिल्ली की अदालत ने यह मुद्दा खुला छोड़ा है।
- ED की बारी: PMLA केस में ED भी पूछताछ की मांग कर सकती है, क्योंकि प्रत्यर्पण उसी केस के आधार पर हुआ है।
- सियासी असर: पूछताछ में किसी नेता या अफसर का नाम आता है या नहीं, इसी पर अब भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई टिकी है।
विश्लेषण: अदालत से ज्यादा तेज सियासी अदालत
इस केस में दो अलग कहानियां साथ चल रही हैं। एक कानूनी कहानी है, जिसमें सवाल यह है कि ओमान से मिला प्रत्यर्पण आदेश CBI के केस पर लागू होता है या नहीं। दिल्ली की अदालत ने फिलहाल CBI के पक्ष में फैसला दिया है, पर अंतिम राय नहीं दी। दूसरी कहानी राजनीतिक है। भाजपा इसे कांग्रेस शासन में सट्टे को मिले कथित संरक्षण के सबूत के तौर पर पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस यह याद दिला रही है कि पहली एफआईआर और लुकआउट सर्कुलर की मांग बघेल सरकार के समय हुई थी, और ऐप भाजपा सरकार के दौर में भी चलता रहा।
दोनों पक्षों के दावों में एक साझा बात है: दोनों चाहते हैं कि चंद्राकर बोले। पूछताछ में जो भी सामने आएगा, उसका असर सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं रहेगा। अभी तक किसी भी नेता के खिलाफ आरोप अदालत में साबित नहीं हुए हैं, और बघेल सभी आरोपों से इनकार करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सौरभ चंद्राकर को कितने दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली है?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी है, ताकि उसे 4 नवंबर या उससे पहले रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जा सके।
बचाव पक्ष ने रिमांड का विरोध किस आधार पर किया?
बचाव पक्ष का कहना था कि ओमान का प्रत्यर्पण आदेश केवल ED के PMLA केस के लिए है, इसलिए CBI उसे अपने केस में गिरफ्तार नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि यह सवाल इस चरण में तय नहीं होगा।
भूपेश बघेल ने क्या सवाल उठाया?
बघेल ने पूछा कि शुभम सोनी के जिस वीडियो में वह खुद को ऐप का मालिक बताता है, उसके आधार पर ED-CBI यह स्पष्ट करें कि असली मालिक कौन है, शुभम सोनी या सौरभ चंद्राकर।
यह भी पढ़ें: ओमान से प्रत्यर्पित होकर भारत लाया गया सौरभ चंद्राकर, CBI की पूरी कार्रवाई
इस रिपोर्ट के आधार
- ThePrint (मयंक कुमार), 2 नवंबर 2026: राउज एवेन्यू कोर्ट की सुनवाई और आदेश
- The Hindu (शुभोमय सिकदर), 2 नवंबर 2026: CM साय का बयान और केस की पृष्ठभूमि
- PTI-भाषा, ThePrint हिंदी और Moneycontrol, 2-3 नवंबर 2026: भूपेश बघेल का बयान
- नईदुनिया, 3 नवंबर 2026: भाजपा प्रवक्ता उज्जवल दीपक का बयान
- ETV भारत छत्तीसगढ़, 2-3 नवंबर 2026: सुशील आनंद शुक्ला और अरुण साव के बयान
- अमर उजाला, 3 नवंबर 2026: रायपुर पेशी की तैयारी
- भाजपा छत्तीसगढ़ (@BJP4CGState) का आधिकारिक X पोस्ट, 3 नवंबर 2026
नोट: तस्वीरें विष्णुदेव साय (@vishnudsai) और भूपेश बघेल (@bhupeshbaghel) के आधिकारिक X हैंडल तथा Wikimedia Commons से ली गई हैं; हर तस्वीर के नीचे उसका स्रोत दिया गया है। लेख में दिए गए आरोप संबंधित नेताओं के हैं, TimeTrolls इनकी पुष्टि नहीं करता।








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