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राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे, अमित शाह ने रैली की तारीख पर उठाया 1984 दंगों का मुद्दा

INDIA गठबंधन की रामलीला मैदान रैली में राहुल गांधी ने दावा किया कि CEC ज्ञानेश कुमार पद से हटेंगे और जेल जाएंगे। खड़गे ने कहा मोदी जाएगा तो ही लोकतंत्र बचेगा, जबकि अमित शाह ने 1984 दंगों की बरसी पर रैली को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।

रामलीला मैदान रैली: राहुल गांधी और अमित शाह की तस्वीरों के साथ ग्राफिक
Photos: Wikimedia Commons / Sidheeq (CC BY-SA 4.0) - Rahul Gandhi; Wikimedia Commons / Ministry of Home Affairs (GODL-India) - Amit Shah. ग्राफिक: timetrolls.in

मुख्य बातें

  • "ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे": राहुल गांधी का पूरा दावा
  • 15 प्रतिशत मतदाता हटाने का आंकड़ा, और 2024 को "अवैध" बताने का दावा
  • खड़गे बोले "मोदी जाएगा", बाकी नेताओं ने क्या कहा
  • भाजपा का जवाब: 1984 की बरसी, कारोबारियों का नुकसान और भीड़ पर सवाल

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी INDIA गठबंधन की “वोट बचाओ, देश बचाओ” महारैली हुई और इसके मंच से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर अब तक का सबसे तीखा हमला किया। राहुल ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को पद से हटना होगा और वे जेल जाएंगे, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी “कानूनी कार्रवाई” होगी। लगभग उसी समय चंडीगढ़ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रैली की तारीख पर सवाल उठाया और कहा कि 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर यह आयोजन पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

रैली मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से मार्च के साथ शुरू हुई और रामलीला मैदान पर खत्म हुई। मंच पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, राजद नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और वाम दलों के नेता मौजूद थे। विपक्ष की तीन मांगें पहले जैसी ही रहीं, CEC का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव, लेकिन भाषणों का सुर एक दिन पहले हुए प्रतीकात्मक “जन महाभियोग” से कहीं ज्यादा आक्रामक रहा।

“ज्ञानेश कुमार जेल जाएंगे”: राहुल गांधी का पूरा दावा

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कथित “वोट चोरी” को सामान्य अपराध से अलग बताया। न्यूज़18 हिंदी (पीटीआई) के मुताबिक उन्होंने कहा:

यह कोई सामान्य चोरी नहीं है. यह हिंदुस्तान के हर नागरिक के आवाज की चोरी है, हर नागरिक की अभिव्यक्ति की चोरी है. इसे कानूनी भाषा में दुर्लभतम मामला कहते हैं, इसे देशद्रोह कहते हैं.

राहुल गांधी, नेता प्रतिपक्ष, लोकसभा (न्यूज़18 हिंदी/पीटीआई के अनुसार)

उन्होंने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के बिना न नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनते और न अमित शाह गृह मंत्री। अमित शाह के उस बयान का जवाब देते हुए कि “मोदी कहीं नहीं जा रहे”, राहुल ने कहा, “ज्ञानेश कुमार के बाद हम आपके सामने खड़े होने जा रहे हैं” और “आप भाग नहीं सकते। आप यहीं के यहीं रहोगे।” भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि “ज्ञानेश कुमार रात को सो नहीं पाता”। ये शब्द नीचे दिए दैनिक भास्कर के वीडियो में सुने जा सकते हैं।

इसी भाषण में राहुल ने अपने हमले को निजी दुश्मनी से अलग रखने की कोशिश भी की। उन्होंने कहा, “हम ना नरेंद्र मोदी से नफरत करते हैं, ना अमित शाह से नफरत करते हैं, ना ज्ञानेश कुमार से नफरत करते हैं।” साथ में यह भी जोड़ा कि विपक्ष हिंसा नहीं करेगा, “मगर हम आपको संविधान को नष्ट नहीं करने देंगे।”

वीडियो स्रोत: Dainik Bhaskar (YouTube) | मूल वीडियो देखें

15 प्रतिशत मतदाता हटाने का आंकड़ा, और 2024 को “अवैध” बताने का दावा

राहुल के भाषण का सबसे बड़ा राजनीतिक दावा 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर था। एनडीटीवी इंडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव के बाद 13.5 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जो करीब 15 प्रतिशत है, जबकि 2024 में NDA और विपक्ष के बीच वोटों का अंतर सिर्फ 3 प्रतिशत था। इसी आधार पर उन्होंने 2024 के चुनाव को “चोरी का” और “अवैध” बताया और कहा कि यह आंकड़ा खुद चुनाव आयोग का है।

राहुल ने मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक के साथ छत्तीसगढ़ का नाम भी उन राज्यों में लिया जहां उनके मुताबिक “वोट चोरी” हुई। उन्होंने EVM और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, दोनों तरीकों का आरोप लगाया। ये सभी विपक्ष के आरोप हैं; किसी अदालत या जांच ने अब तक इनकी पुष्टि नहीं की है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तस्वीर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे। फोटो: Wikimedia Commons / Prime Minister’s Office, Government of India (GODL-India)

खड़गे बोले “मोदी जाएगा”, बाकी नेताओं ने क्या कहा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने द हिंदू (पीटीआई) के अनुसार आरोप लगाया कि केंद्र, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारें “चोरी के जनादेश” से बनी हैं। उन्होंने नारा दिया, “मोदी जाएगा तो ही लोकतंत्र बचेगा”, और कहा कि CEC अगर “अंडरग्राउंड” भी हो जाएं तो विपक्ष उन्हें ढूंढ निकालेगा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक खड़गे ने प्रधानमंत्री पर महिलाओं, युवाओं और दलितों के वोट छीनने की कोशिश का आरोप लगाया।

  • अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष) ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे में कथित चोरी का मुद्दा उठाया और उत्तर प्रदेश भाजपा के 1.27 करोड़ हिंदू वोट कटने वाले दावे पर कहा कि अब भाजपा को अपने वोट कटने का एहसास हो रहा है।
  • ममता बनर्जी (टीएमसी प्रमुख) ने बंगाल को “SIR का शिकार” बताया और CEC पर निशाना साधने के लिए एक मशहूर नर्सरी कविता को बदलकर पढ़ा।
  • तेजस्वी यादव (राजद) ने कहा कि यह मैदान आमतौर पर रामायण के लिए होता है, लेकिन आज यहां “महाभारत” हो रही है, और CEC को प्रधानमंत्री की “कठपुतली” बताया।
  • फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने भाजपा और RSS पर निशाना साधा; महबूबा ने देश की संपत्तियां एक कारोबारी को बेचने का आरोप लगाया।

भाजपा का जवाब: 1984 की बरसी, कारोबारियों का नुकसान और भीड़ पर सवाल

रैली के दौरान ही अमित शाह चंडीगढ़ के एक कार्यक्रम में थे। आजतक के वीडियो में सुने जा सकने वाले उनके भाषण में उन्होंने कहा कि भाजपा ने तीन बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिवाली के बाद रैली करने का अनुरोध किया था, “मगर नहीं उनको तो जिस दिन सिख दंगे हुए थे, सिख नरसंहार हुआ था, वही दिन पर वही काले दिन पर रैली करनी थी।” शाह ने दावा किया कि इन तीन-चार दिनों में दिल्ली के थोक बाजारों में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। उन्होंने 1984 के बाद राजीव गांधी के “बड़ा पेड़ गिरता है” वाले बयान का भी जिक्र किया और कहा कि मोदी सरकार ने दंगों के केस दोबारा खोले।

विपक्ष की राजनीति पर शाह ने कहा कि “झूठ बोलना, अराजकता फैलाना”, संसद न चलने देना अगर उनकी फितरत रही तो वे “और एक 5 साल” विपक्ष में बैठने को तैयार रहें। इंडिया टुडे के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि राहुल प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो पूरी जिंदगी “मॉक पार्लियामेंट” में रहें।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने हिंदुस्तान टाइम्स (पीटीआई) के अनुसार रैली को लोकतंत्र के नाम पर देश को अराजकता में धकेलने की “सोची-समझी साजिश” बताया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने रोहतक में कहा कि जनादेश न मिलने की निराशा में विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं पर दोष डाल रहा है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कांग्रेस पर “संविधान चोरी” का आरोप लगाया। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने न्यूज़ नेशन के मुताबिक दावा किया कि मैदान का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली रहा और कहा कि 2024 में ज्ञानेश कुमार CEC थे ही नहीं। इंडिया टुडे के अनुसार भाजपा ने यह सवाल भी उठाया कि अगर 2024 का चुनाव अवैध था तो राहुल गांधी खुद भी “अवैध सांसद” हुए।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार। फोटो: Wikimedia Commons / Prime Minister’s Office, Government of India (GODL-India)

चुनाव आयोग अब तक क्या कहता रहा है

रविवार की रैली में लगाए गए नए आरोपों पर चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार की ओर से इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है; उनके जवाब का इंतज़ार है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक आयोग पहले ही “वोट चोरी” के आरोपों को खारिज कर चुका है। 5 अक्टूबर को X पर आयोग ने फॉर्म 6 में बदलाव से जुड़े राहुल के दावों को “भ्रामक” बताया था और कहा था कि बिहार SIR का 24 जून का आदेश तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से जारी हुआ, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई के फैसले में सही ठहराया। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी आयोग ने यही कहा कि SIR से जुड़े तीनों आदेश सर्वसम्मति से मंजूर हुए। अगस्त 2025 में ज्ञानेश कुमार ने राहुल को चुनौती दी थी कि वे या तो सबूत दें या आरोप वापस लें।

छत्तीसगढ़ से भी पहुंचे नेता, भाजपा ने भी निकाली रैली

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने इस रैली के लिए बड़ी तैयारी की थी। दैनिक भास्कर के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शनिवार को दिल्ली रवाना हुए, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत शुक्रवार को पहुंच गए थे और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव रविवार को पहुंचने वाले थे। पार्टी ने प्रदेश से 5 से 7 हजार कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया था। नवभारत टाइम्स के मुताबिक रवाना होने से पहले बघेल ने रायपुर में मीडिया से बातचीत में तीन मांगें गिनाईं: CEC को हटाना, SIR की प्रक्रिया निरस्त करना और बैलेट पेपर से चुनाव। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि छत्तीसगढ़ में SIR के दौरान कटे नामों में कितने बांग्लादेशी नागरिक निकले। प्रदेश में SIR से जुड़े विवाद पर हमारी पिछली रिपोर्ट यहां पढ़ें।

दूसरी तरफ भाजपा ने “लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ” अभियान चलाया। दैनिक भास्कर रायगढ़ के मुताबिक शनिवार को रायगढ़ में निकली रैली के बाद वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही है, और बैलेट पेपर की मांग पर आपत्ति जताई। रविवार को रैली में राहुल के मुंह से छत्तीसगढ़ का नाम आने के बाद प्रदेश में भी यह बहस और तेज होना तय है।

रैली के बाद असली सवाल: आगे का रास्ता क्या

संवैधानिक तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी है, यानी संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पास होना जरूरी है। विपक्ष के पास यह संख्या नहीं है, और पीठासीन अधिकारी उसके नोटिस पहले स्वीकार नहीं कर चुके हैं। इसलिए राहुल का “जेल जाएंगे” वाला दावा फिलहाल एक राजनीतिक चेतावनी है, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं। इसका असली मतलब यह है कि विपक्ष SIR को अगले चुनावों तक बड़ा मुद्दा बनाए रखना चाहता है, जबकि भाजपा 1984, कारोबारियों के नुकसान और “अराजकता” के तर्क से इसका जवाब दे रही है।

रविवार की रैली ने यह साफ कर दिया कि टकराव अब सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, नैरेटिव पर है। विपक्ष के 13.5 करोड़ और 15 प्रतिशत वाले दावों और आयोग के “फर्जी, मृत और स्थानांतरित नामों की सफाई” वाले तर्क के बीच सच क्या है, इसका जवाब नाम-वार और वजह-वार आंकड़ों से ही मिलेगा, जिनकी मांग विपक्ष कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई और आयोग का अगला बयान इस बहस की दिशा तय करेंगे। रैली की तारीख पर पहले उठे विवाद पर हमारी रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: न्यूज़18 हिंदी (पीटीआई), एनडीटीवी इंडिया, आजतक, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स (भाजपा प्रतिक्रिया), इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, न्यूज़ नेशन, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर रायगढ़, नवभारत टाइम्स।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी TimeTrolls के संस्थापक और संपादक हैं। वे B.Tech (मैकेनिकल) और MBA (ऑपरेशंस) हैं और 4+ साल से इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं। TimeTrolls पर वे देश, खेल, टेक और रोज़गार से जुड़ी खबरें तथ्यों की जांच के बाद सरल हिंदी में प्रकाशित करते हैं।

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