फीचर्ड इमेज: नई दिल्ली में जय सिंह मार्ग स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय। फोटो: Ji-Elle / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0), लोगो: दिल्ली पुलिस
मंगलवार दोपहर 2 बजकर 49 मिनट पर विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने X पर तीन लाल सायरन वाले इमोजी के साथ एक छोटी-सी चेतावनी डाली थी। बुधवार सुबह 8 बजे से ठीक पहले उसी चेतावनी की अगली कड़ी दिल्ली पुलिस के आधिकारिक हैंडल पर दिखी। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के X हैंडल @pbhushan1 से रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का कथित तौर पर छेड़छाड़ किया गया (डॉक्टर्ड) वीडियो साझा होने के मामले में स्पेशल सेल थाने में FIR दर्ज कर ली गई है।
FIR नंबर 263/26 है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 336(4), 353(1)(c), 356 और 340(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66C लगाई गई है। यह मामला अभी शुरुआती जांच के चरण में है और भूषण पर लगाए गए आरोप पुलिस के हैं, जिन पर अदालत में फैसला होना बाकी है।
दिल्ली पुलिस ने अपनी पोस्ट में क्या लिखा
दिल्ली पुलिस ने 4 नवंबर की सुबह हिंदी में जारी अपनी पोस्ट में घटनाक्रम का पूरा क्रम बताया। पोस्ट के मुताबिक, “दिनांक 03.11.2026 को साइबर पेट्रोलिंग के दौरान संज्ञान में आया कि सोशल मीडिया हैंडल @thequotesnews द्वारा प्रशांत भूषण के हैंडल @pbhushan1 से रूस के विदेश मंत्री का भारत विरोधी कथित Doctored वीडियो साझा किए जाने का दावा किया गया है।”
पुलिस ने आगे लिखा, “उक्त वीडियो के माध्यम से भ्रामक, मानहानिकारक एवं भड़काऊ सामग्री प्रसारित कर सार्वजनिक उपद्रव तथा अफवाहें फैलाने का आरोप है।” News18 की रिपोर्ट के अनुसार यह मामला स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO की नजर में आया था। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुलिस अब वीडियो की जांच के साथ यह भी देख रही है कि यह सोशल मीडिया पर किस रास्ते से फैला।

वीडियो में लावरोव के मुंह से क्या कहलवाया गया
News18 के मुताबिक वायरल क्लिप में लावरोव को यह कहते दिखाया गया कि भारत के साथ रूस का व्यापारिक रिश्ता नई दिल्ली को मॉस्को की विदेश नीति में दखल देने या रूस, यूक्रेन, अमेरिका जैसे मामलों पर सलाह देने का हक नहीं देता। टाइम्स ऑफ इंडिया और News18 दोनों ने बताया कि भूषण ने यह वीडियो एक कैप्शन के साथ साझा किया था, जिसमें इसे रूसी विदेश मंत्री का भारत पर “करारा तमाचा” बताया गया था और सवाल किया गया था कि विदेश मंत्री जयशंकर रूस को आखिर कौन-सी सलाह दे रहे थे।
फैक्ट चेक संस्था Newschecker ने 3 नवंबर को इस क्लिप की पड़ताल प्रकाशित की। उसके अनुसार असली वीडियो “The M World News” नाम के इंस्टाग्राम पेज पर मिला, जिसमें लावरोव भारत पर नहीं, बल्कि इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिलने को तैयार हैं। उस असली क्लिप में लावरोव कहते हैं, “If he is willing to meet, let him come to Moscow. We will guarantee his safety and security.” यानी अगर जेलेंस्की मिलना चाहते हैं तो मॉस्को आएं, उनकी सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी। Newschecker ने यह भी लिखा कि वायरल वीडियो में होंठों की हलचल आवाज से मेल नहीं खाती और कई जगह फ्रेम झिलमिलाते हैं। Hive Moderation, NVIDIA के सिंथेटिक वीडियो डिटेक्टर और Hiya के डीपफेक वॉइस डिटेक्टर ने भी क्लिप के वीडियो और ऑडियो, दोनों को संभावित AI-निर्मित बताया।
विदेश मंत्रालय और रूसी दूतावास ने क्या कहा
विदेश मंत्रालय के फैक्ट चेक हैंडल @MEAFactCheck ने 3 नवंबर को लिखा, “Fake Alert!!! The video of the Russian Foreign Minister being used in this post is fake!” यानी इस पोस्ट में इस्तेमाल किया गया रूसी विदेश मंत्री का वीडियो फर्जी है। सरकार की PIB फैक्ट चेक यूनिट ने भी इस चेतावनी को रीपोस्ट किया।
इससे पहले भारत में रूस के दूतावास (@RusEmbIndia) ने भी इसी तरह की एक पोस्ट पर जवाब देते हुए लिखा था, “Please stop copying silly AI fakes”, यानी बेतुके AI फेक की नकल करना बंद करें। दूतावास ने जिस पोस्ट को जवाब दिया, उसमें लावरोव के नाम से वही कथन था कि भारत सिर्फ एक व्यापारिक साझेदार है। टाइम्स ऑफ इंडिया और द ट्रिब्यून दोनों ने लिखा है कि मंत्रालय का फैक्ट चेक रूसी दूतावास के खंडन के बाद आया।

असल में जयशंकर और लावरोव की मुलाकात में क्या हुआ था
यह विवाद ऐसे समय उठा है जब विदेश मंत्री एस. जयशंकर और लावरोव कुछ ही दिन पहले आमने-सामने मिले थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार दोनों नेताओं की मुलाकात 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुई थी। जयशंकर ने X पर मुलाकात की तस्वीर साझा कर लिखा था, “Discussed the Ukraine conflict, Gulf situation and multilateral issues with FM Sergey Lavrov of Russia.” यानी यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर बात हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी साप्ताहिक ब्रीफिंग में बताया था कि G20 बैठक के दौरान जयशंकर की कई द्विपक्षीय मुलाकातें हुईं, जिनमें रूसी विदेश मंत्री से हुई बातचीत भी शामिल थी।
उसी G20 बैठक से जुड़ा एक और फर्जी वीडियो भी घूम रहा है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक MEA फैक्ट चेक यूनिट ने मंगलवार को एक ऐसी पोस्ट को भी फर्जी बताया, जिसमें दावा किया गया था कि जयशंकर रूसी मंत्री की “व्यंग्यपूर्ण” प्रतिक्रिया से निराश हैं। असली वीडियो में जयशंकर यूक्रेन संघर्ष के तीन पहलुओं की बात कर रहे थे: नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, रूस और यूक्रेन से अनाज निर्यात की बहाली, और ऊर्जा, जिसे उन्होंने “most complicated” यानी सबसे पेचीदा बताया था।

कौन हैं प्रशांत भूषण
प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाओं के लिए जाने जाते हैं। 2G स्पेक्ट्रम और कोयला ब्लॉक आवंटन जैसे बड़े मामलों में उनकी याचिकाएं चर्चा में रहीं। वे 2011 के अन्ना आंदोलन के प्रमुख चेहरों में थे और 2012 में आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे, लेकिन 2015 में पार्टी से निकाले जाने के बाद उन्होंने योगेंद्र यादव के साथ स्वराज अभियान शुरू किया। अगस्त 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका पर उनके दो ट्वीट को अवमानना माना था और उन पर एक रुपये का सांकेतिक जुर्माना लगाया था।
पिछले कुछ हफ्तों से भूषण X पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। बुधवार सुबह भी उन्होंने लद्दाख और अरुणाचल से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट और रीपोस्ट किए। लेकिन इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक (4 नवंबर, सुबह 11:30 बजे IST) FIR या लावरोव वाले वीडियो पर उनकी ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। उनका पक्ष आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी। प्रशांत भूषण के जवाब का इंतज़ार है।
किन धाराओं में केस, और इनका मतलब क्या है
FIR में लगाई गई धाराएं बताती हैं कि पुलिस इसे केवल गलत जानकारी फैलाने का नहीं, बल्कि छेड़छाड़ वाले इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का मामला मान रही है। BNS की धारा 336 जालसाजी से जुड़ी है और इसकी उपधारा (4) किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से की गई जालसाजी पर लागू होती है। धारा 340 जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली की तरह इस्तेमाल करने से जुड़ी है। धारा 353 सार्वजनिक उपद्रव भड़काने वाले बयानों और अफवाहों पर है, जबकि धारा 356 मानहानि की धारा है। IT एक्ट की धारा 66C पहचान की चोरी, यानी किसी दूसरे की पहचान या उससे जुड़ी विशेषता के बेईमानी से इस्तेमाल पर लगती है।
ऐसे मामलों में एक अहम कानूनी सवाल यह होता है कि क्या किसी वीडियो को बनाने वाले और उसे आगे साझा करने वाले पर एक जैसी जिम्मेदारी बनती है? इसका जवाब जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगा, जैसे साझा करने वाले को क्लिप के फर्जी होने की जानकारी थी या नहीं। फिलहाल यह तय होना बाकी है कि पुलिस भूषण को नोटिस भेजकर पूछताछ करेगी या पहले वीडियो के असली स्रोत तक पहुंचने की कोशिश करेगी।

भारत-रूस रिश्तों के संदर्भ में यह मामला क्यों संवेदनशील है
भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं और रूसी कच्चे तेल की खरीद हाल के वर्षों में पश्चिमी देशों के साथ भारत की बातचीत का बड़ा मुद्दा रही है। ऐसे में रूसी विदेश मंत्री के नाम से भारत की आलोचना करता कोई वीडियो सीधे कूटनीतिक भरोसे पर चोट करता है। इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि यह AI वीडियो संभवतः पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने भारत-रूस संबंधों को नुकसान पहुंचाने के मकसद से बनाया। अखबार ने साथ ही साफ किया कि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ET के मुताबिक क्लिप का समय भी गौर करने लायक है, क्योंकि इसी महीने दिल्ली में SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग होना है।
News18 ने यह भी लिखा कि ये क्लिप ऐसे वक्त घूम रहे हैं जब रूस-यूक्रेन युद्ध जारी है और पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव चल रहा है। ऐसे माहौल में किसी विदेश मंत्री के नाम से गढ़ा गया एक बयान कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है।
इस विवाद से निकलते तीन बड़े सवाल
पहला सवाल सोशल मीडिया पर बड़े नामों की जिम्मेदारी का है। लाखों फॉलोअर वाले हैंडल से साझा हुई कोई क्लिप एक आम यूजर की पोस्ट से कहीं तेज फैलती है, इसलिए साझा करने से पहले जांच की अपेक्षा भी उतनी ही बड़ी होती है। दूसरा सवाल पुलिस कार्रवाई के तरीके का है। ऐसे मामलों में यह बहस पुरानी है कि क्या FIR ही पहला कदम होना चाहिए, या पहले पोस्ट हटाने का नोटिस और सफाई का मौका दिया जाना चाहिए। तीसरा सवाल डीपफेक की पहचान का है। इस मामले में असली वीडियो एक इंस्टाग्राम पेज पर मौजूद था और फैक्ट चेकर्स ने उसे खोज निकाला, लेकिन हर बार इतनी जल्दी सच सामने नहीं आता।
राजनीतिक दलों की ओर से भी इस FIR पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की प्रतिक्रिया आने पर उसे इस रिपोर्ट में जोड़ा जाएगा, फिलहाल सभी पक्षों के जवाब का इंतज़ार है।
आम पाठक ऐसे वीडियो को कैसे परखें
- किसी विदेशी नेता के चौंकाने वाले बयान वाला क्लिप दिखे तो पहले उस देश के विदेश मंत्रालय या दूतावास का आधिकारिक हैंडल देखें।
- होंठों की हलचल और आवाज का मेल, चेहरे के किनारों पर धुंधलापन और फ्रेम की झिलमिलाहट पर ध्यान दें।
- भारत से जुड़े दावों के लिए @MEAFactCheck और @PIBFactCheck पर ताजा “फेक अलर्ट” जरूर जांचें।
- शक हो तो क्लिप आगे न भेजें। पुलिस की इस FIR में भी आरोप वीडियो बनाने का नहीं, उसे साझा करने का है।
रिपोर्ट का आधार: दिल्ली पुलिस की आधिकारिक X पोस्ट (4 नवंबर 2026), MEA FactCheck (3 नवंबर 2026), भारत में रूसी दूतावास, हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, News18, इकोनॉमिक टाइम्स, द ट्रिब्यून, टाइम्स नाउ नवभारत, PTI और Newschecker फैक्ट चेक (3 नवंबर 2026)।
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नोट: इस खबर में किसी भी फर्जी वीडियो का अंश या स्क्रीनशॉट इस्तेमाल नहीं किया गया है। तस्वीरें Wikimedia Commons, विदेश मंत्रालय (GODL-India) और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक लोगो से ली गई हैं और हर तस्वीर के नीचे उसका स्रोत दिया गया है। FIR में लगाए गए आरोप पुलिस के हैं; अदालत में साबित होने तक इन्हें आरोप ही माना जाए।








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