रायगढ़ जिले के छोटे से गांव डूमरमुड़ा की 10 महिलाएं अब आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए पोषण आहार बनाकर हर महीने अच्छी कमाई कर रही हैं। सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह अप्रैल 2026 से पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट तैयार कर रहा है और समूह के मुताबिक इस काम से उसे हर महीने लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
यह जानकारी छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR) ने 2 नवंबर 2026 को जारी की है। राज्य सरकार ने महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट बनाने का काम सौंपा है, ताकि गांव की महिलाओं को घर के पास रोजगार मिले और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार समय पर पहुंचे। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह मॉडल कैसे काम करता है और इससे गांव की महिलाओं को क्या फायदा हो रहा है।
मुख्य बातें एक नज़र में
- रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा का सरस्वती स्व-सहायता समूह, कुल 10 महिला सदस्य
- अप्रैल 2026 से रेडी-टू-ईट पोषण आहार बनाने का काम
- समूह के अनुसार हर महीने लगभग ₹50,000 तक का मुनाफा
- रायगढ़ जिले में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र, इनके लिए 10 महिला समूह चुने गए
- समूहों को PMFME योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी भी दी जा रही है
- समूह राज्य की बिहान योजना (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) से जुड़ा है
कौन हैं डूमरमुड़ा की ये महिलाएं?
सरस्वती स्व-सहायता समूह बिहान योजना से जुड़ा है। बिहान, छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का नाम है, जिसके तहत गांव की महिलाओं को समूह बनाकर बचत, कर्ज और रोजगार से जोड़ा जाता है। समूह की सदस्य श्रीमती चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को कमाई के नए मौके मिले। पहले उनके पास आय के साधन बहुत कम थे, लेकिन अप्रैल 2026 में रेडी-टू-ईट का काम मिलने के बाद समूह की सभी 10 महिलाएं नियमित रूप से इस काम में लगी हैं।
चम्पा चौहान के मुताबिक इस काम से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे घर के खर्च के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं हैं। साथ ही उन्हें मिलकर फैसले लेने, काम बांटने और हिसाब-किताब संभालने का अनुभव भी मिल रहा है।
रेडी-टू-ईट क्या है और किसे मिलता है?
रेडी-टू-ईट एक पूरक पोषण आहार है, जो आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दूध पिलाने वाली माताओं को दिया जाता है। इसमें गेहूं, चना, सोयाबीन जैसी चीज़ें होती हैं, जिन्हें भूनकर और पीसकर तय अनुपात में मिलाया जाता है। इसका मकसद बच्चों और माताओं में कुपोषण कम करना है। छत्तीसगढ़ में आंगनबाड़ी व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत चलती है।
मशीनों से कैसे तैयार होता है पोषण आहार
DPR के मुताबिक समूह तय प्रक्रिया के हिसाब से काम करता है। पूरा काम चार-पांच चरणों में होता है:
1. सफाई
सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन और दूसरी सामग्री को मशीनों से साफ किया जाता है।
2. भुनाई, पिसाई और छनाई
साफ सामग्री को भूना जाता है, फिर पीसकर छाना जाता है ताकि आटा एकसार रहे।
3. मिक्सिंग
तैयार सामग्री को मिक्सिंग मशीन में तय अनुपात में मिलाया जाता है।
4. पैकिंग और वितरण
मिश्रण के पैकेट बनाए जाते हैं और आंगनबाड़ी केंद्रों से मिले मांगपत्र के हिसाब से उन्हें भेजा जाता है। उत्पादन से लेकर पैकिंग और वितरण तक की जिम्मेदारी समूह की महिलाएं खुद संभालती हैं।
रायगढ़ में 2,709 आंगनबाड़ी, 10 समूहों को जिम्मा
रायगढ़ जिले में इस समय 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इन सभी केंद्रों के लिए रेडी-टू-ईट बनाने के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। इससे एक तरफ गांव की महिलाओं को स्थानीय रोजगार मिल रहा है, तो दूसरी तरफ आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण आहार की सप्लाई भी पक्की हो रही है।
चुने गए समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत पूंजीगत सब्सिडी भी दी जा रही है। PMFME केंद्र के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की योजना है, जिसमें छोटे खाद्य उद्यमों और स्व-सहायता समूहों को मशीन और यूनिट लगाने में मदद मिलती है।
सरकार का क्या कहना है
DPR की रिलीज़ के मुताबिक यह पहल मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में और वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ाई जा रही है। सरकार का कहना है कि रेडी-टू-ईट का काम महिलाओं को सिर्फ रोजगार नहीं दे रहा, बल्कि उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वितरण जैसे कामों का व्यावहारिक अनुभव भी दे रहा है, जिससे वे आगे चलकर अपना उद्यम खड़ा कर सकें।
क्यों अहम है यह मॉडल?
यह मॉडल दो काम एक साथ करता है। पहला, गांव की महिलाओं को घर के पास पक्की आमदनी मिलती है। दूसरा, आंगनबाड़ी के बच्चों और माताओं तक पोषण आहार स्थानीय स्तर पर तैयार होकर पहुंचता है। ध्यान रहे, ₹50 हजार महीने का आंकड़ा समूह की सदस्य द्वारा बताया गया अनुमानित मुनाफा है, जो पूरे समूह का है, हर सदस्य का अलग-अलग नहीं।
छत्तीसगढ़ के गांवों में ऐसी और सफलता की कहानियां भी सामने आ रही हैं, जैसे राजनांदगांव का खैरा गांव, जो 100% सोलर बना। किसानों के लिए धान खरीदी 2026-27 के नए उपार्जन केंद्रों की सूची और मज़दूरों के लिए छत्तीसगढ़ मजदूरी संहिता नियम 2026 भी पढ़ें।
FAQ
सरस्वती स्व-सहायता समूह कहां का है?
यह रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा गांव का समूह है, जिसमें 10 महिलाएं हैं।
समूह को कितना मुनाफा हो रहा है?
समूह की सदस्य चम्पा चौहान के मुताबिक रेडी-टू-ईट बनाने और बांटने से समूह को हर महीने लगभग 50 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।
रायगढ़ जिले में कितने आंगनबाड़ी केंद्र हैं?
जिले में 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनके लिए 10 महिला समूहों को रेडी-टू-ईट बनाने का काम मिला है।
समूहों को कौन सी सरकारी मदद मिल रही है?
चुने गए समूहों को PMFME योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी दी जा रही है, और वे बिहान योजना से जुड़े हैं।
स्रोत
छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग (DPR) की प्रेस रिलीज़, 2 नवंबर 2026, PMFME योजना (खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय) और महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़। सभी तस्वीरें DPR छत्तीसगढ़ की आधिकारिक रिलीज़ से।

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