छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 की आखिरी रात नवा रायपुर का मेला मैदान किसी बड़े कॉन्सर्ट जैसा नज़र आया। मंच पर एक तरफ बॉलीवुड के मशहूर पार्श्व गायक अभिजीत भट्टाचार्य के 90 के दशक के सदाबहार गाने थे, तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ी लोकगायक सुनील सोनी के माटी से जुड़े गीत और लोक कलाकार उषा बारले की पंडवानी। जनसंपर्क विभाग (DPR छत्तीसगढ़) के मुताबिक मंगलवार, 3 नवंबर 2026 की इस अंतिम सांस्कृतिक संध्या में शिल्प ग्राम मंच पर भी पंथी, कथक, जसगीत, सूफी संगीत और नाटक समेत कुल 10 प्रस्तुतियां हुईं।

राज्योत्सव की आखिरी शाम: एक नज़र में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| आयोजन | छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 (राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ), अंतिम दिन |
| तारीख | 3 नवंबर 2026 (मंगलवार) की शाम |
| स्थान | राज्योत्सव मेला मैदान, नवा रायपुर |
| मुख्य मंच | अभिजीत भट्टाचार्य (बॉलीवुड), सुनील सोनी (छत्तीसगढ़ी), उषा बारले (पंडवानी) |
| शिल्प ग्राम मंच | भजन, पंथी, लोकमंच, जसगीत-जगराता, आदिवासी लोक संगीत-नृत्य, कथक, सूफी, नाटक (कुल 10 प्रस्तुतियां) |
| जानकारी का स्रोत | DPR छत्तीसगढ़, 3 नवंबर 2026 |
अभिजीत भट्टाचार्य ने “बादशाह ओ बादशाह” से बांधा समां
सफेद जैकेट और काले चश्मे वाले अपने चिर-परिचित अंदाज़ में मंच पर आए अभिजीत ने अपने करियर के कई हिट गाने सुनाए। DPR के मुताबिक उन्होंने “चांद तारे”, “हाँ, यहाँ कदम-कदम पर हसीन आये हैं” और “आशिक हूँ मैं, कातिल भी हूँ” जैसे लोकप्रिय गीत गाए। जैसे ही “बादशाह ओ बादशाह” की धुन बजी, पंडाल में बैठे दर्शक भी झूमने लगे।
इसके बाद अभिजीत ने रोमांटिक मूड में “बहुत खूबसूरत हो” और “वादा रहा सनम” गाकर शाम को और यादगार बना दिया। 90 के दशक के संगीत के साथ बड़े हुए दर्शकों के लिए यह किसी नॉस्टैल्जिया ट्रिप से कम नहीं था। अभिजीत हिंदी फिल्म संगीत के उन गायकों में गिने जाते हैं जिनकी आवाज़ “येस बॉस” और “बादशाह” जैसी फिल्मों के गानों से घर-घर पहचानी जाती है।

सुनील सोनी के गीतों में गूंजी छत्तीसगढ़ की माटी
छत्तीसगढ़ी संगीत के लोकप्रिय गायक सुनील सोनी ने मंच संभाला तो माहौल पूरी तरह छत्तीसगढ़ी रंग में रंग गया। उन्होंने “छैंया भुइंया ला छोड़ तैं” से धरती और गांव से जुड़ाव की भावना जगाई, तो “झन भूलौ मां-बाप ला” से माता-पिता के त्याग और ममता का संदेश दिया।
इसके बाद “मीठ-मीठ लागे मया के बानी” और छत्तीसगढ़ी फिल्म हांडा के लोकप्रिय गीत “ए गोरी ओ गोरी” पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। DPR के मुताबिक उनके गीतों में प्रदेश की माटी से लगाव, मां के प्रति सम्मान, प्रेम और आत्मीयता की भावनाएं झलकती रहीं। (ध्यान दें: यह छत्तीसगढ़ी लोकगायक सुनील सोनी हैं, रायपुर सांसद सुनील सोनी नहीं।)
उषा बारले की पंडवानी: मंच पर जीवंत हुई महाभारत की लोकगाथा
अंतिम दिन की सबसे पारंपरिक प्रस्तुति सुप्रसिद्ध लोक कलाकार उषा बारले की पंडवानी रही। पंडवानी छत्तीसगढ़ की वह लोकगाथा शैली है, जिसमें कलाकार तंबूरा हाथ में लेकर महाभारत के पांडवों की कथा गाते और अभिनय के साथ सुनाते हैं। DPR के मुताबिक उषा बारले की प्रस्तुति ने प्रदेश की लोककथात्मक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया।

शिल्प ग्राम मंच पर 10 प्रस्तुतियां: पंथी से कथक और सूफी तक
मुख्य मंच के साथ-साथ शिल्प ग्राम मंच पर भी दिन भर सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे। DPR की जानकारी के मुताबिक यहां इन कलाकारों और दलों ने प्रस्तुति दी:
| विधा | कलाकार / दल |
|---|---|
| भजन गायन | सुश्री आस्था भट्ट (रायपुर) |
| पंथी नृत्य | श्रीमती आरती बारले (दुर्ग) और श्री दिनेश कुमार जांगड़े (रायपुर) के दल |
| लोकमंच | श्री राकेश सेन (कबीरधाम) के नेतृत्व में |
| जसगीत-जगराता | सुश्री पूर्णिमा साहू (रायपुर) |
| आदिवासी लोक संगीत एवं नृत्य | श्री अभिषेक सोनकर का दल |
| कथक समूह नृत्य | श्रीमती दीपाली पाण्डेय का दल |
| कथक नृत्य | सुश्री अनुष्णा रॉय चौधरी |
| सूफी संगीत | श्री वृधुमन वचस्पति भारती |
| नाटक | श्री आनंदकुमार पाण्डेय का दल |

तीन दिन, तीन यादगार शामें
राज्योत्सव 2026 का शुभारंभ 1 नवंबर को हुआ था। पहली शाम पलक मुछाल और आरु साहू के नाम रही, दूसरी शाम राज्यपाल रमेन डेका की मौजूदगी में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, और तीसरी व आखिरी शाम अभिजीत, सुनील सोनी और उषा बारले की प्रस्तुतियों के साथ खत्म हुई। उसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समापन समारोह में 36 विभूतियों और संस्थाओं को राज्य अलंकरण दिए, जिसकी पूरी खबर यहां पढ़ें। मेले के शिल्पग्राम, मीना बाजार और खाना खजाना की झलक इस रिपोर्ट में है।
बॉलीवुड और लोकसंगीत को एक ही मंच पर लाने का यह प्रयोग बताता है कि राज्योत्सव अब सिर्फ सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक उत्सव बन गया है, जहां शहर और गांव दोनों के दर्शक अपनी पसंद का संगीत सुनने पहुंचते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
राज्योत्सव 2026 के आखिरी दिन किन कलाकारों ने प्रस्तुति दी?
3 नवंबर 2026 को मुख्य मंच पर बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और पंडवानी कलाकार उषा बारले ने प्रस्तुति दी।
अभिजीत ने कौन-से गाने गाए?
DPR के मुताबिक उन्होंने “चांद तारे”, “हाँ, यहाँ कदम-कदम पर हसीन आये हैं”, “आशिक हूँ मैं, कातिल भी हूँ”, “बादशाह ओ बादशाह”, “बहुत खूबसूरत हो” और “वादा रहा सनम” गाए।
शिल्प ग्राम मंच पर कितनी प्रस्तुतियां हुईं?
शिल्प ग्राम मंच पर भजन, पंथी, लोकमंच, जसगीत, आदिवासी लोक संगीत, कथक, सूफी संगीत और नाटक समेत कुल 10 प्रस्तुतियां हुईं।
पंडवानी क्या है?
पंडवानी छत्तीसगढ़ की लोकगाथा शैली है, जिसमें कलाकार महाभारत के पांडवों की कथा गायन और अभिनय के साथ सुनाते हैं।
राज्योत्सव 2026 कहां हुआ?
राज्य स्तरीय राज्योत्सव 1 से 3 नवंबर 2026 तक नवा रायपुर के राज्योत्सव मेला मैदान में हुआ।








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