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‘चढ़ावे से पहले चंदा चोरी?’ राम मंदिर ट्रस्ट के 5 मिनट वाले ज़मीन सौदे पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री की ‘मूक सहमति’ पर सवाल उठाया

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद का सपना, चंदे का माल अपना?’ लिखकर राम मंदिर ट्रस्ट के 2021 वाले ज़मीन सौदे पर सवाल दोहराए और प्रधानमंत्री से पूछा कि वे ‘मूक सहमति’ देकर पाप के भागी क्यों बने। भाजपा का जवाब अभी नहीं आया है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें, बीच में VS और ‘चंदे का माल अपना?’ उद्धरण
फोटो: Wikimedia Commons (जयराम रमेश: Yann, CC BY-SA 4.0; नरेंद्र मोदी: Government of India, GODL-India)

मुख्य बातें

  • पांच मिनट, दो रजिस्ट्री और 825% का सवाल
  • चढ़ावा चोरी केस अभी कहां है
  • कांग्रेस के बाकी सवाल
  • आस्था, पैसा और चुनाव: यह मुद्दा क्यों अलग है

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला अब सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं रहा, यह उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले सबसे तीखे राजनीतिक मुद्दों में बदलता दिख रहा है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को कांग्रेस ने इस बहस में पुराने ज़मीन सौदे का सवाल जोड़ दिया और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़ा किया। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने X पर हिंदी में एक लंबी पोस्ट लिखी, जिसकी पहली पंक्ति ही नारे की तरह थी।

भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद का सपना — चंदे का माल अपना? राम मंदिर में सिर्फ चढ़ावा ही चोरी नहीं हुआ है। राम मंदिर निर्माण के लिए देश के करोड़ों लोगों से जो हज़ारों करोड़ रुपये चंदे के रूप में इकट्ठा किए गए, उसमें भी डाका डाला गया है।

जयराम रमेश, X पोस्ट, 22 अक्टूबर 2026

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस और इंडिया टुडे ने PTI के हवाले से यह पोस्ट प्रकाशित की है। रमेश का आरोप है कि विपक्ष के बार-बार सवाल उठाने और भाजपा, आरएसएस व विहिप से जुड़े लोगों पर आरोप लगने के बावजूद न कोई जांच हुई, न कार्रवाई।

पांच मिनट, दो रजिस्ट्री और 825% का सवाल

कांग्रेस का सबसे बड़ा हमला 2021 के ‘बाग बिजैसी’ ज़मीन सौदे पर है। रमेश ने अपनी पोस्ट में भाजपा से तीन सवाल दोहराए। ये कांग्रेस के आरोप और सवाल हैं, किसी अदालत या जांच एजेंसी का निष्कर्ष नहीं:

  1. क्या यह सही नहीं है कि 18 मार्च 2021 को शाम 7:10 बजे तिवारी-अंसारी ने कुसुम पाठक से ज़मीन ₹2 करोड़ में खरीदी, और 7:15 बजे वही ज़मीन ट्रस्ट ने चंपत राय के ज़रिए ₹18.5 करोड़ में ले ली? रमेश ने पूछा, “5 मिनट में 825% का डाका कैसे होने दिया गया!”
  2. क्या यह सही नहीं है कि दोनों रजिस्ट्रियों पर गवाह एक ही थे, तत्कालीन भाजपा महापौर ऋषिकेश उपाध्याय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा?
  3. क्या यह सही नहीं है कि 2021 की जांच रिपोर्ट 5 साल बाद भी सार्वजनिक नहीं हुई? ज़मीन सौदों पर SIT जांच का नतीजा कब आएगा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘तिवारी-अंसारी’ से रमेश का इशारा राम मोहन तिवारी और सुल्तान अंसारी की ओर था, जिन्होंने कथित तौर पर यह ज़मीन ट्रस्ट को बेची थी। पोस्ट के आखिर में रमेश ने प्रधानमंत्री से पूछा कि उनकी “नाक के नीचे यह चंदा चोरी और चढ़ावा चोरी होती रही”, तो उन्होंने “मूक सहमति देकर पाप के भागी” बनना क्यों चुना।

चढ़ावा चोरी केस अभी कहां है

राजनीतिक आरोपों से अलग, चढ़ावा चोरी मामले की आपराधिक जांच का एक ठोस रिकॉर्ड है। ETV भारत के मुताबिक SIT ने 23 सितंबर को अयोध्या में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायाधीश की अदालत में करीब 74,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें आठ आरोपी हैं: अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव। सभी न्यायिक हिरासत में बताए गए।

चार्जशीट में 133 गवाह हैं, जिनमें ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, पूर्व प्रशासक गोपाल राव और शिकायतकर्ता कृष्ण मोहन शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार SIT ने अगस्त में राय और मिश्रा को क्लीन चिट दी थी। आरोप सामने आने के बाद दोनों ने 27 जून को अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

चंपत राय का पक्ष भी दर्ज है। ETV भारत ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पूछताछ में राय ने किसी भी गड़बड़ी में शामिल होने से इनकार किया और कहा कि संदिग्ध चोरी के मामले में उन्होंने खुद शिकायत करवाई थी, जिसके बाद आरोपी गिरफ्तार हुए। उनके मुताबिक चंदा संग्रह में पारदर्शिता रखना उनकी ज़िम्मेदारी थी और गड़बड़ी का पता चलते ही उन्होंने कार्रवाई की।

कांग्रेस के बाकी सवाल

कांग्रेस इससे पहले भी कई सवाल उठा चुकी है। सोमवार को पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘चुप्पी’ पर सवाल किया था और कहा था कि “सत्ता के अहंकार में अंधे चंदा चोरों” को सज़ा देना नागरिकों की ज़िम्मेदारी है। पार्टी ने यह भी पूछा था कि 4 जून को चोरी से जुड़ा वीडियो राय तक पहुंचने के बाद FIR दर्ज होने में 21 दिन की देरी क्यों हुई। कांग्रेस की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच हो।

आस्था, पैसा और चुनाव: यह मुद्दा क्यों अलग है

राम मंदिर भाजपा की राजनीति का भावनात्मक केंद्र रहा है। मंदिर निर्माण के लिए देश भर से छोटे-बड़े दान आए थे, इसलिए इससे जुड़े किसी भी पैसे के सवाल में आम श्रद्धालु भी खुद को हिस्सेदार मानता है। कांग्रेस का ‘चंदे का माल अपना?’ वाला नारा इसी भावना को निशाना बनाता है। वह आस्था पर सवाल नहीं उठा रही, बल्कि आस्था के नाम पर जुटाए गए पैसे के हिसाब पर सवाल उठाकर भाजपा को रक्षात्मक बनाने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर, जांच के रिकॉर्ड में अब तक जो सामने आया है वह गिनती से जुड़े कर्मचारियों और कुछ अन्य लोगों पर लगे आरोप हैं, और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी गवाह की भूमिका में हैं। ज़मीन सौदे वाले आरोप 2021 से चर्चा में हैं, लेकिन उन पर कोई न्यायिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को सबूतों की कसौटी पर परखा जाना बाकी है। अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में नहीं दिखती।

22 अक्टूबर के इन ताज़ा आरोपों पर भाजपा, प्रधानमंत्री कार्यालय या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टिंग में नहीं मिली है, यानी उनके जवाब का इंतज़ार है।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: इंडिया टुडे, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, ETV भारत।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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