समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव 12 दिसंबर 2026 को अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने जाएंगे। जनवरी 2024 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह उनका पहला राम मंदिर दौरा होगा। सपा के प्रवक्ता और अयोध्या सदर से पूर्व विधायक तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने शनिवार, 7 नवंबर को यह जानकारी दी। उनके मुताबिक अखिलेश अपनी पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ पहले हनुमानगढ़ी जाएंगे और उसके बाद रामलला के दर्शन करेंगे।
घोषणा के कुछ ही घंटे बाद अयोध्या में 10वें दीपोत्सव के मंच से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश का नाम लिए बिना कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं और संतों पर लाठीचार्ज कराया, वे अयोध्या जरूर आएं, लेकिन पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगें। उनका इशारा 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग की ओर था, जब अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। देर शाम अखिलेश यादव ने X पर राम मंदिर के दान से जुड़े चोरी के मामले को उठाते हुए मुख्यमंत्री से सवाल पूछा। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में करीब तीन महीने का समय बचा है, इसलिए इस दौरे की घोषणा ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

हनुमानगढ़ी से रामलला तक: सपा ने क्या बताया
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पवन पांडेय ने बताया कि सपा प्रमुख राम मंदिर जाने से पहले इटावा में बन रहे केदारेश्वर धाम में पूजा करेंगे, जिसका निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। अखिलेश ने इसी साल जुलाई में कहा था कि वे केदारेश्वर धाम पूरा होने के बाद राम मंदिर जाएंगे। यह बात उन्होंने तब कही थी, जब कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री योगी ने उन्हें “सद्बुद्धि” के लिए अयोध्या आने की सलाह दी थी।
पांडेय ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह दौरा पूरी तरह धार्मिक है और इसका कोई राजनीतिक संबंध नहीं है। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार उन्होंने कहा कि अखिलेश परिवार के साथ हनुमान जी और रामलला के दर्शन के लिए आ रहे हैं, यह आस्था का विषय है और भाजपा को आस्था पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। एनडीटीवी के मुताबिक पवन पांडेय को सपा ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए एक बार फिर अयोध्या सीट से उम्मीदवार घोषित किया है।
इंडियन एक्सप्रेस ने सपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से लिखा है कि इस दौरे के जरिए अखिलेश मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों को पीछे छोड़ने और गैर-यादव ओबीसी के साथ ब्राह्मण-ठाकुर जैसी सवर्ण जातियों का समर्थन पाने की कोशिश करेंगे। उसी नेता के मुताबिक अखिलेश रामलला की धरती से मंदिर के दान प्रबंधन में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाएंगे।
दीपोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री योगी ने क्या कहा
शनिवार को अयोध्या के रामकथा पार्क में दीपोत्सव का मुख्य कार्यक्रम हुआ। एनडीटीवी इंडिया के मुताबिक उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि थे और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद थीं। सरकारी बयान के अनुसार सरयू के घाटों से लेकर मंदिरों और गलियों तक 36 लाख से अधिक दीप जलाए गए। भगवान श्रीराम के राजतिलक के बाद अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा:
जिन लोगों ने उपेक्षित किया था, अपमानित किया था, राम भक्तों पर गोलियां चलाई थीं, संतों को अपमानित करके उन पर लाठीचार्ज किए थे, वे लोग अयोध्या आएं जरूर, लेकिन माफी मांग करके आएं। राम भक्तों से एक बार माफी तो मांग लें, संतों से एक बार माफी तो मांग लें। अपने कृत्यों के लिए पश्चाताप कर लें।
योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश (दीपोत्सव, अयोध्या, 7 नवंबर 2026)
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रभु श्रीराम सबके प्रति कृपालु हैं और सबको माफ कर देंगे, “लेकिन अहंकारी सत्ता को समाप्त करने में प्रभु कोई क्षण भी नहीं लगाते।” टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि ठीक 36 साल पहले सरयू का जल रामभक्तों के खून से लाल हुआ था और जिन्होंने कभी अयोध्या में “जय श्रीराम” के उद्घोष पर रोक लगाई थी, वे आज राम मंदिर में दर्शन का सपना देख रहे हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार योगी ने कहा कि अयोध्या किसी एक पार्टी या परिवार की नहीं है।
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा, “जो लोग अयोध्या की गलियों को रक्तरंजित करते थे, आज वे भी अपने लोभ का संवरण नहीं कर पा रहे हैं।” उन्होंने कथा में जाने वाले कुछ नेताओं के आचरण पर भी सवाल उठाया और कहा कि उन्हें यह भी पता नहीं होता कि “वह कथा है या मुशायरा”। एनडीटीवी के मुताबिक अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को पवन पांडेय की ओर से आयोजित भागवत कथा में शामिल होने अयोध्या गए थे, लेकिन तब वे राम मंदिर नहीं गए थे।

नीचे के वीडियो में दीपोत्सव के मंच से दिया गया मुख्यमंत्री का यह बयान सुना जा सकता है (वीडियो: Zee News, YouTube)।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “बहुत देर कर दी हुजूर आते-आते।” त्रिपाठी का कहना था कि जो लोग रामभक्तों पर गोली चलवाने को अपनी उपलब्धि मानते थे और बाबरी मस्जिद दोबारा बनाने का वादा करते थे, वे अब हिंदुत्व के बढ़ते प्रभाव की वजह से राम मंदिर जाने की घोषणा कर रहे हैं, और चुनावी फायदे के लिए किए गए दर्शन का उन्हें लाभ नहीं मिलेगा।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि सिर्फ चुनाव के मौसम में मंदिर जाना और बाकी समय सनातन धर्म पर सवाल उठाना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि जब तक सपा या उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं होती, उन्हें कुछ नहीं कहना; आधिकारिक पुष्टि के बाद वे सवाल पूछेंगे। प्रदेश सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने एनडीटीवी से कहा कि चुनाव नजदीक होने के कारण सपा जनता को गुमराह करने के एजेंडे के साथ अयोध्या का मुद्दा उठा रही है।
अखिलेश का जवाब: दान चोरी मामले पर सवाल
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अखिलेश यादव ने सीधे माफी वाली बात का जवाब नहीं दिया, बल्कि राम मंदिर के दान से जुड़े चोरी के मामले को उठाया। एबीपी लाइव के मुताबिक X पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा:
अयोध्यावाले माननीय मुख्यमंत्री जी से पूछ रहे हैं कि ‘चढ़ावा-चंदा-दान’ चोरी के मामले में “दूध का दूध, पानी का पानी” कब होगा? होगा भी या नहीं होगा?
अखिलेश यादव, X पोस्ट, 7 नवंबर 2026
इसी पोस्ट में अखिलेश ने आरोप लगाया कि जांच में लीपापोती हुई है, “शाख को माफ़ी, फुनगी को फाँसी” वाला नतीजा निकला है, और “सरगना अभी भी बरक़रार है और उनके सेवक गिरफ़्तार हैं।” उन्होंने यह दावा भी किया कि आने वाले चुनाव में सपा अयोध्या जिले की पांचों विधानसभा सीटें जीतेगी। ये अखिलेश के आरोप और राजनीतिक दावे हैं; किसी जांच एजेंसी या अदालत ने किसी “सरगना” के बच निकलने की बात नहीं कही है।

दान चोरी का मामला अब कहां है
यह मामला इसी साल 7 जून को सामने आया था, जब पवन पांडेय ने आरोप लगाया था कि मंदिर के चढ़ावे से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक निकाले गए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार राज्य सरकार ने 13 जून को एसआईटी बनाई और 26 जून को दान की गिनती और रखरखाव से जुड़े आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ रेंज के आईजी की अगुवाई में दूसरी एसआईटी बनाई, जिसने गिनती के दौरान नकदी हटाने या छिपाने के 105 मामलों की पहचान की।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सितंबर में अयोध्या की अदालत में आठों आरोपियों के खिलाफ हजारों पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई और सूत्रों के अनुसार सात आरोपियों से 79.8 लाख रुपये बरामद हुए। 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की निगरानी बंद कर दी और याचिकाकर्ताओं को निचली अदालत में ट्रायल में सहयोग की छूट दी। राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि चोरी गिनती के समय हुई और सभी कलाकृतियों और दान का हिसाब मिल गया है। दूसरी ओर अयोध्या बार एसोसिएशन ने ट्रस्ट के तत्कालीन पदाधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग उठाई थी। अखिलेश इसी अंतर को आधार बनाकर कह रहे हैं कि बड़े लोग बच गए। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक अलग विवाद पर टाइम्सट्रोल्स की यह रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।
1990 की फायरिंग: 36 साल पुराना सवाल
राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अक्टूबर-नवंबर 1990 में बड़ी संख्या में कारसेवक अयोध्या पहुंचे थे। 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को विवादित ढांचे की ओर बढ़ रहे कारसेवकों पर पुलिस ने गोली चलाई थी। तब प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। मरने वालों की संख्या पर आज तक अलग-अलग दावे हैं: एनडीटीवी के मुताबिक तत्कालीन केंद्र सरकार ने 15 मौतें बताई थीं, मुलायम सिंह ने अलग-अलग समय पर अलग आंकड़े दिए, जबकि भाजपा, विहिप और अन्य हिंदुत्व संगठन 50 से ज्यादा मौतों का दावा करते रहे हैं।
समाजवादी पार्टी का रुख रहा है कि उस समय सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी थी। भाजपा इस घटना को हर चुनाव में सपा के खिलाफ उठाती रही है, और इस बार भी मुख्यमंत्री की माफी की मांग उसी से जुड़ी है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन हिंदू पक्ष को सौंप दी थी। अखिलेश कहते रहे हैं कि इस फैसले के बाद अयोध्या विवाद सुलझ चुका है, हालांकि वे भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप भी लगाते रहे हैं।

2027 के चुनाव से पहले अयोध्या का समीकरण
अयोध्या पिछले दो साल से उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में है। 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद (अयोध्या) सीट सपा के अवधेश प्रसाद ने जीती थी, जिसे सपा राम मंदिर बनने के बाद भी भाजपा की हार के रूप में पेश करती रही है। विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने हैं। एनडीटीवी के मुताबिक पिछले एक महीने से अयोध्या सीट को लेकर भी दोनों नेताओं में बयानबाजी चल रही थी। 8 अक्टूबर को अयोध्या दौरे पर अखिलेश ने योगी को वहां से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी, और 10 अक्टूबर को बलरामपुर की रैली में योगी ने जवाब दिया था कि अखिलेश नामांकन करें तो वे भी करेंगे। बाद में अखिलेश ने घोषणा की कि वे खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और पूरे प्रदेश में प्रचार पर ध्यान देंगे।
भाजपा लंबे समय से अखिलेश पर तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाती रही है, जबकि सपा “पीडीए” (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के नारे के सहारे सामाजिक गठजोड़ बनाने में लगी है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर में दर्शन को दोनों पक्ष अलग-अलग नजर से देख रहे हैं: सपा इसे आस्था का निजी मामला बता रही है, जबकि भाजपा इसे चुनावी कदम कह रही है और 1990 की घटना पर माफी की शर्त रख रही है।

आगे क्या
अखिलेश यादव का दौरा 12 दिसंबर को प्रस्तावित है। अब तक यह घोषणा सपा प्रवक्ता की ओर से हुई है; हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मुख्यमंत्री के बयान के समय तक सपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी, और बाद में अखिलेश ने X पर दान मामले वाला सवाल उठाया। उपमुख्यमंत्री मौर्य कह चुके हैं कि आधिकारिक पुष्टि के बाद वे सवाल उठाएंगे। दौरे का विस्तृत कार्यक्रम या सपा की ओर से कोई और औपचारिक बयान आने पर यह खबर अपडेट की जाएगी।
रिपोर्ट के आधार: इंडियन एक्सप्रेस (8 नवंबर 2026), हिंदुस्तान टाइम्स, एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया, टाइम्स ऑफ इंडिया (लखनऊ), एनडीटीवी इंडिया, एबीपी लाइव, आईएएनएस (सभी 7-8 नवंबर 2026); दान मामले की पृष्ठभूमि: हिंदुस्तान टाइम्स (2 नवंबर 2026), इंडियन एक्सप्रेस (24 सितंबर 2026); अखिलेश यादव का X हैंडल @yadavakhilesh।








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