छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR इस साल फरवरी में पूरा हो चुका है, लेकिन इस पर राजनीति अभी थमी नहीं है। शनिवार 24 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दावा किया कि SIR के दौरान प्रदेश में करीब 25 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, और पूछा कि जिनके नाम कटे हैं उनकी सूची सार्वजनिक की गई है या नहीं। उसी दिन भाजपा सांसद और प्रदेश मुख्य प्रवक्ता संतोष पांडेय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर उल्टा आरोप लगाया कि वह ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाकर मतदाताओं को गुमराह कर रही है।
दोनों तरफ के बयानों के बीच एक सीधा सवाल बचता है: 25 लाख का आंकड़ा कहां से आया, और क्या सरकारी रिकॉर्ड इससे मेल खाता है? इस रिपोर्ट में हमने दोनों पक्षों के बयान, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) छत्तीसगढ़ के आधिकारिक आंकड़े और आम मतदाता के लिए जरूरी प्रक्रिया को एक जगह रखा है।
बघेल का सवाल: नाम कटे तो सूची कहां है
रायपुर न्यूज नेटवर्क और छत्तीसगढ़.को की रिपोर्ट के मुताबिक, बघेल ने कहा कि संतोष पांडेय भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता होने के साथ सांसद भी हैं, इसलिए उन्हें इस मामले में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। बघेल ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के एक कथित बयान का भी हवाला दिया, जिसमें रिपोर्ट्स के अनुसार नाम ‘10 बार’ काटे जाने की बात कही गई थी। बघेल ने इसे अपने आरोपों की पुष्टि की तरह पेश किया। उन्होंने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि भाजपा और आयोग के बीच अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है।
यह बयान बघेल ने रायपुर एयरपोर्ट पर लखनऊ रवाना होने से पहले दिया था। इसी बातचीत में उन्होंने भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के दौरे और गैस सिलेंडर के मुद्दे पर भी तंज कसे थे, जिसकी चर्चा हम स्मृति ईरानी के रायपुर दौरे वाली रिपोर्ट में कर चुके हैं। यहां फोकस सिर्फ SIR वाले हिस्से पर है।
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संतोष पांडेय का पलटवार: आयोग निष्पक्ष, गलती सुधारने का रास्ता खुला
संतोष पांडेय ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनका कहना था कि कांग्रेस का जनाधार लगातार कमजोर हो रहा है और इसी वजह से चुनावी प्रक्रिया पर लोगों के मन में अविश्वास पैदा करने की कोशिश हो रही है।
पांडेय ने निर्वाचन आयोग को निष्पक्ष संस्था और जनादेश का रक्षक बताया। SIR का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी तरह की गलती हो तो उसे सुधारने का प्रावधान है और इसके लिए जरूरी फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि केरल में कांग्रेस से जुड़े कुछ नेताओं और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने SIR की प्रक्रिया का समर्थन किया है।
रायपुर के बिरगांव नगर निगम क्षेत्र में SIR के दौरान कथित गड़बड़ी से जुड़े सवाल पर भी पांडेय ने सुधार की व्यवस्था का ही जिक्र किया। दोनों रिपोर्ट्स में साफ लिखा है कि उन्होंने इस मामले में गड़बड़ी की प्रकृति या प्रभावित मतदाताओं की संख्या का ब्योरा नहीं दिया। उन्होंने बघेल पर मनगढ़ंत बातें करने का आरोप भी लगाया और राष्ट्रपति की मिमिक्री वाले पुराने विवाद का हवाला देकर राहुल गांधी व कांग्रेस को महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर घेरा।
आधिकारिक आंकड़े क्या कहते हैं
25 लाख का आंकड़ा हवा में नहीं है। CEO छत्तीसगढ़ ने 21 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करते हुए जो प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी (जिसे जनसंपर्क विभाग ने भी प्रकाशित किया), उसके आंकड़े इस तरह हैं:
- SIR से पहले (प्रारूप सूची से पहले) प्रदेश में कुल मतदाता: 2,12,30,737
- दिसंबर 2025 में प्रकाशित प्रारूप (ड्राफ्ट) सूची में मतदाता: 1,84,95,920, यानी करीब 27.35 लाख कम
- दावे-आपत्तियों के बाद 21 फरवरी 2026 की अंतिम सूची में मतदाता: 1,87,30,914
- ड्राफ्ट के बाद अंतिम सूची में शुद्ध बढ़ोतरी: 2,34,994
यानी SIR से पहले और अंतिम सूची के बीच कुल अंतर 24,99,823 मतदाताओं का बैठता है, जो लगभग 25 लाख है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने भी फरवरी में यही गणना छापी थी। इस लिहाज से बघेल का आंकड़ा आधिकारिक संख्या के करीब है। फर्क व्याख्या में है: CEO कार्यालय के मुताबिक बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर सर्वे करके मृत, स्थायी रूप से कहीं और चले गए और दो जगह दर्ज मतदाताओं की पहचान की थी, जबकि कांग्रेस का सवाल है कि क्या सभी कटौतियां वाकई सही थीं।
सूची सार्वजनिक होने के सवाल पर भी CEO की उसी विज्ञप्ति में जानकारी है। उसके अनुसार जिन मतदाताओं के गणना फॉर्म वापस नहीं आए, उनकी पुष्टि के लिए BLO और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) की बैठकें हुईं, और ऐसे मतदाताओं की विधानसभा क्षेत्रवार सूची जिला निर्वाचन अधिकारी और CEO छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर प्रकाशित की गई थी। अंतिम सूची की प्रतियां भी मान्यता प्राप्त दलों को दी गईं। हालांकि हर कटे नाम का कारण के साथ पूरा ब्योरा आज की तारीख में कहां और किस रूप में उपलब्ध है, इसकी हम स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाए। बघेल के ताजा बयान पर निर्वाचन आयोग या CEO कार्यालय की ओर से अब तक कोई जवाब सामने नहीं आया है, जवाब का इंतज़ार है।
दिल्ली में भी वही बहस, इस बार सॉफ्टवेयर पर
रविवार को यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी गरमाया। इंडिया टुडे ने PTI के हवाले से बताया कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसके मुताबिक निर्वाचन आयोग ने RTI आवेदन के जवाब में SIR के दौरान मतदाता सूची की गलतियां और विसंगतियां पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से मना कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने इसे ‘वाणिज्यिक गोपनीयता, ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा’ से जुड़ी जानकारी बताकर RTI कानून के तहत छूट का हवाला दिया।
रमेश ने आरोप लगाया कि ECINET सॉफ्टवेयर SIR के केंद्र में है और इसके जरिए मतदाता सूचियों में केंद्रीकृत हेराफेरी हुई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR को तुरंत रोकने की मांग दोहराई। यह आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आयोग ने चुनाव आयुक्तों की असहमति वाली रिपोर्ट्स पर पहले कहा है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग राय आना सामान्य है और उसके सभी आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत होते हैं। सॉफ्टवेयर वाले ताजा आरोप पर आयोग का अलग से जवाब अभी सामने नहीं आया है।
इसी बीच रायपुर में कांग्रेस की AICC पर्यवेक्षक और सांसद शोभा बच्छाव की रविवार सुबह राजीव भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस तय थी, जिसमें लल्लूराम के मुताबिक SIR समेत कई मुद्दों पर चर्चा की संभावना थी। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक उनके बयान का विस्तृत ब्योरा हमें किसी भरोसेमंद रिपोर्ट में नहीं मिला।
यह आंकड़ा इतना मायने क्यों रखता है
छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटें हैं। मोटे तौर पर देखें तो 25 लाख मतदाता औसतन हर सीट पर करीब 27-28 हजार के बराबर हैं, हालांकि असल कटौती हर इलाके में अलग-अलग है। प्रदेश में कई सीटों पर हार-जीत का अंतर इससे कहीं कम रहा है। इसलिए कटे नाम किस इलाके और किस वर्ग से ज्यादा हैं, यह सवाल 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक रूप से अहम बना रहेगा।
दूसरी तरफ यह भी सच है कि पुरानी मतदाता सूचियों में मृत लोगों, शहर बदल चुके परिवारों और दोहरी प्रविष्टियों की शिकायत हर दल करता रहा है। SIR का घोषित मकसद यही सफाई थी। इसलिए असली बहस इस पर नहीं है कि नाम कटे या नहीं, बल्कि इस पर है कि कटौती कितनी सही थी, और क्या किसी पात्र मतदाता को बिना सूचना के बाहर कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में फॉर्म 7 की आपत्तियों पर हमारी {AI(T_UP,’पिछली पड़ताल’)} में भी यही सवाल केंद्र में था।
अपना नाम कैसे जांचें और कटने पर क्या करें
अगर आप छत्तीसगढ़ के मतदाता हैं और आपको शक है कि आपका या परिवार के किसी सदस्य का नाम सूची से हट गया है, तो घबराने की जगह यह प्रक्रिया अपनाइए:
- निर्वाचन आयोग के मतदाता सर्च पोर्टल (electoralsearch.eci.gov.in), Voter Helpline ऐप या CEO छत्तीसगढ़ की वेबसाइट पर EPIC नंबर या नाम-पता डालकर अपनी प्रविष्टि जांचें।
- नाम नहीं मिलता है तो नया पंजीकरण या दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरें। यह voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन या अपने BLO के जरिए जमा हो सकता है।
- किसी अपात्र या मृत व्यक्ति के नाम पर आपत्ति करनी हो, या किसी का नाम हटवाना हो, तो उसके लिए फॉर्म 7 है।
- पता बदलने, नाम या उम्र की गलती सुधारने और विधानसभा क्षेत्र के भीतर या बाहर शिफ्ट होने के लिए फॉर्म 8 का इस्तेमाल होता है।
- किसी भी दिक्कत पर अपने इलाके के BLO, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) या मतदाता हेल्पलाइन 1950 से संपर्क करें, और जमा किए गए फॉर्म का रेफरेंस नंबर संभालकर रखें।
एक बात ध्यान रखने की है: अंतिम सूची छपने के बाद भी लगातार अद्यतन (continuous updation) के तहत नाम जुड़वाने का रास्ता खुला रहता है, लेकिन चुनाव की अधिसूचना के बाद नामांकन की आखिरी तारीख तक ही नए नाम उस चुनाव की सूची में जुड़ते हैं। इसलिए जांच अभी कर लेना समझदारी है, चुनाव के ठीक पहले नहीं।
आगे क्या देखना है
कांग्रेस SIR को राष्ट्रीय मुद्दा बनाए हुए है और छत्तीसगढ़ में बघेल का बयान उसी कड़ी का हिस्सा दिखता है। भाजपा इसे भ्रम फैलाने की राजनीति बता रही है। आंकड़ों के स्तर पर दोनों के दावों में एक जगह सहमति है कि करीब 25 लाख नाम सूची से बाहर हुए। असहमति इस पर है कि यह सफाई थी या चूक। इसका जवाब तभी साफ होगा जब कटे नामों का कारणवार और क्षेत्रवार ब्योरा आसानी से लोगों के सामने हो, और जहां शिकायत है वहां उसकी जांच दिखे। तब तक हर मतदाता के लिए सबसे भरोसेमंद कदम यही है कि वह खुद अपना नाम जांच ले।
इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: रायपुर न्यूज नेटवर्क, छत्तीसगढ़.को, इंडिया टुडे/PTI, लल्लूराम, CEO छत्तीसगढ़ प्रेस विज्ञप्ति (21.02.2026), जनसंपर्क विभाग छत्तीसगढ़, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस।

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