उत्तर बस्तर कांकेर जिले के एक किसान ने सरकारी योजना की मदद से अपना फार्म मशीनरी बैंक शुरू किया है, जिससे अब आसपास के किसान भी किराये पर आधुनिक कृषि यंत्र ले सकेंगे। कांकेर विकासखंड के ग्राम किरगापाटी के किसान बोधन कोरेटी को जिला राज्योत्सव 2026 में मुख्य अतिथि, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ट्रैक्टर और अनुदान राशि का चेक सौंपा। जनसंपर्क विभाग (DPR) छत्तीसगढ़ ने 4 नवंबर 2026 को यह जानकारी दी।
यह योजना कृषि अभियांत्रिकी विभाग की है। इसका मकसद छोटे और सीमांत किसानों तक महंगी मशीनें किराये पर पहुंचाना है, ताकि उन्हें बड़ी रकम लगाकर ये मशीनें खरीदनी न पड़ें।
एक नज़र में: बोधन कोरेटी का फार्म मशीनरी बैंक
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| किसान | बोधन कोरेटी, ग्राम किरगापाटी, विकासखंड कांकेर |
| कृषि भूमि | 5 एकड़ 35 डिसमिल |
| परिवार | 6 सदस्य |
| कुल परियोजना लागत | 15 लाख रुपये |
| बैंक ऋण | 12 लाख रुपये |
| विभागीय अनुदान (प्रावधान) | 6 लाख रुपये (ऋण के बाद, नियमानुसार) |
| अनुमानित अतिरिक्त आय | लगभग 3 लाख रुपये प्रति वर्ष |
पहले क्या दिक्कत थी
बोधन कोरेटी ने बताया कि पहले उनके पास खेती के लिए ज़रूरी मशीनें नहीं थीं। खेत की तैयारी, बुवाई और दूसरे कामों के लिए उन्हें दूसरे किसानों या किराये के यंत्रों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे समय और मेहनत ज़्यादा लगती थी और खेती की लागत भी बढ़ जाती थी। कई बार मशीन समय पर न मिलने से बुवाई या कटाई में देर हो जाती थी।
बैंक में कौन-कौन सी मशीनें हैं
DPR के मुताबिक उनके फार्म मशीनरी बैंक में खेती के हर चरण के लिए यंत्र रखे गए हैं:
| काम | यंत्र |
|---|---|
| खेत की तैयारी | ट्रैक्टर, रोटावेटर |
| धान की सीधी बुवाई | DSR सीड ड्रिल |
| फसल प्रबंधन | स्प्रेयर |
| कटाई और गहाई | रीपर, थ्रेशर |
| अन्य | दूसरे सहायक कृषि यंत्र |
आसपास के किसान इन यंत्रों को अपनी ज़रूरत के हिसाब से किराये पर ले सकेंगे। इससे खेत की तैयारी से लेकर कटाई-गहाई तक का काम समय पर हो सकेगा और श्रम व लागत दोनों घटेंगे।
15 लाख की लागत का हिसाब
कोरेटी ने कुल 15 लाख रुपये की परियोजना लागत से बैंक स्थापित किया। इसके लिए उन्होंने 12 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया। योजना के नियमों के अनुसार ऋण के बाद उन्हें 6 लाख रुपये का विभागीय अनुदान मिलने का प्रावधान है। यानी कुल लागत का करीब 40% हिस्सा सरकारी अनुदान से पूरा होगा। मशीनें किराये पर देने से उन्हें हर साल लगभग 3 लाख रुपये अतिरिक्त कमाई की उम्मीद है।
धान की सीधी बुवाई (DSR) क्यों अहम
DSR सीड ड्रिल से धान की नर्सरी और रोपाई की ज़रूरत नहीं पड़ती। इससे पानी और मज़दूरी दोनों की बचत होती है। छत्तीसगढ़ जैसे धान प्रधान राज्य में यह मशीन छोटे किसानों के लिए बहुत काम की है, लेकिन अकेले किसान के लिए इसे खरीदना महंगा पड़ता है। गांव में किराये पर उपलब्ध होने से इसका फायदा कई किसानों को मिलेगा।
कांकेर राज्योत्सव में क्या हुआ
कांकेर का जिला स्तरीय राज्योत्सव पीएमश्री शासकीय नरहरदेव स्कूल मैदान में हुआ। मुख्य अतिथि केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर अब तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य व संचार सुविधाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कांकेर क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की कोशिशों का भी ज़िक्र किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक आशाराम नेताम ने की। समारोह में स्कूली बच्चों और कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और अतिथियों ने विभागों की प्रदर्शनियां देखीं।
किसान इस योजना के बारे में कैसे जानें
फार्म मशीनरी बैंक योजना की पात्रता, अनुदान की शर्तें और आवेदन की प्रक्रिया की सही जानकारी के लिए किसान अपने ज़िले के कृषि अभियांत्रिकी विभाग या कृषि विभाग के कार्यालय से संपर्क करें। ऋण के लिए बैंक की शर्तें अलग से लागू होती हैं। इस लेख में दी गई रकम DPR की जानकारी पर आधारित है; हर मामले में अनुदान की राशि नियम और यंत्रों के हिसाब से बदल सकती है।
खेती से जुड़ी हमारी दूसरी खबरें: धमतरी के किसान को देशी धान बचाने पर राष्ट्रीय सम्मान, अक्टूबर 2026 में ट्रैक्टर बिक्री के आंकड़े और राज्योत्सव में वन विभाग की प्रदर्शनी को पहला पुरस्कार।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
फार्म मशीनरी बैंक योजना किस विभाग की है?
यह छत्तीसगढ़ के कृषि अभियांत्रिकी विभाग की योजना है, जिसमें किसान कृषि यंत्रों का बैंक बनाकर दूसरे किसानों को किराये पर यंत्र दे सकते हैं।
बोधन कोरेटी के बैंक की लागत कितनी है?
कुल लागत 15 लाख रुपये है। 12 लाख रुपये का बैंक ऋण लिया गया और नियमानुसार 6 लाख रुपये के विभागीय अनुदान का प्रावधान है।
इससे कितनी कमाई की उम्मीद है?
DPR के अनुसार यंत्र किराये पर देने से लगभग 3 लाख रुपये प्रति वर्ष अतिरिक्त आय की उम्मीद है।
ट्रैक्टर और अनुदान चेक किसने दिया?
कांकेर जिला राज्योत्सव 2026 में मुख्य अतिथि वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने दिया।

1 टिप्पणी