अमेरिका में अब तक AI कंपनियों को सबसे बड़ी राहत इस बात से थी कि वॉशिंगटन में कोई सख्त संघीय AI कानून नहीं था और व्हाइट हाउस राज्यों के AI कानूनों के खिलाफ खड़ा था। 3 नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनाव ने यह समीकरण बदल दिया है। OpenAI, Nvidia, Google, Microsoft और Anthropic जैसी कंपनियों को अब एक ऐसी संसद का सामना करना होगा जिसकी कमान डेमोक्रेट्स के हाथ में होगी। भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि देश की AI योजनाएं Nvidia के GPU और अमेरिकी क्लाउड पर टिकी हैं, और IT कंपनियों की सबसे बड़ी कमाई अमेरिका से आती है।
AP/रॉयटर्स के मुताबिक नतीजे: ट्रंप की ताकत कितनी घटी
AP के मुताबिक डेमोक्रेट्स ने हाउस और सीनेट दोनों जीत लिए हैं। हाउस में डेमोक्रेट्स 219 सीटों पर पहुंचे (बहुमत 218), और सीनेट में डेमोक्रेट्स 54, रिपब्लिकन 44 पर हैं, यानी डेमोक्रेट्स को 7 सीटों का शुद्ध फायदा हुआ। AP ने इसे ट्रंप और रिपब्लिकन शासन के खिलाफ ‘कड़ी फटकार’ बताया और लिखा कि यह कांग्रेस में ट्रंप के विरोध के नए दौर की शुरुआत है।
यानी ट्रंप की ताकत पर लगाम लगी है, यह बात नतीजों से साबित होती है। पर यह लगाम पूरी नहीं है। नई कांग्रेस जनवरी 2027 में बैठेगी, ट्रंप के पास वीटो रहेगा और उसे पलटने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए। चिप एक्सपोर्ट लाइसेंस जैसे फैसले मौजूदा कानून के तहत वाणिज्य मंत्रालय करता है। कांग्रेस अब ट्रंप के एजेंडे वाले नए कानून रोक सकेगी, समितियों के ज़रिए जांच कर सकेगी और बजट बिलों में शर्तें जोड़ सकेगी।
मोर्चा 1: राज्यों के AI कानूनों पर रोक की योजना कमज़ोर
ट्रंप ने 11 दिसंबर 2025 के कार्यकारी आदेश में राज्यों के AI कानूनों को अदालत में चुनौती देने के लिए न्याय विभाग की एक टास्क फोर्स बनाई थी। रॉयटर्स के मुताबिक 20 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस ने कांग्रेस के लिए एक राष्ट्रीय AI फ्रेमवर्क जारी किया, जिसमें राज्यों के नियमों को संघीय कानून से रोकने (preemption), बच्चों की सुरक्षा और डेटा सेंटर की बिजली लागत से आम लोगों को बचाने की बात थी। लेकिन कांग्रेस ने यह कानून पास नहीं किया। जुलाई 2025 में सीनेट ने 99-1 से उस प्रावधान को हटा दिया था जो राज्यों के AI नियमों पर 10 साल की रोक लगाता।
विश्लेषण: डेमोक्रेटिक बहुमत के रहते राज्यों के कानूनों पर व्यापक रोक वाला बिल पास होना मुश्किल दिखता है। इसका मतलब है कि कैलिफोर्निया जैसे राज्यों के AI नियम AI कंपनियों पर लागू होते रहेंगे।
मोर्चा 2: बड़ी टेक कंपनियों की जांच तेज़
Mint ने रॉयटर्स के हवाले से लिखा है कि सीनेट फाइनेंस कमेटी में डेमोक्रेट्स के मुख्य जांच वकील डेनियल गोशॉर्न (Daniel Goshorn) ने कहा कि पार्टी डेटा सेंटर टैक्स और AI को लेकर जनता की चिंताओं की जांच करेगी। रॉयटर्स के अक्टूबर पोल में 69% डेमोक्रेटिक वोटर डेटा सेंटर बनाने पर सीमा के पक्ष में थे, जबकि रिपब्लिकन में यह आंकड़ा 43% था।
मोर्चा 3: Nvidia और चिप एक्सपोर्ट पर सवाल
अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय के ब्यूरो ऑफ इंडस्ट्री एंड सिक्योरिटी (BIS) ने 15 जनवरी 2026 के नियम से Nvidia H200 और AMD MI325X जैसी चिप्स के चीन निर्यात को ‘केस-बाय-केस’ समीक्षा में डाल दिया था, इस शर्त के साथ कि चीन भेजी गई कुल कंप्यूटिंग क्षमता अमेरिकी ग्राहकों को भेजी गई क्षमता के 50% से ज़्यादा न हो। इसी दौरान 14 जनवरी को ट्रंप ने इन्हीं एडवांस चिप्स के आयात पर 25% टैरिफ लगाया (रॉयटर्स)। GAIN AI Act नाम का एक बिल, जिसमें अमेरिकी खरीदारों को पहले चिप देने की शर्त है, दोनों पार्टियों के सांसदों के समर्थन से पेश हुआ था, पर दिसंबर 2025 के रक्षा कानून में शामिल नहीं हुआ।
Nvidia के लिए दांव बड़ा है। Mint के मुताबिक 26 जुलाई 2026 को खत्म तिमाही में कंपनी का डेटा सेंटर रेवेन्यू 89 अरब डॉलर रहा, जो सालाना 117% ज़्यादा और कुल कमाई का 92% से अधिक था।
मोर्चा 4 और 5: डेटा सेंटर की बिजली और फ्रंटियर मॉडल की पारदर्शिता
विश्लेषण: कानूनी फर्म Foley & Lardner के स्टीफन कॉब ने CIO Dive से कहा कि कोई बड़ा संघीय AI कानून ज़रूरी नहीं कि आए, पर पार्टी बदलने से प्राथमिकताएं बदलती हैं और समितियों की जांच बढ़ेगी। संभावित फोकस हैं: डेटा सेंटर की बिजली लागत का बोझ आम उपभोक्ता पर न पड़े (यह मुद्दा व्हाइट हाउस फ्रेमवर्क में भी है), बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, और OpenAI, Anthropic, Google जैसे फ्रंटियर मॉडल बनाने वालों से ज़्यादा पारदर्शिता। ये संभावनाएं हैं, पास हुए कानून नहीं।
भारत के AI और IT सेक्टर पर असर (विश्लेषण)
तथ्य: PIB के मुताबिक IndiaAI मिशन का पांच साल का बजट 10,371.92 करोड़ रुपये है और इसके तहत 38,000 से ज़्यादा GPU जोड़े जा चुके हैं। इनमें ज़्यादातर अमेरिकी कंपनियों की चिप्स हैं। अभी तक भारत अमेरिकी एक्सपोर्ट कंट्रोल की सबसे सख्त श्रेणी में नहीं है।
- GPU सप्लाई: अगर कांग्रेस एक्सपोर्ट लाइसेंस पर सख्ती या ‘अमेरिका फर्स्ट’ सप्लाई की शर्तें जोड़ती है, तो भारत जैसे देशों को GPU मिलने में देरी या लागत बढ़ सकती है। यह भारत के सरकारी और निजी AI कंप्यूटिंग प्लान को प्रभावित कर सकता है।
- IT कंपनियां: TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों के लिए AI प्रोजेक्ट बनाती हैं। राज्यों के अलग-अलग AI नियम बने रहे तो कंप्लायंस का काम बढ़ेगा, जो लागत भी है और नए कारोबार का मौका भी।
- डेटा सेंटर निवेश: अगर अमेरिका में डेटा सेंटर पर रोक-टोक बढ़ती है, तो Microsoft, Google जैसी कंपनियां दूसरे देशों में क्षमता बढ़ाने पर ज़्यादा ध्यान दे सकती हैं। भारत इसका फायदा उठा सकता है।
- नीति पर असर सीमित समय में नहीं: नई कांग्रेस जनवरी 2027 से काम शुरू करेगी, इसलिए भारत पर कोई भी बड़ा असर 2027 में ही दिख सकता है।
बैकग्राउंड
ट्रंप सरकार ने 2025 से AI पर ‘कम नियम, ज़्यादा रफ्तार’ की नीति अपनाई। CIO Dive के मुताबिक इस साल फ्रंटियर AI मॉडल की सरकारी समीक्षा भी स्वैच्छिक रखी गई। दूसरी तरफ AI, डेटा सेंटर और टेक इंडस्ट्री का दबदबा इस चुनाव में मुद्दा बना। AP के मुताबिक महंगाई, ईरान युद्ध और भ्रष्टाचार की चिंताओं ने भी वोटरों का मूड तय किया।
प्रमुख लोग
- डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिका के राष्ट्रपति
- चक शूमर: सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता, GAIN AI Act के समर्थक
- हकीम जेफ्रीज़: हाउस में डेमोक्रेटिक नेता
- जेफ्री केसलर: अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय में अंडर सेक्रेटरी (BIS)
- जेन्सेन हुआंग: Nvidia के संस्थापक और CEO
- अश्विनी वैष्णव: भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के पूरे नतीजे और सीटों का हिसाब: US midterm election 2026: डेमोक्रेट ने House और सीनेट दोनों जीते, ट्रंप के सामने विरोधी कांग्रेस
इसी सीरीज़ की दूसरी रिपोर्ट: अमेरिकी मिडटर्म नतीजे और महंगी RAM: 4 बातें जो तय करेंगी भारत में फोन-लैपटॉप के दाम
स्रोत: AP (3-4 नवंबर 2026), NBC News सीनेट नतीजे, रॉयटर्स (14 जनवरी और 20 मार्च 2026), Mint/रॉयटर्स (नवंबर 2026), CIO Dive (नवंबर 2026), WCRC Leaders (4 नवंबर 2026, BIS नियम का ब्योरा), PIB/MeitY (IndiaAI मिशन)।

टिप्पणियाँ