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स्मृति ईरानी का सादगी वाला रायपुर दौरा, भूपेश बघेल ने सिलेंडर और पोस्टर पर कसा तंज

छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी रविवार को पहली बार रायपुर पहुंचीं। स्वागत में न होर्डिंग लगे, न ढोल-ताशे बजे और भाजयुमो की बाइक रैली भी रद्द हुई। दो दिन में 12 बैठकों में मिशन 2028 और हारी हुई 36 सीटों पर मंथन होगा। उधर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गैस सिलेंडर की कीमत और पोस्टर-बैनर के निर्देश पर तंज कसा है।

भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की तस्वीरें, बीच में VS
फोटो: स्मृति ईरानी, Ministry of Women and Child Development / Wikimedia Commons (GODL-India); भूपेश बघेल, Domino786 / Wikimedia Commons (CC0 1.0)

मुख्य बातें

  • एयरपोर्ट से ठाकरे परिसर तक: क्या-क्या अलग रहा
  • 12 बैठकों के पीछे असली एजेंडा
  • भूपेश बघेल का तंज: सिलेंडर, पाइपलाइन और पोस्टर
  • ईरानी और बघेल: पुराना आमना-सामना

रायपुर के माना एयरपोर्ट पर रविवार, 25 अक्टूबर की सुबह जो तस्वीर दिखी, वह छत्तीसगढ़ भाजपा के लिए थोड़ी अनोखी थी। पार्टी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी पहली बार राज्य के दौरे पर पहुंचीं, लेकिन स्वागत में न ढोल-ताशे बजे, न शहर में बड़े होर्डिंग लगे और न ही मंत्रियों की कतार दिखी। भारतीय जनता युवा मोर्चा की जो बाइक रैली प्रस्तावित थी, वह भी देर रात रद्द कर दी गई। संगठन की ओर से नामित सिर्फ 16 पदाधिकारी और विधायक एयरपोर्ट पर मौजूद रहे।

सादगी का यह संदेश जितना भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए था, उतना ही विपक्ष के लिए भी एक मौका बन गया। दौरे से एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गैस सिलेंडर की कीमतों, अडानी की गैस पाइपलाइन और पोस्टर-बैनर पर रोक के निर्देश को लेकर भाजपा और विष्णुदेव साय सरकार पर तंज कस दिया था। यानी स्मृति ईरानी के रायपुर उतरने से पहले ही उनका दौरा सियासी बहस का विषय बन चुका था।

एयरपोर्ट से ठाकरे परिसर तक: क्या-क्या अलग रहा

IBC24 की रिपोर्ट के मुताबिक स्मृति ईरानी सुबह करीब 9 बजे रायपुर पहुंचीं और सुरक्षा वाहनों के काफिले के बिना भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर के लिए रवाना हुईं। रिपोर्ट यह भी कहती है कि उन्होंने महिला PSO लेने से इनकार कर दिया। दैनिक भास्कर के अनुसार उनके निर्देश पर भाजपा कार्यालय के भीतर से पुलिस सुरक्षा हटाई गई, और जब एक कार्यकर्ता ने उनके साथ सेल्फी लेनी चाही तो उन्होंने प्यार से सिर पर हाथ रखकर मना कर दिया।

बंसल न्यूज़ के मुताबिक संगठन को पहले से ही निर्देश थे कि स्वागत में होर्डिंग और बैनर न लगाए जाएं, इसलिए राजधानी की सड़कों पर इस बार सिर्फ भाजपा के झंडे दिखे। भाजयुमो की बाइक रैली क्यों रद्द हुई, इसकी वजह आधिकारिक रूप से साफ नहीं की गई है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले तक हज़ारों कार्यकर्ताओं को एयरपोर्ट पर जुटाने और लंबी बाइक रैली की तैयारी की खबरें आ रही थीं।

  • स्वागत: केवल 16 नामित पदाधिकारी और विधायक, मंत्री नहीं बुलाए गए
  • शहर में होर्डिंग-बैनर नहीं, रास्ते में सिर्फ पार्टी के झंडे
  • भाजयुमो की प्रस्तावित बाइक रैली देर रात रद्द
  • दो दिन (25-26 अक्टूबर) में कुल 12 बैठकें, साथ में सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू

12 बैठकों के पीछे असली एजेंडा

दिन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनने से तय की गई थी। भास्कर में छपे कार्यक्रम के मुताबिक इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री और महामंत्रियों के साथ बैठक, फिर प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग और जिला प्रभारियों, पूर्व विधायकों-सांसदों और पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों से अलग-अलग चर्चा होनी है। रात में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक रखी गई है। सोमवार को विधायकों, सांसदों, मंत्रियों, निगम-मंडलों के अध्यक्षों और विचार परिवार के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें होंगी।

कागज़ पर यह संगठनात्मक समीक्षा है, लेकिन इसकी परतें गहरी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक फोकस उन 36 सीटों पर रहेगा जो भाजपा 2023 के विधानसभा चुनाव में हार गई थी। 90 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, इसलिए बाकी सीटों पर बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों की हालत की पड़ताल होनी है। मंत्रियों और निगम-मंडल अध्यक्षों के कामकाज पर फीडबैक लेने की बात भी सामने आई है, जिसे पार्टी के भीतर एक तरह का ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जा रहा है।

ईटीवी भारत की रिपोर्ट में संगठन सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पूर्व सांसदों और विधायकों से वन-टू-वन चर्चा होगी और 50 से ज़्यादा पुराने नेताओं को नई ज़िम्मेदारियां मिल सकती हैं। यह भी बताया गया कि नेताओं को इंटरनेट मीडिया पर व्यक्तिगत प्रचार के बजाय सरकार की योजनाओं का प्रचार करने की हिदायत दी गई है। ये बातें सूत्रों पर आधारित हैं, पार्टी ने इन्हें औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया है।

भूपेश बघेल का तंज: सिलेंडर, पाइपलाइन और पोस्टर

जनता से रिश्ता की रिपोर्ट के मुताबिक भूपेश बघेल ने स्मृति ईरानी के पुराने बयानों की याद दिलाते हुए कहा कि वे पहले 500 रुपये में गैस सिलेंडर मिलने की बात करती थीं, और अब अडानी गैस पाइपलाइन बिछाने जा रहे हैं। बघेल ने आशंका जताई कि पाइपलाइन से गैस आपूर्ति बढ़ने पर गैस एजेंसी चलाने वालों के रोज़गार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने मोबाइल रिचार्ज प्लान महंगे होने का उदाहरण देकर कहा कि आगे गैस भी महंगी हो सकती है। यह एक आशंका है, इसके समर्थन में उन्होंने कोई आंकड़ा पेश नहीं किया।

पोस्टर-बैनर न लगाने के निर्देश पर भी बघेल ने साय सरकार को घेरा। उनका आरोप है कि सरकार प्रचार पर काफी पैसा खर्च करती है और प्रधानमंत्री के करीब दिखने के लिए भी ऐसे प्रचार होते हैं। तंज के अंदाज़ में उन्होंने कहा कि अगर पोस्टर-बैनर नहीं लगेंगे तो भाजपा के बहुत से लोग बेरोज़गार हो जाएंगे।

वीडियो स्रोत: Anaadi TV (YouTube) | मूल वीडियो देखें

भाजपा की ओर से बघेल के इन तंजों पर अब तक कोई सीधा जवाब सामने नहीं आया है। पार्टी नेता इस दौरे को पूरी तरह संगठन के विषयों पर केंद्रित बता रहे हैं। प्रतिक्रिया आने पर यह रिपोर्ट अपडेट की जाएगी। बघेल पिछले कुछ दिनों से अडानी के मुद्दे पर लगातार हमलावर हैं, भिलाई स्टील प्लांट को लेकर उनकी आशंका पर भी भाजपा सांसद विजय बघेल से उनकी तीखी बयानबाज़ी हो चुकी है।

ईरानी और बघेल: पुराना आमना-सामना

स्मृति ईरानी और भूपेश बघेल का टकराव नया नहीं है। 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान, जब बघेल मुख्यमंत्री थे, तब केंद्रीय मंत्री रहते हुए ईरानी ने ED के दावों का हवाला देकर महादेव सट्टा ऐप मामले में उन पर गंभीर आरोप लगाए थे। बघेल ने उस समय इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज किया था और ED पर भाजपा के लिए काम करने का आरोप लगाया था। वह मामला अब भी जांच और अदालती प्रक्रिया के दायरे में है।

अमर उजाला के मुताबिक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सितंबर में ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा का प्रदेश प्रभारी बनाया था, बिहार के सिद्धार्थ शंभू को सह-प्रभारी। अमेठी में 2019 में राहुल गांधी को हराने और 2024 में वहीं हारने के बाद ईरानी को संगठन में महासचिव की ज़िम्मेदारी मिली थी। वे अपने आक्रामक भाषणों के लिए जानी जाती हैं, ऐसे में कांग्रेस के लिए वे एक जाना-पहचाना निशाना भी हैं और भाजपा के लिए एक तेज़ चेहरा भी।

इस दौरे से क्या समझ आता है

पहली बात, भाजपा राज्य में सरकार बनने के करीब तीन साल बाद अब संगठन और सरकार के बीच तालमेल पर खुलकर ध्यान दे रही है। मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और पुराने नेताओं की नाराज़गी दूर करने की कोशिश बताती है कि पार्टी 2028 से पहले अंदरूनी ढीलापन नहीं चाहती। हाल में उप मुख्यमंत्री अरुण साव का कांग्रेस पर दिया बयान भी इसी आक्रामक तैयारी का हिस्सा दिखता है।

दूसरी बात, सादगी वाला स्वागत एक सोचा-समझा संदेश है, कि प्रभारी शक्ति प्रदर्शन नहीं, काम का हिसाब देखने आई हैं। लेकिन यही सादगी विपक्ष को सवाल पूछने का मौका भी दे रही है कि बाकी समय प्रचार पर होने वाला खर्च कैसे जायज़ है। तीसरी बात, कांग्रेस इस वक्त SIR और मतदाता सूची से लेकर धान खरीदी तक कई मोर्चों पर सरकार को घेर रही है, इसलिए ईरानी की बैठकों में इन मुद्दों का जवाब तैयार करने की रणनीति भी बनना तय माना जा रहा है।

अब नज़र सोमवार की बैठकों पर है, जब मंत्री और विधायक आमने-सामने होंगे। अगर किसी मंत्री या निगम-मंडल अध्यक्ष के कामकाज पर नाराज़गी खुलकर सामने आती है, तो यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक समीक्षा से आगे बढ़कर सरकार में फेरबदल की अटकलों को भी हवा दे सकता है। फिलहाल ऐसी किसी बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

इस रिपोर्ट के तथ्य और बयान इन मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं: IBC24, दैनिक भास्कर, दैनिक भास्कर (कार्यक्रम), जनता से रिश्ता, जनता से रिश्ता (बघेल का बयान), बंसल न्यूज़, ईटीवी भारत, अमर उजाला, लल्लूराम।

Bharat Hirwani

भरत हिरवानी Timetrolls.in के संस्थापक और संपादक हैं। वे टेक, AI, सरकारी योजनाओं और देश-दुनिया की खबरें आसान हिंदी में, आधिकारिक स्रोतों से जाँचकर लिखते हैं। नौकरी की ताज़ा खबरों के लिए उनकी वेबसाइट bharathirwanijobs.com भी देखें।

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